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*ये वह यजीदी महिलाएं हैं जिनके पति, पिता और भाइयों को मारकर जेहादियों ने सेक्स-स्लेव बनाकर बच्चे पैदा करने के लिए अपने कैदखाने में रखा था।*जब अमेरिकी सेनाओं ने मोसुल नगर में ऐसे ही एक कैदखाने को अपने कब्जे में लेकर इन्हें आजाद कराया तो कोई भी महिला बिना बच्चों के न थी ,जेहादी हर दिन इन्हें अपनी हवश का शिकार बनाते थे और नए जेहादी पैदा करने के लिए इन्हें पालते थे।

*ये वह यजीदी महिलाएं हैं जिनके पति, पिता और भाइयों को मारकर जेहादियों ने सेक्स-स्लेव बनाकर बच्चे पैदा करने के लिए अपने कैदखाने में रखा था।* जब अमेरिकी सेनाओं ने मोसुल नगर में ऐसे ही एक कैदखाने को अपने कब्जे में लेकर इन्हें आजाद कराया तो कोई भी महिला बिना बच्चों के न थी ,जेहादी हर दिन इन्हें अपनी हवश का शिकार बनाते थे और नए जेहादी पैदा करने के लिए इन्हें पालते थे। यजीदी परिवारों के पुरुषों को मारने और इन्हें बंदी बनाने के पीछे की सोच मात्र यह है कि यजीदी काफ़िर हैं। और काफिरों के साथ उनका यह व्यवहार उनके इस्लामिक मजहब के अनुसार है। उत्तरी इराक के दोहूक प्रान्त की रहने वाली 23 साल की यज़ीदी महिला फरीदा की शादी को अभी दो माह हुए थे कि एक रात जेहादियों ने उनके घर को घेर लिया और काफ़िर बताकर उनके सामने ही पांच भाइयो, पिता को मारकर फरीदा और उसकी बहन को उठा ले गए थे। बाद में जब अमेरिकी सेना ने फरीदा को मोसुल के एक सेक्स-स्लेव सेंटर से आजाद कराया तो फरीदा ने बताया कि... मेरी बहन 16 साल की है. उसकी निकाह सात मर्दों से करा दी गई है. वह अभी भी सीरिया में ही है यह कहते हुए फरीदा फूट-फूट कर रोने लगती ...

कश्मीर में क्या हुआ सुनना है 😭😭😭 🤔 तो नीचे दिए गए कुछ घटना क्रम पढ़ लो और नृशंसता की पराकाष्ठा स्वयं अनुभव कर लो👉#कश्मीर में लाखो हिन्दुओं के #नरसंहार और #कत्लेआम के दौरान क्या क्या हुआ था उनके साथ...... उसकी छोटी से झलक नीचे दे रहे हैं..... पढ़ लो, रोना आयेगा.....1) हिन्दू माथे पर जहां तिलक लगाते हैं...हज़ारों हिन्दुओं के माथे से उस जगह को चाकू से काट काटकर निकाला गया था कश्मीर में उदाहरण - सरवानंद कौल,, गिरिजा टिककु,, बी. के. गंजऊ आदि आदि.... इनके बारे में पढ़ लो.... रूह कांप जाएगी जो इनके और हज़ारों हिन्दुओं के साथ हुआ 2) #गिरिजा_टिक्कू* : गिरजा जी कश्मीर में एक स्कूल की लैब असिस्टेंट थी जिहादियों ने इनको अगवा करके इनका सामुहिक बलात्कार किया था और बाद में जिंदा रहते हुए इनको मशीन से दो टुकड़ों में काट दिया था। इस तरह हज़ारों हिंदू औरतों की दर्दनाक मौत हुई थी#बी_के_गंजू* : यह कश्मीर घाटी के एक इंजीनियर थे। जिहादियों ने इनको घर में घुसकर गोलियों से भून दिया और इनकी खून से सना हुआ चावल इनकी पत्नी को जोर