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सिंहासन हिल उठे राजवंशों ने भृकुटी तानी थी,बूढ़े भारत में आई फिर से नयी जवानी थी,गुमी हुई आज़ादी की कीमत सबने पहचानी थी,दूर फिरंगी को करने की सबने मन में ठानी थी।

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सिंहासन हिल उठे राजवंशों ने भृकुटी तानी थी, बूढ़े भारत में आई फिर से नयी जवानी थी, गुमी हुई आज़ादी की कीमत सबने पहचानी थी, दूर फिरंगी को करने की सबने मन में ठानी थी। चमक उठी सन सत्तावन में, वह तलवार पुरानी थी, बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी, खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।। कानपूर के नाना की, मुँहबोली बहन छबीली थी, लक्ष्मीबाई नाम, पिता की वह संतान अकेली थी, नाना के सँग पढ़ती थी वह, नाना के सँग खेली थी, बरछी ढाल, कृपाण, कटारी उसकी यही सहेली थी। वीर शिवाजी की गाथायें उसकी याद ज़बानी थी, बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी, खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।। लक्ष्मी थी या दुर्गा थी वह स्वयं वीरता की अवतार, देख मराठे पुलकित होते उसकी तलवारों के वार, नकली युद्ध-व्यूह की रचना और खेलना खूब शिकार, सैन्य घेरना, दुर्ग तोड़ना ये थे उसके प्रिय खिलवार। महाराष्टर-कुल-देवी उसकी भी आराध्य भवानी थी, बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी, खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।। हुई वीरता की वैभव के साथ सगाई झाँसी में, ब्याह हुआ रानी बन आई लक्ष्...

यह पोस्ट आज से ठीक 5 वर्ष पूर्व का है। आज भी उसी 5 साल पुरानी कसौटी पर पुनः अवलोकन कीजिए।राहुल गांधी के लिए मुसीबतों का दौर बढ़ता जा रहा है। राहुल गांधी एक ऐसे व्यक्ति के रूप में देश की राजनीति में देखे जाते हैं जिन्होंने अभी तक अपनी राजनीतिक परिपक्वता को छुआ नहीं है।

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यह पोस्ट आज से ठीक 5 वर्ष पूर्व का है। आज भी उसी 5 साल पुरानी कसौटी पर पुनः अवलोकन कीजिए। राहुल गांधी के लिए मुसीबतों का दौर बढ़ता जा रहा है। राहुल गांधी एक ऐसे व्यक्ति के रूप में देश की राजनीति में देखे जाते हैं जिन्होंने अभी तक अपनी राजनीतिक परिपक्वता को छुआ नहीं है। उनकी राजनीतिक परिपक्वता के बारे में संदेह आज भी होता है। इस बीच राहुल गांधी के और लोकप्रिय होने की बातें विभिन्न इकोसिस्टम द्वारा किए जाती रही है। यह वह कांग्रेसी इकोसिस्टम है जो कांग्रेस पार्टी ने 70 साल में बनाया है। दुर्भाग्यवश भारतीय जनता पार्टी के पास ऐसा कोई सिस्टम नहीं है। यदि होता तो निश्चित रूप से मान कर चलिए कि नरेंद्र मोदी के सामने परसेप्शन के मामले में कोई टिक ना पाता । वैसे आज भी स्थितियां कुछ ऐसी ही है लेकिन इसके लिए नरेंद्र मोदी को जो जी तोड़ मेहनत करनी पड़ी है वह देश की जनता जानती है।   कांग्रेस पार्टी को एक अमरत्व प्राप्त है। अमरत्व का मतलब देश में स्थितियां चाहे जो भी हो कांग्रेस पार्टी कभी दोषी नहीं रही। जब देश में महंगाई बढ़ी तो कहां गया कि महंगाई बढ़ गई है। वहां कांग्रेस को दोष नहीं द...

