लेख थोड़ा तीखा है मगर सच्चा है पूरा पढ़ लो भूमि पूजन तो हो गया मंदिर तो बन जाएगा। पर आगे क्यावैसे तो बड़े-बड़े पराक्रमी राजा हो गए पर मंदिर तो अब बनने जा रहा है। वैसे तो राम मंदिर किसने गिराया अफगानिस्तान वाले बाबर ने।

लेख थोड़ा तीखा है मगर सच्चा है पूरा पढ़ लो 
भूमि पूजन तो हो गया मंदिर तो बन जाएगा। पर आगे क्या
वैसे तो  बड़े-बड़े पराक्रमी राजा हो  गए  पर मंदिर तो अब बनने जा रहा है। 

वैसे तो राम मंदिर किसने गिराया अफगानिस्तान वाले  बाबर ने।

बाबरी मस्जिद के लिए कोर्ट में केस किसने लड़ी मां बलशाली कांग्रेस ने मुस्लिम और कम्युनिस्ट वालों ने।

राम मंदिर की केस किसने जीता।
कहां  रावण  की शक्ति कहां वानर की शक्ति कहां कांग्रेस की शक्ति 
कहां मोदी जी की शक्ति।

इसीलिए प्रश्न मंदिर बनाने का नहीं मंदिर संभालने का  है।

जब बाबर आया तब भी हिंदू बहुसंख्यक था ।फिर भी राम मंदिर गिरा।

जब गजनी आया 
तब भी हिंदू बहुसंख्यक था। फिर भी सोरटी सोमनाथ मंदिर गिरा।

जब अलाउद्दीन आया।
तब भी हिंदू बहुसंख्यक था रानी पद्मिनी को जोहार करना पड़ा।

जब मोहम्मद गौरी आया। तब भी हिंदू बहुसंख्यक था फिर भी राजा पृथ्वीराज की आंखें फोड़ दी।

जब अकबर आया। तब भी हम बहुसंख्यक थे फिर भी हमने राजा राणा प्रताप को गवाया।

जब औरंगजेब आया। तब भी हम बहुसंख्यक थे और हमारे राजा छत्रपति शिवाजी महाराज जी को आगरे में पकड़ लिया।

जब अब्दाली आया।तब भी हिंदू बहुसंख्यक थे फिर भी पानीपत में हार गए।

और जब अंग्रेज आ गए।
तब भी हम बहुत संख्यक थे।
झांसी की रानी ,तात्या टोपे , हार गए।

और जब कांग्रेस आई। तब हम बहुसंख्यक भी थे आजाद भी थे ।
फिर भी  60 साल तक राम मंदिर नहीं बना पाए।

अब सवाल मंदिर बनाने का नहीं मंदिर संभालने का है।

तब बाबर अफगानिस्तान से आया था । पर अब तो यहां पर सैकड़ों बाबर  है ।

तब अंग्रेज लंदन से आए थे। पर अब तो यहीं पर ही सैकड़ों अंग्रेज है। तब अंग्रेज हमारे शत्रु थे ।अब तो हमारे नेता ही हमारे शत्रु है ।

यहां पर अपने ही नेता कहते हैं रामायण और महाभारत की देश को जरूरत नहीं।और मदरस मे बिना झिझक इस्लाम सिखाते रहते है।

यहां पर आतंकवादियों को खुदा के बंदे कहते हैं और। साधु-संतों को आतंकी बनाकर जेल में डालते है।

अब तो जागो ।मंदिर बनाया है उसे संभालना तो संगठित होना पड़ेगा । धर्म के लिए कुछ करना पड़ेगा। धर्म के लिए क्या करते हैं। यह बड़ा सवाल है। हम अपनी मर्जी के लिए भजन तो करते हैं। पर गौरक्षण करते हैं।
 हम कीर्तन प्रवचन तो करते हैं ।पर धर्मांतर विषय को डरते हैं ।

आज मोदी जी है ।इसीलिए  सुकून से है। पर आगे क्या धर्म स्थापन होने के बाद पालन करने की जवाबदारी अपनी होती है। 

वारकरी संप्रदाय मैं lइस समय बहुत ही संगठन पढ़ चुके है। यह सब आपस में मिलकर क्या काम कर सकते हैं ।

100 वर्षों से  r.s.s. है ।
कोई दूसरी संगठन नहीं।
 50 साल से v,h,p, कार्यरत है और कोई दूसरी शाखा नहीं। इसे कहते हैं संगठन शक्ति कलियुगे।
जो राम मंदिर निर्माण हुआ है सूरज और चांद रहेगा तब तक रहेगा ।इसी तरह एकता बनाए  रखना जरूरी है।
 
धर्म की जय हो अधर्मी का नाश हो

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