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Showing posts from February, 2023

“विद्वान” का अर्थ पता चल गया !“विद्वान” का अर्थ है “पण्डित”

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“विद्वान” का अर्थ पता चल गया ! “विद्वान” का अर्थ है “पण्डित”, और दोनों के अर्थ है = “वह व्यक्ति जो झूठ बोले कि जातियाँ ईश्वर ने बनायी” । अतः जो व्यक्ति “विद्वान” नहीं है,अर्थात् “विद्वान के विलोम” हैं,वही सच बोलता है । “विद्वान” तो झूठ बकता है । इस परिभाषा का आविष्कार करने वाले लोग तो “विद्वान” हो नहीं सकते क्योंकि “विद्वान” को तो वे लोग झूठ बकने वाले कहते हैं । अतः इस परिभाषा का आविष्कार करने वाले लोग “विद्वान के विलोम” हैं । “विद्वान के विलोम” लोग कहते हैं कि जातियों के कारण देश गुलाम बना । श्रीराम,श्रीकृष्ण,चाणक्य आदि के समय में जातियाँ थीं,अतः भारत गुलाम था । किसका गुलाम था?यूरिशेया से आने वाले “विद्वानों” ने भारत के मूलनिवासियों को गुलाम बना लिया । अब समय आ गया है कि सब लोग “विद्वान के विलोम” बन जायें और यूरेशियनों को भगा दें । गोरी,गजनवी,अकबर,औरंगजेब आदि ने ‘हिन्दुस्तान’ को गुलाम नहीं बनाया क्योंकि वे लोग ‘हिन्दुस्तान’ में पैदा होने के कारण हिन्दू थे । गान्धार  ‘हिन्दुस्तान’ में था तो तालिबान भी हिन्दू ही है । केवल यूरेशियनों को भारतीय नहीं माना जा सकता क्योंकि वे बाहर से आये...

-माँ-बाप हमारे लिये* *ATM कार्ड बन सकते है,* *तो ,हम उनके लिए* *Aadhar Card तो बन ही सकते है. 💕💕💕

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जब एक शख्स लगभग पैंतालीस वर्ष के थे तब उनकी पत्नी का स्वर्गवास हो गया था। लोगों ने दूसरी शादी की सलाह दी परन्तु उन्होंने यह कहकर मना कर दिया कि पुत्र के रूप में पत्नी की दी हुई भेंट मेरे पास हैं, इसी के साथ पूरी जिन्दगी अच्छे से कट जाएगी। पुत्र जब वयस्क हुआ तो पूरा कारोबार पुत्र के हवाले कर दिया। स्वयं कभी अपने तो कभी दोस्तों के ऑफिस में बैठकर समय व्यतीत करने लगे। पुत्र की शादी के बाद वह ओर अधिक निश्चित हो गये। पूरा घर बहू को सुपुर्द कर दिया। पुत्र की शादी के लगभग एक वर्ष बाद दोहपर में खाना खा रहे थे, पुत्र भी लंच करने ऑफिस से आ गया था और हाथ–मुँह धोकर खाना खाने की तैयारी कर रहा था। उसने सुना कि पिता जी ने बहू से खाने के साथ दही माँगा और बहू ने जवाब दिया कि आज घर में दही उपलब्ध नहीं है। खाना खाकर पिताजी ऑफिस चले गये। थोडी देर बाद पुत्र अपनी पत्नी के साथ खाना खाने बैठा। खाने में प्याला भरा हुआ दही भी था। पुत्र ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी और खाना खाकर स्वयं भी ऑफिस चला गया। कुछ दिन बाद पुत्र ने अपने पिताजी से कहा- ‘‘पापा आज आपको कोर्ट चलना है, आज आपका विवाह होने जा रहा है।’’ पिता ने आश्चर...