जरूर पढ़ें~मशहूर फिल्म कलाकार आशुतोष राणा की यह पोस्ट किसी ग्रुप से होती हुई मेरे पास तक पहुंची हे ,अपने बच्चों की खातिर समय निकाल कर जरूर पढियेगा....आज मेरे पूज्य पिताजी का जन्मदिन है सो उनको स्मरण करते हुए एक घटना साँझा कर रहा हूँ।बात सत्तर के दशक की है जब हमारे पूज्य पिताजी ने हमारे बड़े भाई मदनमोहन जो राबर्ट्सन कॉलेज जबलपुर से MSC कर रहे थे की सलाह पर हम ३ भाइयों को बेहतर शिक्षा के लिए गाडरवारा के कस्बाई विद्यालय से उठाकर जबलपुर शहर के क्राइस्टचर्च स्कूल में दाख़िला करा दिया। मध्य प्रदेश के महाकौशल अंचल में क्राइस्टचर्च उस समय अंग्रेज़ी माध्यम के विद्यालयों में अपने शीर्ष पर था। पूज्य बाबूजी व माँ हम तीनों भाइयों ( नंदकुमार, जयंत, व मैं आशुतोष ) का क्राइस्टचर्च में दाख़िला करा हमें हॉस्टल में छोड़ के अगले रविवार को पुनः मिलने का आश्वासन दे के वापस चले गए।मुझे नहीं पता था की जो इतवार आने वाला है वह मेरे जीवन में सदा के लिए चिन्हित होने वाला है, इतवार का मतलब छुट्टी होता है लेकिन सत्तर के दशक का वह इतवार मेरे जीवन की छुट्टी नहीं "घुट्टी" बन गया।इतवार की सुबह से ही मैं आह्लादित था, ये मेरे जीवन के पहले सात दिन थे जब मैं बिना माँ बाबूजी के अपने घर से बाहर रहा था। मन मिश्रित भावों से भरा हुआ था, हृदय के किसी कोने में माँ,बाबूजी को इम्प्रेस करने का भाव बलवती हो रहा था , यही वो दिन था जब मुझे प्रेम और प्रभाव के बीच का अंतर समझ आया। बच्चे अपने माता पिता से सिर्फ़ प्रेम ही पाना नहीं चाहते वे उन्हें प्रभावित भी करना चाहते हैं। दोपहर ३.३० बजे हम हॉस्टल के विज़िटिंग रूम में आ गए•• ग्रीन ब्लेजर, वाइट पैंट, वाइट शर्ट, ग्रीन एंड वाइट स्ट्राइब वाली टाई और बाटा के ब्लैक नॉटी बॉय शूज़.. ये हमारी स्कूल यूनीफ़ॉर्म थी। हमने विज़िटिंग रूम की खिड़की से स्कूल के कैम्पस में मेन गेट से हमारी मिलेट्री ग्रीन कलर की ओपन फ़ोर्ड जीप को अंदर आते हुए देखा, जिसे मेरे बड़े भाई मोहन जिन्हें पूरा घर भाईजी कहता था ड्राइव कर रहे थे,और माँ बाबूजी बैठे हुए थे।मैं बेहद उत्साहित था मुझे अपने पर पूर्ण विश्वास था की आज इन दोनों को इम्प्रेस कर ही लूँगा। मैंने पुष्टि करने के लिए जयंत भैया जो मुझसे ६ वर्ष बड़े हैं उनसे पूछा मैं कैसा लग रहा हूँ ? वे मुझसे अशर्त प्रेम करते थे मुझे लेके प्रोटेक्टिव भी थे बोले शानदार लग रहे हो नंद भैया ने उनकी बात का अनुमोदन कर मेरे हौसले को और बढ़ा दिया।जीप रुकी..उलटे पल्ले की गोल्डन ऑरेंज साड़ी में माँ और झक्क सफ़ेद धोती कुर्ता गांधी टोपी और काली जवाहर बंड़ी में बाबूजी उससे उतरे, हम दौड़ कर उनसे नहीं मिल सकते थे ये स्कूल के नियमों के ख़िलाफ़ था, सो मीटिंग हॉल में जैसे सैनिक विश्राम की मुद्रा में अलर्ट खड़ा रहता है एक लाइन में तीनों भाई खड़े माँ बाबूजी का अपने पास पहुँचने का इंतज़ार करने लगे, जैसे ही वे क़रीब आए, हम तीनों भाइयों ने सम्मिलित स्वर में अपनी जगह पर खड़े खड़े Good evening Mummy. Good evening Babuji. कहा। मैंने देखा good evening सुनके बाबूजी हल्का सा चौंके फिर तुरंत ही उनके चहरे पे हल्की स्मित आई जिसमें बेहद लाड़ था मैं समझ गया की ये प्रभावित हो चुके हैं । मैं जो माँ से लिपटा ही रहता था माँ के क़रीब नहीं जा रहा था ताकि उन्हें पता चले की मैं इंडिपेंडेंट हो गया हूँ .. माँ ने अपनी स्नेहसिक्त मुस्कान से मुझे छुआ मैं माँ से लिपटना चाहता था किंतु जगह पर खड़े खड़े मुस्कुराकर अपने आत्मनिर्भर होने का उन्हें सबूत दिया। माँ ने बाबूजी को देखा और मुस्कुरा दीं, मैं समझ गया की ये प्रभावित हो गईं हैं। माँ, बाबूजी, भाईजी और हम तीन भाई हॉल के एक कोने में बैठ बातें करने लगे हमसे पूरे हफ़्ते का विवरण माँगा गया, और ६.३० बजे के लगभग बाबूजी ने हमसे कहा की अपना सामान पैक करो तुम लोगों को गाडरवारा वापस चलना है वहीं आगे की पढ़ाई होगी•• हमने अचकचा के माँ की तरफ़ देखा माँ बाबूजी के समर्थन में दिखाई दीं। हमारे घर में प्रश्न पूछने की आज़ादी थी घर के नियम के मुताबिक़ छोटों को पहले अपनी बात रखने का अधिकार था, सो नियमानुसार पहला सवाल मैंने दागा और बाबूजी से गाडरवारा वापस ले जाने का कारण पूछा ?

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जरूर पढ़ें ~मशहूर फिल्म कलाकार आशुतोष राणा की यह पोस्ट किसी ग्रुप से होती हुई मेरे पास तक पहुंची हे , अपने बच्चों की खातिर समय निकाल कर जरूर पढियेगा.... आज मेरे पूज्य पिताजी का जन्मदिन है सो उनको स्मरण करते हुए एक घटना साँझा कर रहा हूँ। बात सत्तर के दशक की है जब हमारे पूज्य पिताजी ने हमारे बड़े भाई मदनमोहन जो राबर्ट्सन कॉलेज जबलपुर से MSC कर रहे थे की सलाह पर हम ३ भाइयों को बेहतर शिक्षा के लिए गाडरवारा के कस्बाई विद्यालय से उठाकर जबलपुर शहर के क्राइस्टचर्च स्कूल में दाख़िला करा दिया। मध्य प्रदेश के महाकौशल अंचल में क्राइस्टचर्च उस समय अंग्रेज़ी माध्यम के विद्यालयों में अपने शीर्ष पर था।  पूज्य बाबूजी व माँ हम तीनों भाइयों ( नंदकुमार, जयंत, व मैं आशुतोष ) का क्राइस्टचर्च में दाख़िला करा हमें हॉस्टल में छोड़ के अगले रविवार को पुनः मिलने का आश्वासन दे के वापस चले गए। मुझे नहीं पता था की जो इतवार आने वाला है वह मेरे जीवन में सदा के लिए चिन्हित होने वाला है, इतवार का मतलब छुट्टी होता है लेकिन सत्तर के दशक का वह इतवार मेरे जीवन की छुट्टी नहीं "घुट्टी" बन गया। इतवार की सुबह से ही मै...