जबरदस्ती से खिला दिया गया थाइन दोनों का सिर्फ एक ही गलती था और वह है इन लोगों का #हिंदू__धर्म 3) नदीमार्ग हत्याकांड में मुस्लिमों ने 83 हिन्दू बच्चों के सरों और आंखों में गोली मारी लाइन लगाकर 4) हज़ारों हिंदू औरतों,, ल़डकियों,, बेटियों के साथ खुलेआम बलात्कार किए गए और उनके स्तन काटकर उनको पेड़ों पर लटका दिया गया और कई हज़ारों हिंदू औरतों को बलात्कार के बाद जिंदा जला दिया गया और कई हिन्दू औरतों को acid के टैंकों मे डालकर मार दिया गया 5) हज़ारों हिंदू मंदिरों को तोड़कर उनपर मस्जिदें बनाई गई और हज़ारों हिंदू मंदिरों को बंद कर दिया गया और उन बंद मंदिरों की दीवारों पर लिखा गया कि - - "" यहाँ रुकें और पेशाब करके जाएं6) हज़ारों हिंदू औरतों और हिन्दू पुरूषों को उनके बच्चों के खून से सने चावल खिलाये गए - 7)👉 4 नवंबर को ⚖ जस्टिस नीलकंठ ganjuu को दिन दहाड़े हाई कोर्ट के सामने मुस्लिमों ने मार दिया क्युकी उन्होंने एक खुंखार इस्लामी आतंकवादी को सजा सुनाई थी 8)👉 7 may को प्रोफेसर k L ganjoo और उनकी पत्नी को मार दिया गया और उनकी पत्नी का सामुहिक बलात्कार किया गया और फिर acid डालकर मार दिया गया 9)👉 22 मार्च को अनंतनाग के एक दुकानदार P N कौल की चमड़ी जीवित अवस्था में शरीर से उतार दी गई और मरने के लिए छोड़ दिया गया - 10)👉 टेलीकॉम इंजीनियर pk ganju को पीछा करके जिहादी मुस्लिम उनके घर आए लेकिन pk ganju एक चावल के container में छुप गए थे... इसलिए जिहादी मुस्लिम उनको ढूंढ नहीं पाये और वापिस जाने लगे,, लेकिन pk ganju के मुस्लिम पड़ोसियों ने उन जिहादी इस्लामी मुस्लिमों को बुलाकर बताया कि pk ganju और उनकी family कहाँ छुपी है उसके बाद pk ganju को उन्हीं container मे गोलियों से भूज़ दिया गया और जाते जाते उन जिहादी मुस्लिमों ने कहा कि इस खून को चावलों में मिल जाने दो और अपने बच्चों को खाने देना कितना स्वादिष्ट भोजन होगा वो उनके लिए - 11)👉 12 फरवरी को तेज कृष्ण राजदान को उनके ही एक मुस्लिम दोस्त ने बस में सीधे राजदान के सीने में गोली उतार दी उसके बाद राजदान की लाश को बस से उतारकर गली में घसीटा गया और लोगों से बोला गया कि उनके पार्थिव शरीर को लातों से मारें और उनकी लाश को पास की ही मस्जिद के आगे डाल दिया गया जिससे कि लोग देखें कि हिन्दुओं का क्या हश्र होगा 12) 👉 24 फरवरी को अशोक कुमार काजी की घुटनों में गोली मारी गई... बालों को उखाड़ा गया,, थूका गया, और उनके ऊपर पेशाब भी किया कई मुस्लिमों ने और फिर एक घंटे के बाद उनको जिंदा जला दिया गया 13) 👉 29 फरवरी को नवीन sapru को भी इसी तरह से दर्दनाक मौत दी मुस्लिमों ने और उसके बाद मुस्लिमों ने जश्न मनाया नाचते और गाते हुये 14)👉 कश्मीरी कवि सर्वानंद कौल और उनके बेटे वीरेंद्र कौल की बहुत-बहुत भयानक