*डॉ. अम्बेडकर जी* का वह कथन सोचने पर मजबूर का देता है कि *यदि समाज के एक बड़े वर्ग को* *युद्ध से दूर नहीं किया गया होता* *तो

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.   बहुत सटीक व तार्किक विश्लेषण      कभी-कभी विचार आता है कि    1500 ई. के बाद के ब्रिटिश कितने साहसी और बुद्धिमान रहे होंगे, जिन्होंने       एक ठण्डे प्रदेश से निकलकर,  अनजान रास्ते और अनजान जगहों पर          जाकर लोगों को गुलाम बनाया.         अभी भी देखा जाए तो      ब्रिटेन की जनसंख्या और क्षेत्रफल      गुजरात के बराबर है, लेकिन उन्होंने          दशकों नहीं शताब्दियों तक        दुनिया को गुलाम बनाए रखा.    भारत की करोड़ों की जनसंख्या को     मात्र कुछ लाख या हजार लोगों ने       गुलाम बनाकर रखा, और केवल         गुलाम ही नहीं बनाया बल्कि       खूब हत्यायें और लूटपाट भी की.         उनको अपनी कौम पर             कितना गर्व होगा               कि मु...

#दुर्योधनमहाभारत का ही नहीं विश्व के सबसे बड़े खलनायकों का आदिगुरू।

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#दुर्योधन महाभारत का ही नहीं विश्व के सबसे बड़े खलनायकों का आदिगुरू। आपको शायद यह शब्द अजीब लग रहा होगा लेकिन सत्य यही है। संसार में एक से एक हिंसक और खूँख्वार  पात्र हुये लेकिन दुर्योधन संसार का पहला अनूठा खलनायक था।  क्या वह रावण से ज्यादा खतरनाक योद्धा था?  क्या वह अलैग्जेंड्रिया की लाइब्रेरी जलाने वाले खलीफा उमर  से बड़ा बर्बर था? क्या वह तैमूर गजनवी और औरंगजेब जैसे मुस्लिम बादशाहों जैसा हत्यारा था?  नहीं, वह इन पैशाचिक गुणों में इन खलनायकों के आसपास भी नहीं था लेकिन उसमें एक ऐसी कला थी जिसने न केवल उस युग के जनसामान्य ही नहीं बल्कि राजनीति के माहिर ऋषियों व राजाओं को भी भ्रमित कर दिया।  वह घोर अन्यायी और परपीड़क होने के बावजूद स्वयं को विक्टिम प्रदर्शित करने में माहिर था। वह झूठा नैरेटिव गढ़ने में माहिर था। उसकी इस कला ने उसके बर्बर कार्यों और पापों को ही नहीं ढंक लिया बल्कि उल्टे पांडवों को ही लगभग अधर्मी सिद्ध कर दिया।  -भरतवंश में योग्यतम राजकुमार को राज्य देने की परंपरा थी और उसने जनसामान्य के सामने सिद्ध कर दिया कि उसे केवल उसके पिता की नेत्रहीनत...

मेरी पुस्तक में एक अध्याय है, जिसका नाम है "पाकिस्तान मेरी लाश पर बनेगा"... इसी अध्याय का एक अंश मैं यहां पोस्ट कर रहा हूं। "आधी रात की नियति और दाग-दाग उजाला!"दिल्ली, 15 अगस्त, 1947 की रात... दो सौ वर्ष की गुलामी के बाद भारत आजाद हो गया था। सेंट्रल हॉल में भारत के पहले प्रधानमंत्री नेहरू की आवाज गूंजी, "कई सालों पहले, हमने नियति के साथ एक वादा किया था और अब समय आ गया है कि हम अपना वादा निभाएं। आधी रात के समय, जब सारी दुनिया सो रही होगी, भारत जीवन और स्वतंत्रता के लिए जाग जाएगा।" आधी रात में नेहरू जिस सुबह के सपने दिखा रहे थे, वह कुछ लोगों के लिए भयानक मंजर लेकर आने वाली थी। अमृतसर, 15 अगस्त, 1947 की सुबह... रेलवे स्टेशन पर बेतहाशा भीड़ थी। लाहौर से आने वाली गाड़ी का समय हो गया था। प्लेटफॉर्म पर लोगों की भीड़ पाकिस्तान से आने वाले अपनों के इंतजार में खड़ी थी।