कभी सोचना : एक सर्वे के मुताबिक भारत में साल भर में शादियों पर जितना खर्च हो रहा है, उतनी कई देशों की GDP भी नहीं है।सनातन में शादी एक संस्कार होती थी जो अब एक इवेंट बन कर रह गई हैं। पहले शादी समारोह मतलब दो लोगों को जुड़ने का एहसास कराते पवित्र विधि विधान, परस्पर दोनों पक्षों की पहचान कराते रीति- रिवाज, नेग भी मान सम्मान होते थे। पहले हल्दी और मेंहदी यह सब घर अंदर हो जाता था किसी को पता भी नहीं होता था। पहले जो शादियां मंडप में बिना तामझाम के होती थी, वह भी शादियां ही होती थी और तब दाम्पत्य जीवन इससे कहीं ज्यादा सुखी थे। परंतु समाज व सोशल मीडिया पर दिखावे का ऐसा भूत चढ़ा है कि किसी को यह भान ही नहीं है कि क्या करना है क्या नहीं ? यह एक दूसरे से ज्यादा आधुनिक और अमीर दिखाने के चक्कर में लोग हद से ज्यादा दिखावा करने लगे हैं। अड़तालिस किलो की बिटिया को पचास किलो का लहंगा भारी न लगता। माता पिता की अच्छी सीख की तुलना में कई किलो मेकअप हल्का लगता है। हर इवेंट पर घंटों का फोटो शूट थकान नहीं देता पर शादी की रस्म शुरू होते ही पंडित जी जल्दी करिए, कितना लम्बा पूजा पाठ है, कितनी थकान वाला सिस्टम है"

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कभी सोचना :  एक सर्वे के मुताबिक भारत में साल भर में शादियों पर जितना खर्च हो रहा है, उतनी कई देशों की GDP भी नहीं है। सनातन में शादी एक संस्कार होती थी जो अब एक इवेंट बन कर रह गई हैं। पहले शादी समारोह मतलब दो लोगों को जुड़ने का एहसास कराते पवित्र विधि विधान, परस्पर दोनों पक्षों की पहचान कराते रीति- रिवाज, नेग भी मान सम्मान होते थे।  पहले हल्दी और मेंहदी यह सब घर अंदर हो जाता था किसी को पता भी नहीं होता था। पहले जो शादियां मंडप में बिना तामझाम के होती थी, वह भी शादियां ही होती थी और तब दाम्पत्य जीवन इससे कहीं ज्यादा सुखी थे। परंतु समाज व सोशल मीडिया पर दिखावे का ऐसा भूत चढ़ा है कि किसी को यह भान ही नहीं है कि क्या करना है क्या नहीं ?  यह एक दूसरे से ज्यादा आधुनिक और अमीर दिखाने के चक्कर में लोग हद से ज्यादा दिखावा करने लगे हैं।  अड़तालिस किलो की बिटिया को पचास किलो का लहंगा भारी न लगता। माता पिता की अच्छी सीख की तुलना में कई किलो मेकअप हल्का लगता है। हर इवेंट पर घंटों का फोटो शूट थकान नहीं देता पर शादी की रस्म शुरू होते ही पंडित जी जल्दी करिए, कितना लम्बा...

हिन्दुओं के प्राचीन 113 मंदिर===================अखंड भारत की चारों दिशाओं में स्थित प्राचीन व भव्य 113 मंदिरों की लिस्ट। यदि आप आध्यात्मिक अनुभव लेना चाहते हैं तो यहां जरूर जाएं।इसे जरूर पढ़ें...हिन्दू धर्म : तीर्थ करना है जरूरी

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हिन्दुओं के प्राचीन 113 मंदिर =================== अखंड भारत की चारों दिशाओं में स्थित प्राचीन व भव्य 113 मंदिरों की लिस्ट। यदि आप आध्यात्मिक अनुभव लेना चाहते हैं तो यहां जरूर जाएं। इसे जरूर पढ़ें...हिन्दू धर्म : तीर्थ करना है जरूरी 1. काशी विश्वनाथ मंदिर वाराणसी, उत्तरप्रदेश 2. श्रीरामनथा स्वामी मंदिर रामेश्वरम्, तमिलनाडु 3. श्रीजगन्नाथ मंदिर, पुरी, ओडिशा 4. सूर्य मंदिर कोणार्क, ओडिशा 5. श्रीपद्मनाभस्वामी मंदिर तिरूअनंतपुरम, केरल 6. श्रीमहाकालेश्वर मंदिर उज्जैन, मध्यप्रदेश 7. श्रीगंगा सरस्वती मंदिर बसरा, तेलंगाना 8. एकलिंगनाथजी मंदिर, उदयपुर, राजस्थान 9. श्रीद्वारकाधीश, गुजरात 10. श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर, मथुरा 11. श्रीदक्षिणेश्वर मंदिर, कोलकाता 12. श्रीसिद्धिविनायक मंदिर, मुंबई 13. श्रीवेंकटेश्वर मंदिर, तिरूपति 14. कंधारिया महादेव मंदिर, खजुराहो 15. केदारनाथ, उत्तराखंड 16. श्रीमुरूदेश्वर स्वामी मंदिर, कर्नाटक 17. पशुपतिनाथ मंदिर, काठमांडू 18. गंगोत्री मंदिर, उत्तराखंड 19. श्रीनाथजी मंदिर, नाथद्वारा 20. ब्रह्मा मंदिर, पुष्कर : 21. बद्रीनारायण मंदिर, उत्तराखंड22.रघुनाथ मंदि...

कडवा है पर सत्य है । ...नीलामे दो दीनार..... "जबरदस्ती का भाईचारा ढोते हिंदुओं अपना इतिहास तो .