तरीके से हत्या करी मुस्लिमों ने....... तिलक करने की जगह को छीलकर चमड़ी हटा दी गई थी,, पिता और पुत्र की आंखें निकाल ली गई थी और हड्डियां तोड़ दी गई थीं और इसके बाद रस्सी से एक टांग पर लटका दिया गया था 15) 👉 मंजू और 9 अन्य लोगों को kidnap करके उनका खून तब तक निकाला गया जब तक वो मर नहीं गये 16) 👉 9 जुलाई को हृदयनाथ और ram भंडारी के सरों को लाल चौक पर सबके सामने काटा गया 17)👉 26 जून को Bl रैना को घेरकर पहले उनके हांथ पैर काटे और फिर उनको तब तक घसीटा जब तक वो मर नहीं गए 18) 👉 दामोदर रैना को बीच चौराहे पर जिंदा जला दिया गया था 19) 👉 अशोक सूरी और उनके भाई की मंदिर में घुसकर गला रेतकर मारा थ20)👉 सोपोर के चुन्नीलाल challa एक inspector थे 😩.. उनको तो उनके ही एक मुस्लिम सिपाही ने आंखें निकालकर और फिर गला रेतकर नराशंस हत्या कर दी21)👉 28 अप्रैल को भूषण रैना के सर में पिन ghusede गए और फिर उनके कपड़े उतारकर उनको एक पेड़ पर कीलों से लटकाया गया और फिर उनको तड़पा-तड़पाकर मारा गया - 22)👉 23 जनवरी को vandhama गाँव में 73 हिंदू पुरुषों और 69 हिन्दू औरतों की गला काटकर हत्या की गई और उनके 76 छोटे छोटे बच्चों की आंखों में गोली मारके हत्या करी गई 23)👉 इसके बाद हज़ारों हिंदुओं के घरों में आग लगा दी गई और ऐसे ही क्रूर तरीके से हज़ारों हिन्दुओं को मारा गया -24) 👉 ये तो सिर्फ कुछ घटनायें हैं जिसमें हिन्दुओं को मारा,, काटा और भगाया गया ....... ऐसे ना जाने कितने हज़ारों नरसंहार और कत्लेआम और बलात्कार हुये थे कश्मीर में वो भी इससे भी ज्यादा भयानक तरीके से. 😭😭😭Shivdal Trust Baba Ji

कश्मीर में क्या हुआ सुनना है 😭😭😭  🤔 तो नीचे दिए गए कुछ घटना क्रम पढ़ लो और नृशंसता की पराकाष्ठा स्वयं अनुभव कर लो 👉#कश्मीर में  लाखो हिन्दुओं के #नरसंहार और #कत्लेआम के दौरान क्या क्या हुआ था उनके साथ...... उसकी छोटी से झलक नीचे दे रहे हैं..... पढ़ लो, रोना आयेगा..... 1) हिन्दू माथे पर जहां तिलक लगाते हैं...हज़ारों हिन्दुओं के माथे से उस जगह को चाकू से काट काटकर निकाला गया था कश्मीर में   उदाहरण - सरवानंद कौल,, गिरिजा टिककु,, बी. के. गंजऊ आदि आदि.... इनके बारे में पढ़ लो.... रूह कांप जाएगी जो इनके और हज़ारों हिन्दुओं के साथ हुआ  2) #गिरिजा_टिक्कू* : गिरजा जी कश्मीर में एक स्कूल की लैब असिस्टेंट थी जिहादियों ने इनको अगवा करके इनका सामुहिक बलात्कार किया था और बाद में जिंदा रहते हुए इनको मशीन से दो टुकड़ों में काट दिया था। इस तरह हज़ारों हिंदू औरतों की दर्दनाक मौत हुई थी #बी_के_गंजू* : यह कश्मीर घाटी के एक इंजीनियर थे। जिहादियों ने इनको घर में घुसकर गोलियों से भून दिया और इनकी खून से सना हुआ चावल इनकी पत्नी को जोर जबरदस्ती से खिला दिया गया था इन दोनों का सिर्फ ...