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मेरी पुस्तक में एक अध्याय है, जिसका नाम है "पाकिस्तान मेरी लाश पर बनेगा"... इसी अध्याय का एक अंश मैं यहां पोस्ट कर रहा हूं।  "आधी रात की नियति और दाग-दाग उजाला!" दिल्ली, 15 अगस्त, 1947 की रात... दो सौ वर्ष की गुलामी के बाद भारत आजाद हो गया था। सेंट्रल हॉल में भारत के पहले प्रधानमंत्री नेहरू की आवाज गूंजी, "कई सालों पहले, हमने नियति के साथ एक वादा किया था और अब समय आ गया है कि हम अपना वादा निभाएं। आधी रात के समय, जब सारी दुनिया सो रही होगी, भारत जीवन और स्वतंत्रता के लिए जाग जाएगा।" आधी रात में नेहरू जिस सुबह के सपने दिखा रहे थे, वह कुछ लोगों के लिए भयानक मंजर लेकर आने वाली थी।  अमृतसर, 15 अगस्त, 1947 की सुबह... रेलवे स्टेशन पर बेतहाशा भीड़ थी। लाहौर से आने वाली गाड़ी का समय हो गया था। प्लेटफॉर्म पर लोगों की भीड़ पाकिस्तान से आने वाले अपनों के इंतजार में खड़ी थी। ट्रेन की सीटी चीत्कार कर अपने आने का ऐलान कर रही थी। स्टेशन मास्टर छेनी सिंह भीड़ को चीरता हुआ प्लेटफॉर्म के कोने पर पहुंचा और लाल झंडी दिखाकर उसने ट्रेन को रुकने का इशारा किया। लोहे के पहियों के र...

300 वर्ष तक भारत के बड़े भूभाग पर राज करने वाले होलकर की जाति से आने वाले धनगर और सिंधिया के कुनबे वाले आज पिछड़े हैं।वहीं उन महाराजा विक्रमादित्य हेमराज तेली के वंशज आज पिछड़े हैं जिन्होंने अखंड भारत पर राज किया..!वह मौर्य साम्राज्य आज पिछड़ा/दलित है, जिनके वंशजों ने पीढ़ियों तक बंगाल की खाड़ी से लेकर पर्शिया की सीमा तक अखंड भारतवर्ष पर राज किया।महापद्मनंद और धनानंद का वंशज नाई समुदाय आज पिछड़ा है। जो भारत के सबसे शक्तिशाली राजे होते थे !हिंदुओं के सबसे पवित्र ग्रंथ रामायण के रचियता और श्री राम की अर्धांगिनी माता सीता को अपने आश्रम में शरण देने वाले, श्री राम के पुत्रों लव कुश का पालन पोषण और उनको शिक्षित करने वाले महर्षि वाल्मीकि के वंशज आज अछूत कैसे हो गए या हो सकते हैं!महर्षि वेद व्यास की माता व मछुआरा समुदाय से आने वाली रानी सत्यवती के वंशज भी आज पिछड़े हैं। जिनके बच्चे हस्तिनापुर पर राज करने वाले कौरव

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300 वर्ष तक भारत के बड़े भूभाग पर राज करने वाले होलकर की जाति से आने वाले धनगर और सिंधिया के कुनबे वाले आज पिछड़े हैं। वहीं उन महाराजा विक्रमादित्य हेमराज तेली के वंशज आज पिछड़े हैं जिन्होंने अखंड भारत पर राज किया..! वह मौर्य साम्राज्य आज पिछड़ा/दलित है, जिनके वंशजों ने पीढ़ियों तक बंगाल की खाड़ी से लेकर पर्शिया की सीमा तक अखंड भारतवर्ष पर राज किया। महापद्मनंद और धनानंद का वंशज नाई समुदाय आज पिछड़ा है। जो भारत के सबसे शक्तिशाली राजे होते थे ! हिंदुओं के सबसे पवित्र ग्रंथ रामायण के रचियता और श्री राम की अर्धांगिनी माता सीता को अपने आश्रम में शरण देने वाले, श्री राम के पुत्रों लव कुश का पालन पोषण और उनको शिक्षित करने वाले महर्षि वाल्मीकि के वंशज आज अछूत कैसे हो गए या हो सकते हैं! महर्षि वेद व्यास की माता व मछुआरा समुदाय से आने वाली रानी सत्यवती के वंशज भी आज पिछड़े हैं। जिनके बच्चे हस्तिनापुर पर राज करने वाले कौरव और पांडव अखंड भारत के सबसे महान योद्धा और चक्रवर्ती सम्राट थे। उस आदिवासी कन्या शकुंतला का समुदाय भी आज अनुसूचित जनजाति में काउंट होता है जिनके पुत्र "भरत" के नाम पर ...