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कडवा है पर सत्य है ।  ...नीलामे दो दीनार..... "जबरदस्ती का भाईचारा ढोते हिंदुओं अपना इतिहास तो देखो................. ... समयकाल.. ईसा के बाद की ग्यारहवीं सदी.. भारत अपनी पश्चिमोत्तर सीमा पर अभी-अभी ही राजा जयपाल की पराजय हुई थी ... इस पराजय के तुरंत पश्चात का अफगानिस्तान के एक शहर..... गजनी का एक बाज़ार..! ऊंचे से एक चबूतरे पर खड़ी कम उम्र की सैंकड़ों हिन्दु स्त्रियों की भीड .. जिनके सामने हज़ारों वहशी से दीखते बदसूरत किस्म के लोगों की भीड़ लगी हुई थी.. जिनमें अधिकतर अधेड़ या उम्र के उससे अगले दौर में थे.. ! कम उम्र की उन स्त्रियों की स्थिति देखने से ही अत्यंत दयनीय प्रतीत हो रही थी.. उनमें अधिकांश के गालों पर आंसुओं की सूखी लकीरें खिंची हुई थी.. मानो आँसुओं को स्याही बना कर हाल ही में उनके द्वारा झेले गए भीषण दौर की कथा प्रारब्ध ने उनके कोमल गालों पर लिखने का प्रयास किया हो.. !  एक बात जो उन सब में समान थी... किसी के भी शरीर पर वस्त्र का एक छोटा सा टुकड़ा नाम को भी नहीं था.. सभी सम्पूर्ण निर्वसना ..... ! सभी के पैरों में छाले थे.. मानो सैकड़ों मील की दूरी पैदल तय की हो.. ! साम...

“विद्वान” का अर्थ पता चल गया !“विद्वान” का अर्थ है “पण्डित”

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“विद्वान” का अर्थ पता चल गया ! “विद्वान” का अर्थ है “पण्डित”, और दोनों के अर्थ है = “वह व्यक्ति जो झूठ बोले कि जातियाँ ईश्वर ने बनायी” । अतः जो व्यक्ति “विद्वान” नहीं है,अर्थात् “विद्वान के विलोम” हैं,वही सच बोलता है । “विद्वान” तो झूठ बकता है । इस परिभाषा का आविष्कार करने वाले लोग तो “विद्वान” हो नहीं सकते क्योंकि “विद्वान” को तो वे लोग झूठ बकने वाले कहते हैं । अतः इस परिभाषा का आविष्कार करने वाले लोग “विद्वान के विलोम” हैं । “विद्वान के विलोम” लोग कहते हैं कि जातियों के कारण देश गुलाम बना । श्रीराम,श्रीकृष्ण,चाणक्य आदि के समय में जातियाँ थीं,अतः भारत गुलाम था । किसका गुलाम था?यूरिशेया से आने वाले “विद्वानों” ने भारत के मूलनिवासियों को गुलाम बना लिया । अब समय आ गया है कि सब लोग “विद्वान के विलोम” बन जायें और यूरेशियनों को भगा दें । गोरी,गजनवी,अकबर,औरंगजेब आदि ने ‘हिन्दुस्तान’ को गुलाम नहीं बनाया क्योंकि वे लोग ‘हिन्दुस्तान’ में पैदा होने के कारण हिन्दू थे । गान्धार  ‘हिन्दुस्तान’ में था तो तालिबान भी हिन्दू ही है । केवल यूरेशियनों को भारतीय नहीं माना जा सकता क्योंकि वे बाहर से आये...

-माँ-बाप हमारे लिये* *ATM कार्ड बन सकते है,* *तो ,हम उनके लिए* *Aadhar Card तो बन ही सकते है. 💕💕💕

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जब एक शख्स लगभग पैंतालीस वर्ष के थे तब उनकी पत्नी का स्वर्गवास हो गया था। लोगों ने दूसरी शादी की सलाह दी परन्तु उन्होंने यह कहकर मना कर दिया कि पुत्र के रूप में पत्नी की दी हुई भेंट मेरे पास हैं, इसी के साथ पूरी जिन्दगी अच्छे से कट जाएगी। पुत्र जब वयस्क हुआ तो पूरा कारोबार पुत्र के हवाले कर दिया। स्वयं कभी अपने तो कभी दोस्तों के ऑफिस में बैठकर समय व्यतीत करने लगे। पुत्र की शादी के बाद वह ओर अधिक निश्चित हो गये। पूरा घर बहू को सुपुर्द कर दिया। पुत्र की शादी के लगभग एक वर्ष बाद दोहपर में खाना खा रहे थे, पुत्र भी लंच करने ऑफिस से आ गया था और हाथ–मुँह धोकर खाना खाने की तैयारी कर रहा था। उसने सुना कि पिता जी ने बहू से खाने के साथ दही माँगा और बहू ने जवाब दिया कि आज घर में दही उपलब्ध नहीं है। खाना खाकर पिताजी ऑफिस चले गये। थोडी देर बाद पुत्र अपनी पत्नी के साथ खाना खाने बैठा। खाने में प्याला भरा हुआ दही भी था। पुत्र ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी और खाना खाकर स्वयं भी ऑफिस चला गया। कुछ दिन बाद पुत्र ने अपने पिताजी से कहा- ‘‘पापा आज आपको कोर्ट चलना है, आज आपका विवाह होने जा रहा है।’’ पिता ने आश्चर...