मध्य प्रदेश के उमरिया जिले के कल्दा हाई स्कूल में इन दिनों एक हैरान करने वाली घटना चर्चा का विषय बनी हुई है। जानकारी के अनुसार, स्कूल की कुछ छात्राएं अचानक कक्षा के बाहर अजीब तरह से नाचने-झूमने लगीं। यह घटनाक्रम लगातार कुछ दिनों तक देखने को मिला, जिससे स्कूल प्रशासन, अभिभावकों और ग्रामीणों में चिंता बढ़ गई।बताया जा रहा है कि छात्राओं का व्यवहार सामान्य नहीं था। वे अचानक क्लास से बाहर आकर चिल्लाने और अनियंत्रित तरीके से हरकतें करने लगीं। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसके बाद तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। कुछ लोगों ने इसे अंधविश्वास से जोड़कर अफवाहें फैलानी शुरू कर दीं, जबकि कई लोगों ने इसे स्वास्थ्य या मानसिक स्थिति से जुड़ा मामला बताया।घटना की जानकारी मिलते ही स्कूल प्रबंधन ने तुरंत स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को सूचित किया।

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मध्य प्रदेश के उमरिया जिले के कल्दा हाई स्कूल में इन दिनों एक हैरान करने वाली घटना चर्चा का विषय बनी हुई है। जानकारी के अनुसार, स्कूल की कुछ छात्राएं अचानक कक्षा के बाहर अजीब तरह से नाचने-झूमने लगीं। यह घटनाक्रम लगातार कुछ दिनों तक देखने को मिला, जिससे स्कूल प्रशासन, अभिभावकों और ग्रामीणों में चिंता बढ़ गई। बताया जा रहा है कि छात्राओं का व्यवहार सामान्य नहीं था। वे अचानक क्लास से बाहर आकर चिल्लाने और अनियंत्रित तरीके से हरकतें करने लगीं। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसके बाद तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। कुछ लोगों ने इसे अंधविश्वास से जोड़कर अफवाहें फैलानी शुरू कर दीं, जबकि कई लोगों ने इसे स्वास्थ्य या मानसिक स्थिति से जुड़ा मामला बताया। घटना की जानकारी मिलते ही स्कूल प्रबंधन ने तुरंत स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को सूचित किया। छात्राओं की मेडिकल जांच कराई गई और विशेषज्ञों से परामर्श लेने की प्रक्रिया शुरू की गई। अधिकारियों का कहना है कि मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है और वास्तविक कारण का पता लगाने के लिए जांच जारी है। प्रशासन ने लोगों से अपील ...

आज की कड़वी सच्चाई#कामुकता #लड़का हो या #लड़की सभी के अन्दर आज कूट कूट के भरी है, आज के समय 15 वर्ष की लड़किया प्रेग्नेंट हो रही हैं पर उन्हें ये नहीं पता होता है कि वो किससे प्रेग्नेंट होती है

आज की कड़वी सच्चाई #कामुकता #लड़का हो या #लड़की सभी के अन्दर आज कूट कूट के भरी है, आज के समय 15 वर्ष की लड़किया प्रेग्नेंट हो रही हैं पर उन्हें ये नहीं पता होता है कि वो किससे प्रेग्नेंट होती है पेशे से मै भारत के एक बड़े शहर में सीनियर गायनकोलॉजिस्ट हूं, एक बार मेरे पास एक लड़की आती है जिसे पेट में हल्के दर्द की समय था वो अभी क्लास 11 में पढ़ती थी, और और महज 15 16 साल की थी, मैने शुरुवाती जांच की तो मुझे शक हुआ कि हो सकता है ये प्रेग्नेंट है, लेकिन जब रिपोर्ट आई तो वो सच में।प्रेग्नेंट थी, मुझे लगा कि उसके साथ किसी ने कुछ गलत तो नहीं किया इस लिए मैने कम से कम 1 से 2 घंटा उसका समय लिया और काउंसलिंग की जिसमें इस बात की पुष्टि हुई कि किसी ने गलत नहीं किया है मैने कुछ दावा देके उसका भरोसा जीता और बोला 2 दिन बाद फिर आओ आज दूसरा दिन था वो आई मैने बोला और कैसी हो दर्द कैसा है उसने बोला मम दर्द ठीक है लेकिन पेट में भारी पान लगता है मैने बोला " बेटा किसी के साथ कोई रिलेशनशिप में हो ? " उसने बोला नहीं मम मै तो बस स्कूल जाती हूं फिर मैने बिना समय गवाए बोला " देखो तुम 2 3 वीक की प्...