श्रीकृष्ण ने कहा है किधर्म-अधर्म के बीच में यदि आप NEUTRAL रहते हैं, अथवा NO POLITICS का ज्ञान देते हैं, तो आप अधर्म का साथ देते हैं।भीम ने गदा युद्ध के नियम तोड़ते हुए दुर्योधन को कमर के नीचे माराये देख बलराम बीच में आए और भीम की हत्या करने की ठान ली।तब श्रीकृष्ण ने अपने भाई बलराम से कहा.आपको कोई अधिकार नहीं है

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श्रीकृष्ण ने कहा है कि धर्म-अधर्म के बीच में यदि आप NEUTRAL रहते हैं, अथवा NO POLITICS का ज्ञान देते हैं, तो आप अधर्म का साथ देते हैं। भीम ने गदा युद्ध के नियम तोड़ते हुए दुर्योधन को कमर के नीचे मारा ये देख बलराम बीच में आए और भीम की हत्या करने की ठान ली। तब श्रीकृष्ण ने अपने भाई बलराम से कहा. आपको कोई अधिकार नहीं है इस युद्ध में बोलने का क्योंकि आप न्यूट्रल रहना चाहते थे ताकि आपको न कौरवों का, न पांडवों का साथ देना पड़े। इसलिए आप चुपचाप तीर्थ यात्रा का बहाना करके निकल लिए। (१) भीम को दुर्योधन ने विष दिया तब आप न्यूट्रल रहे, (२) पांडवो को लाक्षागृह में जलाने का प्रयास किया गया, तब आप न्यूट्रल रहे, (३) द्यूत क्रीड़ा में छल किया गया तब आप न्यूट्रल रहे, (४) द्रौपदी का वस्त्रहरण किया आप न्यूट्रल रहे, (५) अभिमन्यु की सारे युद्ध नियम तोड़ कर हत्या की गयी, तब भी आप न्यूट्रल रहे! आपने न्यूट्रल रह कर, मौन रह कर, दुर्योधन के हर अधर्म का साथ ही दिया! अब आपको कोई अधिकार नहीं है कि आप कुछ बोलें क्योंकि धर्म-अधर्म के युद्ध में अगर आप न्यूट्रल रहते हैं तो आप भी अधर्म का साथ दे रहे हैं... आज हमारा ये देश ...

लेख थोड़ा तीखा है मगर सच्चा है पूरा पढ़ लो भूमि पूजन तो हो गया मंदिर तो बन जाएगा। पर आगे क्यावैसे तो बड़े-बड़े पराक्रमी राजा हो गए पर मंदिर तो अब बनने जा रहा है। वैसे तो राम मंदिर किसने गिराया अफगानिस्तान वाले बाबर ने।

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लेख थोड़ा तीखा है मगर सच्चा है पूरा पढ़ लो  भूमि पूजन तो हो गया मंदिर तो बन जाएगा। पर आगे क्या वैसे तो  बड़े-बड़े पराक्रमी राजा हो  गए  पर मंदिर तो अब बनने जा रहा है।  वैसे तो राम मंदिर किसने गिराया अफगानिस्तान वाले  बाबर ने। बाबरी मस्जिद के लिए कोर्ट में केस किसने लड़ी मां बलशाली कांग्रेस ने मुस्लिम और कम्युनिस्ट वालों ने। राम मंदिर की केस किसने जीता। कहां  रावण  की शक्ति कहां वानर की शक्ति कहां कांग्रेस की शक्ति  कहां मोदी जी की शक्ति। इसीलिए प्रश्न मंदिर बनाने का नहीं मंदिर संभालने का  है। जब बाबर आया तब भी हिंदू बहुसंख्यक था ।फिर भी राम मंदिर गिरा। जब गजनी आया  तब भी हिंदू बहुसंख्यक था। फिर भी सोरटी सोमनाथ मंदिर गिरा। जब अलाउद्दीन आया। तब भी हिंदू बहुसंख्यक था रानी पद्मिनी को जोहार करना पड़ा। जब मोहम्मद गौरी आया। तब भी हिंदू बहुसंख्यक था फिर भी राजा पृथ्वीराज की आंखें फोड़ दी। जब अकबर आया। तब भी हम बहुसंख्यक थे फिर भी हमने राजा राणा प्रताप को गवाया। जब औरंगजेब आया। तब भी हम बहुसंख्यक थे और हमारे राजा छत्रपति शिवाजी महाराज जी को ...