*डॉ. अम्बेडकर जी* का वह कथन सोचने पर मजबूर का देता है कि *यदि समाज के एक बड़े वर्ग को* *युद्ध से दूर नहीं किया गया होता* *तो

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.   बहुत सटीक व तार्किक विश्लेषण      कभी-कभी विचार आता है कि    1500 ई. के बाद के ब्रिटिश कितने साहसी और बुद्धिमान रहे होंगे, जिन्होंने       एक ठण्डे प्रदेश से निकलकर,  अनजान रास्ते और अनजान जगहों पर          जाकर लोगों को गुलाम बनाया.         अभी भी देखा जाए तो      ब्रिटेन की जनसंख्या और क्षेत्रफल      गुजरात के बराबर है, लेकिन उन्होंने          दशकों नहीं शताब्दियों तक        दुनिया को गुलाम बनाए रखा.    भारत की करोड़ों की जनसंख्या को     मात्र कुछ लाख या हजार लोगों ने       गुलाम बनाकर रखा, और केवल         गुलाम ही नहीं बनाया बल्कि       खूब हत्यायें और लूटपाट भी की.         उनको अपनी कौम पर             कितना गर्व होगा               कि मु...

#दुर्योधनमहाभारत का ही नहीं विश्व के सबसे बड़े खलनायकों का आदिगुरू।

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#दुर्योधन महाभारत का ही नहीं विश्व के सबसे बड़े खलनायकों का आदिगुरू। आपको शायद यह शब्द अजीब लग रहा होगा लेकिन सत्य यही है। संसार में एक से एक हिंसक और खूँख्वार  पात्र हुये लेकिन दुर्योधन संसार का पहला अनूठा खलनायक था।  क्या वह रावण से ज्यादा खतरनाक योद्धा था?  क्या वह अलैग्जेंड्रिया की लाइब्रेरी जलाने वाले खलीफा उमर  से बड़ा बर्बर था? क्या वह तैमूर गजनवी और औरंगजेब जैसे मुस्लिम बादशाहों जैसा हत्यारा था?  नहीं, वह इन पैशाचिक गुणों में इन खलनायकों के आसपास भी नहीं था लेकिन उसमें एक ऐसी कला थी जिसने न केवल उस युग के जनसामान्य ही नहीं बल्कि राजनीति के माहिर ऋषियों व राजाओं को भी भ्रमित कर दिया।  वह घोर अन्यायी और परपीड़क होने के बावजूद स्वयं को विक्टिम प्रदर्शित करने में माहिर था। वह झूठा नैरेटिव गढ़ने में माहिर था। उसकी इस कला ने उसके बर्बर कार्यों और पापों को ही नहीं ढंक लिया बल्कि उल्टे पांडवों को ही लगभग अधर्मी सिद्ध कर दिया।  -भरतवंश में योग्यतम राजकुमार को राज्य देने की परंपरा थी और उसने जनसामान्य के सामने सिद्ध कर दिया कि उसे केवल उसके पिता की नेत्रहीनत...

मेरी पुस्तक में एक अध्याय है, जिसका नाम है "पाकिस्तान मेरी लाश पर बनेगा"... इसी अध्याय का एक अंश मैं यहां पोस्ट कर रहा हूं। "आधी रात की नियति और दाग-दाग उजाला!"दिल्ली, 15 अगस्त, 1947 की रात... दो सौ वर्ष की गुलामी के बाद भारत आजाद हो गया था। सेंट्रल हॉल में भारत के पहले प्रधानमंत्री नेहरू की आवाज गूंजी, "कई सालों पहले, हमने नियति के साथ एक वादा किया था और अब समय आ गया है कि हम अपना वादा निभाएं। आधी रात के समय, जब सारी दुनिया सो रही होगी, भारत जीवन और स्वतंत्रता के लिए जाग जाएगा।" आधी रात में नेहरू जिस सुबह के सपने दिखा रहे थे, वह कुछ लोगों के लिए भयानक मंजर लेकर आने वाली थी। अमृतसर, 15 अगस्त, 1947 की सुबह... रेलवे स्टेशन पर बेतहाशा भीड़ थी। लाहौर से आने वाली गाड़ी का समय हो गया था। प्लेटफॉर्म पर लोगों की भीड़ पाकिस्तान से आने वाले अपनों के इंतजार में खड़ी थी।

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मेरी पुस्तक में एक अध्याय है, जिसका नाम है "पाकिस्तान मेरी लाश पर बनेगा"... इसी अध्याय का एक अंश मैं यहां पोस्ट कर रहा हूं।  "आधी रात की नियति और दाग-दाग उजाला!" दिल्ली, 15 अगस्त, 1947 की रात... दो सौ वर्ष की गुलामी के बाद भारत आजाद हो गया था। सेंट्रल हॉल में भारत के पहले प्रधानमंत्री नेहरू की आवाज गूंजी, "कई सालों पहले, हमने नियति के साथ एक वादा किया था और अब समय आ गया है कि हम अपना वादा निभाएं। आधी रात के समय, जब सारी दुनिया सो रही होगी, भारत जीवन और स्वतंत्रता के लिए जाग जाएगा।" आधी रात में नेहरू जिस सुबह के सपने दिखा रहे थे, वह कुछ लोगों के लिए भयानक मंजर लेकर आने वाली थी।  अमृतसर, 15 अगस्त, 1947 की सुबह... रेलवे स्टेशन पर बेतहाशा भीड़ थी। लाहौर से आने वाली गाड़ी का समय हो गया था। प्लेटफॉर्म पर लोगों की भीड़ पाकिस्तान से आने वाले अपनों के इंतजार में खड़ी थी। ट्रेन की सीटी चीत्कार कर अपने आने का ऐलान कर रही थी। स्टेशन मास्टर छेनी सिंह भीड़ को चीरता हुआ प्लेटफॉर्म के कोने पर पहुंचा और लाल झंडी दिखाकर उसने ट्रेन को रुकने का इशारा किया। लोहे के पहियों के र...

