“विद्वान” का अर्थ पता चल गया !“विद्वान” का अर्थ है “पण्डित”
“विद्वान” का अर्थ पता चल गया ! “विद्वान” का अर्थ है “पण्डित”, और दोनों के अर्थ है = “वह व्यक्ति जो झूठ बोले कि जातियाँ ईश्वर ने बनायी” । अतः जो व्यक्ति “विद्वान” नहीं है,अर्थात् “विद्वान के विलोम” हैं,वही सच बोलता है । “विद्वान” तो झूठ बकता है । इस परिभाषा का आविष्कार करने वाले लोग तो “विद्वान” हो नहीं सकते क्योंकि “विद्वान” को तो वे लोग झूठ बकने वाले कहते हैं । अतः इस परिभाषा का आविष्कार करने वाले लोग “विद्वान के विलोम” हैं । “विद्वान के विलोम” लोग कहते हैं कि जातियों के कारण देश गुलाम बना । श्रीराम,श्रीकृष्ण,चाणक्य आदि के समय में जातियाँ थीं,अतः भारत गुलाम था । किसका गुलाम था?यूरिशेया से आने वाले “विद्वानों” ने भारत के मूलनिवासियों को गुलाम बना लिया । अब समय आ गया है कि सब लोग “विद्वान के विलोम” बन जायें और यूरेशियनों को भगा दें । गोरी,गजनवी,अकबर,औरंगजेब आदि ने ‘हिन्दुस्तान’ को गुलाम नहीं बनाया क्योंकि वे लोग ‘हिन्दुस्तान’ में पैदा होने के कारण हिन्दू थे । गान्धार ‘हिन्दुस्तान’ में था तो तालिबान भी हिन्दू ही है । केवल यूरेशियनों को भारतीय नहीं माना जा सकता क्योंकि वे बाहर से आये...