ना नर में कोई राम बचा, नारी में न कोई सीता ,

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 ना नर में कोई राम बचा,  नारी में न कोई सीता ,  ना धरा बचाने की खातिर विष कोई शंकर पीता है ,  ना श्रीकृष्ण सा धर्म अधर्म का किसी में ज्ञान बचा हैं,  ना हरिश्चंद्र सा सत्य किसी के अंदर रचा बसा हैं, ना गौतम बुद्ध सा धैर्य बचा,, ना नानक जी सा परम त्याग, बस नाच रही है नर के भीतर प्रेतिशोध की कुटिल ये आग, फिर बोलो........... स्वर्णिम युग का क्या अंश बाकी तुममें ,कि किसकी धुनी में रमकर तुम फूले नही समाते हो, ,तुम स्वयं को श्रेष्ठ बताते हो  ?..... मानवता जीवन में कोई भी पराया नहीं होता ये केवल मन का वहम है भरोसा रुका तो मनुष्य पराया साँसे रुकी तो शरीर भी पराया हो जाता है भरोसा और विश्वास एक ही है भरोसा दिलाया जा सकता टूट हुआ विश्वास भी जीता जा सकता है इसलिए मनुष्य से प्रेम करें वस्तु से नहीं वस्तु का उपयोग करें मनुष्य का नहीं  ✒️... जिन्होंने आपका संघर्ष देखा है केवल वही आपके सफलता का मूल्य जानते हैं अन्यथा औरों के लिए आपका भाग्य बहुत अच्छा है "कमाई" की कोई निश्चित परिभाषा नहीं होती "परवाह" करने वाला मित्र "दर्द" समझने वाला पड़ोसी और "सम्मान" करने वाले ...

*गांधी जी होता तो कहता*

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 *गांधी जी होता तो कहता* *आप लोग दो दिन में केवल एक बार खाओ मर नहीं जाओगे पर यह राशन पाकिस्तान के लोग को दो वरना मैं अपनी जान दे दूँगा* ❤️महाराणा प्रताप❤️* *किसी की गुलामी से कहीं अच्छा है कि, उससे लडो, मारो, जीतो, या बलिदान हो जाओ.! जीना है तो गर्व से, गुलामी में जीने से कहीं अच्छा है एक पल गर्व से जीना।* *❤️छत्रपती शिवाजी महाराज❤️* *यदि तू हिन्दू है तो, हिन्दू धर्म की रक्षा कर, देश पर धर्म का राज कर, हिंदवी राज्य ही है ईश्वर की इच्छा, उठा तलवार, राष्ट्रशांति के लिये युद्ध जरुरी है, घुस कर मार।* *❤️गुरु गोविंदसिंह❤️* *हाथ को तेल के डिब्बे में कोहनी तक डालो, फिर उसी हाथ को तिल की बोरी में डालो, जितने तिल हाथ से चिपके उतनी बार भी मु&लिम कसम खाये तो भी उनका भरोसा मत करना।*  *❤️नाथूराम गोडसे❤️* *जो तुम्हारे देश के खिलाफ बोलता है, उसे तोडने की बात करता है, तोडता है . उसे मार ही डाले..धर्म से ही देश बनता है, और देश के लिये प्राण लेना देना छोटी बात हैं ॥* *अधर्म के बढ़ते साये में जुबां खोलेगा कौन, यदि हम भी चुप रहे तो फिर हिंदुओ के लिए बोलेगा कौन?*  *जब संकट में फँसे एक हिन...