300 वर्ष तक भारत के बड़े भूभाग पर राज करने वाले होलकर की जाति से आने वाले धनगर और सिंधिया के कुनबे वाले आज पिछड़े हैं।वहीं उन महाराजा विक्रमादित्य हेमराज तेली के वंशज आज पिछड़े हैं जिन्होंने अखंड भारत पर राज किया..!वह मौर्य साम्राज्य आज पिछड़ा/दलित है, जिनके वंशजों ने पीढ़ियों तक बंगाल की खाड़ी से लेकर पर्शिया की सीमा तक अखंड भारतवर्ष पर राज किया।महापद्मनंद और धनानंद का वंशज नाई समुदाय आज पिछड़ा है। जो भारत के सबसे शक्तिशाली राजे होते थे !हिंदुओं के सबसे पवित्र ग्रंथ रामायण के रचियता और श्री राम की अर्धांगिनी माता सीता को अपने आश्रम में शरण देने वाले, श्री राम के पुत्रों लव कुश का पालन पोषण और उनको शिक्षित करने वाले महर्षि वाल्मीकि के वंशज आज अछूत कैसे हो गए या हो सकते हैं!महर्षि वेद व्यास की माता व मछुआरा समुदाय से आने वाली रानी सत्यवती के वंशज भी आज पिछड़े हैं। जिनके बच्चे हस्तिनापुर पर राज करने वाले कौरव

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300 वर्ष तक भारत के बड़े भूभाग पर राज करने वाले होलकर की जाति से आने वाले धनगर और सिंधिया के कुनबे वाले आज पिछड़े हैं। वहीं उन महाराजा विक्रमादित्य हेमराज तेली के वंशज आज पिछड़े हैं जिन्होंने अखंड भारत पर राज किया..! वह मौर्य साम्राज्य आज पिछड़ा/दलित है, जिनके वंशजों ने पीढ़ियों तक बंगाल की खाड़ी से लेकर पर्शिया की सीमा तक अखंड भारतवर्ष पर राज किया। महापद्मनंद और धनानंद का वंशज नाई समुदाय आज पिछड़ा है। जो भारत के सबसे शक्तिशाली राजे होते थे ! हिंदुओं के सबसे पवित्र ग्रंथ रामायण के रचियता और श्री राम की अर्धांगिनी माता सीता को अपने आश्रम में शरण देने वाले, श्री राम के पुत्रों लव कुश का पालन पोषण और उनको शिक्षित करने वाले महर्षि वाल्मीकि के वंशज आज अछूत कैसे हो गए या हो सकते हैं! महर्षि वेद व्यास की माता व मछुआरा समुदाय से आने वाली रानी सत्यवती के वंशज भी आज पिछड़े हैं। जिनके बच्चे हस्तिनापुर पर राज करने वाले कौरव और पांडव अखंड भारत के सबसे महान योद्धा और चक्रवर्ती सम्राट थे। उस आदिवासी कन्या शकुंतला का समुदाय भी आज अनुसूचित जनजाति में काउंट होता है जिनके पुत्र "भरत" के नाम पर ...

श्रीकृष्ण ने कहा है किधर्म-अधर्म के बीच में यदि आप NEUTRAL रहते हैं, अथवा NO POLITICS का ज्ञान देते हैं, तो आप अधर्म का साथ देते हैं।भीम ने गदा युद्ध के नियम तोड़ते हुए दुर्योधन को कमर के नीचे माराये देख बलराम बीच में आए और भीम की हत्या करने की ठान ली।तब श्रीकृष्ण ने अपने भाई बलराम से कहा.आपको कोई अधिकार नहीं है

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श्रीकृष्ण ने कहा है कि धर्म-अधर्म के बीच में यदि आप NEUTRAL रहते हैं, अथवा NO POLITICS का ज्ञान देते हैं, तो आप अधर्म का साथ देते हैं। भीम ने गदा युद्ध के नियम तोड़ते हुए दुर्योधन को कमर के नीचे मारा ये देख बलराम बीच में आए और भीम की हत्या करने की ठान ली। तब श्रीकृष्ण ने अपने भाई बलराम से कहा. आपको कोई अधिकार नहीं है इस युद्ध में बोलने का क्योंकि आप न्यूट्रल रहना चाहते थे ताकि आपको न कौरवों का, न पांडवों का साथ देना पड़े। इसलिए आप चुपचाप तीर्थ यात्रा का बहाना करके निकल लिए। (१) भीम को दुर्योधन ने विष दिया तब आप न्यूट्रल रहे, (२) पांडवो को लाक्षागृह में जलाने का प्रयास किया गया, तब आप न्यूट्रल रहे, (३) द्यूत क्रीड़ा में छल किया गया तब आप न्यूट्रल रहे, (४) द्रौपदी का वस्त्रहरण किया आप न्यूट्रल रहे, (५) अभिमन्यु की सारे युद्ध नियम तोड़ कर हत्या की गयी, तब भी आप न्यूट्रल रहे! आपने न्यूट्रल रह कर, मौन रह कर, दुर्योधन के हर अधर्म का साथ ही दिया! अब आपको कोई अधिकार नहीं है कि आप कुछ बोलें क्योंकि धर्म-अधर्म के युद्ध में अगर आप न्यूट्रल रहते हैं तो आप भी अधर्म का साथ दे रहे हैं... आज हमारा ये देश ...

लेख थोड़ा तीखा है मगर सच्चा है पूरा पढ़ लो भूमि पूजन तो हो गया मंदिर तो बन जाएगा। पर आगे क्यावैसे तो बड़े-बड़े पराक्रमी राजा हो गए पर मंदिर तो अब बनने जा रहा है। वैसे तो राम मंदिर किसने गिराया अफगानिस्तान वाले बाबर ने।