मेरा लिखा पुराना पोस्ट है लेकिन हर दिन‌ इसकी रेलिवेंसी बढती जा रही है। 😜रामायण काल्पनिक है लेकिन रावण दलित और मूलनिवासी था, और राम ने शम्बूक को मारकर दलितों की भावना का अपमान किया है।महाभारत काल्पनिक है लेकिन एकलव्य के साथ बुरा हुआ था।800 साल शरिया 200 साल रोलेट एक्ट चला लेकिन मनुस्मृति ने दलितों को गुलाम बनाया।दलितों को पढने का अधिकार नहीं था लेकिन अंबेडकर के बाप दादा पढे लिखे सूबेदार थे। संत रविदास भी हमारे हैं, वाल्मीकि और भिम भी हमारे हैं। हां वो बात अलग है कि अब हमने उन दोनो को हटाकर भिम को भगवान बनाकर उसी की पूजा करनी शुरु कर दी है। 😛राजपूतों ब्राह्मणों ने हम पर अत्याचार किये लेकिन अंबेडकर को पढाने वाला कंधे पर बैठाकर झूमने वाले, अपना सरनेम देने वाले ब्राह्मण और विदेश भेजने वाले सयाजीराव गायकवाड़ राजपूत थे।हम ब्राह्मणों को नंगा भिखारी कहके चिढाते हैं... वो बात अलग है कि अपनी भाट्सेप इनभर्सिटी में हम कहते हैं कि ब्राह्मणों के पास सबसे ज्यादा धन मान और पद हैं। हमें अछूत कहा गया, वो बात अलग है कि अंबेडकर से शादी ब्राह्मण कन्या ने की।हमें धन दौलत का अधिकार नहीं था लेकिन आजादी के समय आधे से ज्यादा रियासते SC ST के पास थी।संविधान अकेले बाबा साहब ने दिमाग लगाकर बनाया जबकि असल में Copy Pasted है।बाबा साहब संविधान निर्माता हैं जबकि टोटल 300+ लोग थे। बाबा केवल ड्राफ्टमैन थे।ब्राह्मण बाबा से चिढते थे जबकि हार के बावजूद उनको सरकार में शामिल किया ब्राह्मण राजेंद्र प्रसाद और जवाहरलाल ने।बाबा के कारण आज सबको आरक्षण मिला, वो बात अलग है कि बाबा ने आरक्षण केवल दस साल को देकर कहा कि इसका सर्वाधिक दुरुपयोग होगा।हम गर्व से कहेंगे द ग्रेट C#मार लेकिन अगर किसी और ने कह दिया कि और सुनाओ द ग्रेट C#मार साहब क्या हाल हैं? तो बिना सुनवाई जेल में डलवा‌ देंगे बेल भी नहीं हो पाएगी।हम लोगो को बताते हैं कि हम हिन्दू नहीं हैं लेकिन जातिप्रमाण पत्र में धर्म के कॉलम हिन्दू ही लिखते हैं।हम हिन्दुओं का मजाक बनाते हैं कि खीर खाने से कोई कैसे पैदा हो सकता है? भले वह औषधीय खीर ही क्यों ना हो, लेकिन हमारे भगवान बुत हाथी के संभोग से पैदा हो सकते हैं।हम दलितों को मन्दिर का पुजारी क्यों नहीं बनाते? वो अलग बात है कि हमारी भगवान में कोई आस्था नहीं हम नास्तिक हो गये हैं।ब्राह्मण हमसे रोटी बेटी का रिश्ता नहीं रखते वो अलग बात है हममें भी घोर ऊंच नीच और 600+ Sect Subsect हैं जिनके हाथ का हम पानी नहीं पीते आपस में कोई रोटी बेटी का सम्बन्ध नहीं रखते।ओबीसी भी शूद्र होते हैं... अपना प्रोपगंडा चलाने के लिए ऐसा हमने सबको बताया है। वरना हम भी जानते हैं कि दलित और शूद्र अलग चीजें हैं...और ओबीसी 1991 से पहले की वो सवर्ण जातियाँ ही हैं जो आर्थिक व शैक्षणिक के रूप में पिछडे हुए थे।मंडल कमीशन व ओबीसी आरक्षण से पहले ये सब सवर्ण ही कहलाते थे।