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लेख थोड़ा तीखा है मगर सच्चा है पूरा पढ़ लो  भूमि पूजन तो हो गया मंदिर तो बन जाएगा। पर आगे क्या वैसे तो  बड़े-बड़े पराक्रमी राजा हो  गए  पर मंदिर तो अब बनने जा रहा है।  वैसे तो राम मंदिर किसने गिराया अफगानिस्तान वाले  बाबर ने। बाबरी मस्जिद के लिए कोर्ट में केस किसने लड़ी मां बलशाली कांग्रेस ने मुस्लिम और कम्युनिस्ट वालों ने। राम मंदिर की केस किसने जीता। कहां  रावण  की शक्ति कहां वानर की शक्ति कहां कांग्रेस की शक्ति  कहां मोदी जी की शक्ति। इसीलिए प्रश्न मंदिर बनाने का नहीं मंदिर संभालने का  है। जब बाबर आया तब भी हिंदू बहुसंख्यक था ।फिर भी राम मंदिर गिरा। जब गजनी आया  तब भी हिंदू बहुसंख्यक था। फिर भी सोरटी सोमनाथ मंदिर गिरा। जब अलाउद्दीन आया। तब भी हिंदू बहुसंख्यक था रानी पद्मिनी को जोहार करना पड़ा। जब मोहम्मद गौरी आया। तब भी हिंदू बहुसंख्यक था फिर भी राजा पृथ्वीराज की आंखें फोड़ दी। जब अकबर आया। तब भी हम बहुसंख्यक थे फिर भी हमने राजा राणा प्रताप को गवाया। जब औरंगजेब आया। तब भी हम बहुसंख्यक थे और हमारे राजा छत्रपति शिवाजी महाराज जी को ...

ना नर में कोई राम बचा, नारी में न कोई सीता ,

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 ना नर में कोई राम बचा,  नारी में न कोई सीता ,  ना धरा बचाने की खातिर विष कोई शंकर पीता है ,  ना श्रीकृष्ण सा धर्म अधर्म का किसी में ज्ञान बचा हैं,  ना हरिश्चंद्र सा सत्य किसी के अंदर रचा बसा हैं, ना गौतम बुद्ध सा धैर्य बचा,, ना नानक जी सा परम त्याग, बस नाच रही है नर के भीतर प्रेतिशोध की कुटिल ये आग, फिर बोलो........... स्वर्णिम युग का क्या अंश बाकी तुममें ,कि किसकी धुनी में रमकर तुम फूले नही समाते हो, ,तुम स्वयं को श्रेष्ठ बताते हो  ?..... मानवता जीवन में कोई भी पराया नहीं होता ये केवल मन का वहम है भरोसा रुका तो मनुष्य पराया साँसे रुकी तो शरीर भी पराया हो जाता है भरोसा और विश्वास एक ही है भरोसा दिलाया जा सकता टूट हुआ विश्वास भी जीता जा सकता है इसलिए मनुष्य से प्रेम करें वस्तु से नहीं वस्तु का उपयोग करें मनुष्य का नहीं  ✒️... जिन्होंने आपका संघर्ष देखा है केवल वही आपके सफलता का मूल्य जानते हैं अन्यथा औरों के लिए आपका भाग्य बहुत अच्छा है "कमाई" की कोई निश्चित परिभाषा नहीं होती "परवाह" करने वाला मित्र "दर्द" समझने वाला पड़ोसी और "सम्मान" करने वाले ...

*गांधी जी होता तो कहता*

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 *गांधी जी होता तो कहता* *आप लोग दो दिन में केवल एक बार खाओ मर नहीं जाओगे पर यह राशन पाकिस्तान के लोग को दो वरना मैं अपनी जान दे दूँगा* ❤️महाराणा प्रताप❤️* *किसी की गुलामी से कहीं अच्छा है कि, उससे लडो, मारो, जीतो, या बलिदान हो जाओ.! जीना है तो गर्व से, गुलामी में जीने से कहीं अच्छा है एक पल गर्व से जीना।* *❤️छत्रपती शिवाजी महाराज❤️* *यदि तू हिन्दू है तो, हिन्दू धर्म की रक्षा कर, देश पर धर्म का राज कर, हिंदवी राज्य ही है ईश्वर की इच्छा, उठा तलवार, राष्ट्रशांति के लिये युद्ध जरुरी है, घुस कर मार।* *❤️गुरु गोविंदसिंह❤️* *हाथ को तेल के डिब्बे में कोहनी तक डालो, फिर उसी हाथ को तिल की बोरी में डालो, जितने तिल हाथ से चिपके उतनी बार भी मु&लिम कसम खाये तो भी उनका भरोसा मत करना।*  *❤️नाथूराम गोडसे❤️* *जो तुम्हारे देश के खिलाफ बोलता है, उसे तोडने की बात करता है, तोडता है . उसे मार ही डाले..धर्म से ही देश बनता है, और देश के लिये प्राण लेना देना छोटी बात हैं ॥* *अधर्म के बढ़ते साये में जुबां खोलेगा कौन, यदि हम भी चुप रहे तो फिर हिंदुओ के लिए बोलेगा कौन?*  *जब संकट में फँसे एक हिन...

सिस्टर लूसी : ‘घंटों नंगी खड़ी रखी जाती हैं ननें, पादरी बनाते हैं यौन सम्बन्ध'*

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*सिस्टर लूसी : ‘घंटों नंगी खड़ी रखी जाती हैं ननें, पादरी बनाते हैं यौन सम्बन्ध'* *🚩क्या आपको बॉलीवुड की वे फिल्में याद हैं जिनमें फादर को दया और प्रेम का मूर्तिमान स्वरूप दिखाया जाता था और हिन्दू सन्यासियों को अपराधी ?? जो मिडिया निर्दोष हिंदू संत आशारामजी बापू पर पागल हो गया था वह आज चुप है।* *🚩केरल की नन सिस्टर लूसी कलाप्पुरा ने अपनी आत्मकथा लिखी है। इन्होंने ही बलात्कार आरोपित पादरी फ्रैंको मुलक्कल के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई थी। सिस्टर लूसी की पुस्तक के कुछ अंश एक मलयालम पब्लिकेशन द्वारा प्रकाशित किए गए हैं। इसमें बताया गया है कि साइरो-मालाबार चर्च में उनका कैसा अनुभव रहा? ईसाई संस्थाओं द्वारा संचालित प्राइवेट स्कूलों में पादरियों द्वारा क्या गुल खिलाए जाते हैं, सिस्टर लूसी की पुस्तक में इसके कई उदाहरण मिलेंगे। पादरी और बिशप अपने पदों का दुरूपयोग करते हुए ननों के साथ जबरदस्ती कर यौन सम्बन्ध बनाते हैं। वो इसके लिए कई ननों की जबरन सहमति भी लेते हैं।* *🚩सिस्टर लूसी ने लिखा कि कॉन्वेंट्स में जवान ननों को पादरियों के पास उनके ‘यौन सुख’ के लिए भेजा जाता था। वहाँ वो सभी ननें घंटों नंगी खड़ी र...