पर क्या करें पापी पेट का सवाल है... गाली नहीं देंगे तो रोजी रोटी कैसे चलेगी। ☺ब्राह्मण क्षत्रिय आर्य विदेशी हैं... वो अलग बात है कि कांग्रेसी हमें अफ्रीकन रेस का बताते आए हैं।ब्राह्मण क्षत्रिय हमारे 5000 साल से दुश्मन हैं... वो अलग बात है कि हमारा भगवान रावण खुद ब्राह्मण और बुद्ध क्षत्रिय था। 😜ब्राह्मण ने हमसे चमडा उठवाया ताकि हम उनके लिए जूते बना सकें... वो बात अलग है कि ब्राह्मण लकडी के खडाऊं पहना करते थे। 😛ब्राह्मणों ने अपने कुएं से पानी नहीं पीने दिया वो बात अलग है कि कुएं हम ही खोदते थे। 😜जनेऊ ब्राह्मणवाद और दलितों पर अत्याचार की पहचान है... वो अलग बात है कि हमारा भगवान बुद खुद जनेऊ पहनता था। 😝भगवान बुद हम दलितों का भगवान है... वो बात अलग है कि उसने कहा था कि मेरे बोधिसत्व सिर्फ ब्राह्मण और क्षत्रिय कुल में पैदा होते हैं। ... घोर जातिवादी था हमारा भगवान। 😪लेकिन कोई बात नहीं हम किताब में ही उलटफेर कर देंगे। 🤑भगवान बुद्ध मूलनिवासी थे ना कि बाहरी विदेशी आर्य... हालांकि उनका जनम नेपाल में हुआ था और उन्होंने दुनिया को वेदों से पांच आर्य सत्य बताए।लेकिन पापी पेट के लिए अफ्रीकन मूलनिवासियों का हूतिया काटना पडता है.. उनको भाट्सेप पर हिन्दुओं के खिलाफ भडकाना पडता है, नीला झंडा उठवाएंगे, एक दिन सत्ता में आएंगे।और सत्ता संभालने के लिए फिर ब्राह्मण क्षत्रियों को टिकिट देंगे और उन्ही से सत्ता चलवाएंगे।बस हम अपनी मूर्तियाँ बनवाएंगे। 😎बोलो जेज्जे जेज्जे जे भिमहमें आरक्षण इसलिए मिला ताकि हम खूब पढ सकें... वो अलग बात है कि हमारा IQ लेवल अपेक्षाकृत बढा नहीं, हम बुद्धिहीन प्रोडक्ट दे रहे हैं। शिक्षा शेरनी का दूध है लेकिन आरक्षण कुतिया का दूध। हमें शिक्षा से ज्यादा आरक्षण चाहिए। 😭- अंकुर आर्य

मेरा लिखा पुराना पोस्ट है लेकिन हर दिन‌ इसकी रेलिवेंसी बढती जा रही है। 😜 रामायण काल्पनिक है लेकिन रावण दलित और मूलनिवासी था, और राम ने शम्बूक को मारकर दलितों की भावना का अपमान किया है। महाभारत काल्पनिक है लेकिन एकलव्य के साथ बुरा हुआ था। 800 साल शरिया 200 साल रोलेट एक्ट चला लेकिन मनुस्मृति ने दलितों को गुलाम बनाया। दलितों को पढने का अधिकार नहीं था लेकिन अंबेडकर के बाप दादा पढे लिखे सूबेदार थे।  संत रविदास भी हमारे हैं, वाल्मीकि और भिम भी हमारे हैं। हां वो बात अलग है कि अब हमने उन दोनो को हटाकर भिम को भगवान बनाकर उसी की पूजा करनी शुरु कर दी है। 😛 राजपूतों ब्राह्मणों ने हम पर अत्याचार किये लेकिन अंबेडकर को पढाने वाला कंधे पर बैठाकर झूमने वाले, अपना सरनेम देने वाले ब्राह्मण और विदेश भेजने वाले सयाजीराव गायकवाड़ राजपूत थे। हम ब्राह्मणों को नंगा भिखारी कहके चिढाते हैं... वो बात अलग है कि अपनी भाट्सेप इनभर्सिटी में हम कहते हैं कि ब्राह्मणों के पास सबसे ज्यादा धन मान और पद हैं।  हमें अछूत कहा गया, वो बात अलग है कि अंबेडकर से शादी ब्राह्मण कन्या ने की। हमें धन दौलत का अधिकार नहीं था...

आज “हिल्डे बैक एजुकेशन फंड” लगभग 1,000 केन्याई बच्चों की शिक्षा में सहायता कर चुका है।कई छात्र विश्व के विश्वविद्यालयों से स्नातक हो चुके हैं।और कई अब खुद अगली पीढ़ी की मदद कर रहे हैं।एक महिला।पंद्रह डॉलर।एक बच्चा।उस बच्चे ने एक फाउंडेशन बनाया।उस फाउंडेशन ने सैकड़ों जिंदगियां बदल दीं।और वे जिंदगियां अब औरों की जिंदगी बदल रही हैं।क्रिस ने एक बार कहा था:“आप पूरी दुनिया नहीं बदल सकते। कभी-कभी एक बच्चे की मदद करना ही काफी होता है।”हिल्डे ने एक बच्चे की मदद की।और वह एक छोटा-सा करुणा का कार्य पीढ़ियों तक गूंजता रहेगा

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उसने सिर्फ 15 डॉलर देकर एक अजनबी बच्चे को बचाया। दशकों बाद उसे पता चला कि वह बच्चा उसे क्यों खोज रहा था। 1982 में, केन्या का एक लड़का — क्रिस म्बुरू — सब कुछ खोने की कगार पर खड़ा था। वह अपने ग्रामीण जिले का सबसे मेधावी छात्र था। मिट्टी के घर में, बिना बिजली के, लालटेन की रोशनी में पढ़ाई करता था। लेकिन उसका परिवार स्कूल की फीस नहीं चुका सकता था। बिना मदद के उसकी पढ़ाई खत्म हो जाती — और उसके साथ खत्म हो जाता खेतों में कॉफी तोड़ते हुए जिंदगी बिताने से बाहर निकलने का सपना। इसी बीच, दुनिया के दूसरे कोने में स्वीडन में रहने वाली 80 वर्षीया किंडरगार्टन शिक्षिका हिल्डे बैक ने एक बाल प्रायोजन कार्यक्रम का विज्ञापन देखा। उन्होंने सूची में से एक नाम चुना — “क्रिस म्बुरू, केन्या।” उन्होंने हर स्कूल टर्म में 15 डॉलर भेजने शुरू किए। न कोई पहचान, न धन्यवाद की अपेक्षा — बस एक शांत निर्णय कि वह उस बच्चे की मदद करेंगी, जिससे शायद वह कभी मिलें भी नहीं। वह छोटा-सा धनराशि सब कुछ बदल गई। क्रिस स्कूल में बना रहा। समय के साथ उसने और हिल्डे ने पत्रों का आदान-प्रदान शुरू किया। वह उसके शिक्षकों, पढ़ाई और सपनों क...