खरगे के बयान को क्या बहुत सोच समझकर मुद्दा बनाया है भाजपा ने ?

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खरगे के बयान को क्या बहुत सोच समझकर मुद्दा बनाया है भाजपा ने ?       कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने आजादी के लिए कुर्बानी वाला बयान देकर आजादी के इतिहास में बीजेपी की भूमिका पर जो सवाल खड़े किए हैं उससे कांग्रेस के गड़े मुर्दे ही उखाड़े जायेंगे। सब से पहले खरगे और कांग्रेस को यह बताना पड़ेगा कि क्या 1947 के पहले बीजेपी या जनसंघ नाम का कोई राजनीति दल था। फिर यह भी सवाल उठेगा कि यदि नहीं था तो जिन लोगों ने आर एस एस की स्थापना की वे क्या कर रहे थे स्वतंत्रता संग्राम के दौरान ? क्या 27 सितंबर  1925 में दशमी के दिन आर एस एस संगठन का गठन करने वाले डा केशवराव बलिराम हेडगेवार का कांग्रेस और आजादी के आंदोलन से कोई लेना देना था या नहीं ? आखिरकार 17 दिसंबर 1928 को सांडर्स की हत्या के बाद भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव फरारी के दौरान डा हेडगेवार के पास ही क्यों पहुंचे थे ?  फिर डा हेडगेवार ने उनको भय्या की ढाणी के यहां रुकवाया था।  भगत सिंह राजगुरु और सुखदेव क्यों महात्मा गांधी, मोती लाल नेहरू, जवाहर लाल नेहरू आदि पर भरोसा नहीं कर पा रहे थे ? इससे आजादी के आंद...

ईनाम ईनाम ईनाम**मुँह माँगा ईनाम**(1) आज़ादी के लिए फाँसी पर चढ़ने वाले किसी भी तीन कांग्रेसी का नाम बताए????**(2) भारत माता की जय* *वंदे मातरम*

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*ईनाम ईनाम ईनाम* *मुँह माँगा ईनाम* *(1) आज़ादी के लिए फाँसी पर चढ़ने वाले किसी भी तीन कांग्रेसी का नाम बताए????* *(2) भारत माता की जय*  *वंदे मातरम* *या*  *फिर हिन्दुस्तान जिंदाबाद बोलते हुए!*  *नेहरू गांधी खानदान की एक भी वीडियो बताये* *(3) धर्मान्तरण का विरोध करते हुए कांग्रेस का एक भी कार्यक्रम..* *(4) लवजिहाद का विरोध करते हुए कांग्रेस का एक भी कार्यक्रम..* *(5) गौहत्या का विरोध करते हुए कांग्रेस का कोई भी कार्यक्रम...*   *(6) रोहिंग्या बांग्लादेशी की घुसपैठ का विरोध करते हुए कोंग्रेस का कोई कार्यक्रम.....*    *(7) आंतकवादी द्वारा मारे गए किसी हिन्दु की मौत का मातम मनाते हुए कोंग्रेस का कोई कार्यक्रम....* *अगर कांग्रेस इन मुख्य चीजों में शामिल नहीं हैं तो हम हिन्दू और देश प्रेमी इन्हें वोट क्यों देते आ रहें हैंं?* *पूछता हैं भारत* सभी साथियों को जय श्री राम🙏

#बचपन से ही एक कथा सुनते आ रहे हैं कि....#एक बिच्छू जल में छटपटा रहा था और एक महात्मा उसे बचा रहे थे...!

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#बचपन से ही एक कथा सुनते आ रहे हैं कि....# एक बिच्छू जल में छटपटा रहा था और एक महात्मा उसे बचा रहे थे...! लेकिन, जैसे ही महात्मा उसे उठाते थे... बिच्छू उन्हें डंक मार कर काट लेता था. ये देख कर... लोगों ने महात्मा को समझाया कि.... महात्मा... ऐसे जीव को क्यों बचाना, जो खुद को बचाने वाले को ही काट रहा है ??? जाने दो न...! लेकिन, ये सुनते ही महात्मा जी पर "महात्मागीरी" हावी हो गई... और, वे कहने लगे...  "जब यह छोटा सा जीव अपना स्वभाव नहीं छोड़ता...  तो, फिर मैं क्यों छोड़ दूँ ???" 'पंचतंत्र' में इतनी कथा के बाद विराम लग गया...!  पर, असलियत में ये कथा आगे भी चलती रही. लोगों ने उस नदी वाली बात को भुला दिया....  पर, महात्मा अपनी "महात्मागीरी" में लगे रहे... और, ढेरों बिच्छू बचा बचा कर अपने इर्द-गिर्द जमा कर लिए ... चूंकि, बिच्छुओं की प्रजनन दर भी बहुत तेज थी तो जल्द ही हर तरफ बिच्छू ही बिच्छू नजर आने लगे. अब वे सारे बिच्छू.... जो पहले सिर्फ छूने पर ही डंक मारते थे, अब, बिना छुए ही खुद से पहल कर महात्मा को "काटने" लगे. यहाँ तक कि... उन्ह...