सामने जवान बेटे की लाश पड़ी थी और अंग्रेज अफसर ने कहा— 'बस एक बार कह दे कि ये तेरा बेटा है, तो इसे जलाने की इजाजत दे दूँगा।' पर उस क्रांतिकारी पिता ने जो जवाब दिया, उसे सुनकर पत्थर भी रो पड़े होंगे..."यह कहानी एक ऐसे पिता की है, जिसने अपने इकलौते बेटे के शव को छूने तक से इनकार कर दिया था, ताकि देश का सिर न झुके। यह कहानी है मास्टर अमीरचंद की, जो दिल्ली षड्यंत्र केस (1912) के प्रमुख क्रांतिकारी थे।फेसबुक पर यह कहानी शायद ही किसी ने इस तरह से पढ़ी हो।😭 वो पिता जिसने अपने शहीद बेटे का शव पहचानने से इनकार कर दिया! 😭 लेकिन 8 मई, 1915 को दिल्ली की जेल में जो हुआ, वह पत्थर दिल इंसान को भी रुला देने के लिए काफी है।मास्टर अमीरचंद दिल्ली के एक स्कूल में अध्यापक थे, लेकिन उनके अंदर क्रांति की ज्वाला जल रही थी। लाला हरदयाल और रासबिहारी बोस जैसे दिग्गज उन्हें अपना मार्गदर्शक मानते थे। जब लॉर्ड हार्डिंग पर बम फेंकने की योजना बनी, तो मास्टर अमीरचंद उसके मुख्य सूत्रधारों में से एक थे।वो मंजर जो कलेजा चीर दे:अंग्रेजों ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। उनके साथ उनके युवा बेटे को भी पकड़ा गया था। अंग्रेजों ने उनके बेटे को इतनी बेरहमी से प्रताड़ित किया कि जेल की कोठरी में ही उसकी मौत हो गई।अंग्रेज अफसर ने सोचा कि बेटे की लाश देखकर पिता टूट जाएगा और सारे राज उगल देगा। वे मास्टर अमीरचंद को उस ठंडी कोठरी में ले गए जहाँ उनके बेटे का बेजान शरीर पड़ा था।मास्टर अमीरचंद ने अपने जिगर के टुकड़े की लाश को देखा। उनकी आँखों में आंसू उमड़े, लेकिन उन्होंने उन्हें बाहर नहीं आने दिया। उन्होंने अंग्रेज अफसर की आँखों में आँखें डालकर कहा—"यह मेरा बेटा नहीं है। मैं इसे नहीं पहचानता।"वे जानते थे कि अगर उन्होंने भावना में बहकर अपनी पहचान उजागर की, तो उनके बाकी क्रांतिकारी साथी पकड़े जाएंगे। एक पिता ने अपने देश के लिए अपने बेटे को 'लावारिस' छोड़ दिया।8 मई, 1915 को जब मास्टर अमीरचंद को फांसी के फंदे की ओर ले जाया जा रहा था, तो उनके चेहरे पर एक अलौकिक शांति थी। उन्होंने फंदे को चूमा और कहा—"मैने अपना सब कुछ भारत मां को दे दिया, अब बस यह जान बाकी है, यह भी ले लो।"​जिस बाप ने अपने बेटे

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सामने जवान बेटे की लाश पड़ी थी और अंग्रेज अफसर ने कहा— 'बस एक बार कह दे कि ये तेरा बेटा है, तो इसे जलाने की इजाजत दे दूँगा।' पर उस क्रांतिकारी पिता ने जो जवाब दिया, उसे सुनकर पत्थर भी रो पड़े होंगे..."यह कहानी एक ऐसे पिता की है, जिसने अपने इकलौते बेटे के शव को छूने तक से इनकार कर दिया था, ताकि देश का सिर न झुके। यह कहानी है मास्टर अमीरचंद की, जो दिल्ली षड्यंत्र केस (1912) के प्रमुख क्रांतिकारी थे। फेसबुक पर यह कहानी शायद ही किसी ने इस तरह से पढ़ी हो। 😭 वो पिता जिसने अपने शहीद बेटे का शव पहचानने से इनकार कर दिया! 😭 लेकिन 8 मई, 1915 को दिल्ली की जेल में जो हुआ, वह पत्थर दिल इंसान को भी रुला देने के लिए काफी है। मास्टर अमीरचंद दिल्ली के एक स्कूल में अध्यापक थे, लेकिन उनके अंदर क्रांति की ज्वाला जल रही थी। लाला हरदयाल और रासबिहारी बोस जैसे दिग्गज उन्हें अपना मार्गदर्शक मानते थे। जब लॉर्ड हार्डिंग पर बम फेंकने की योजना बनी, तो मास्टर अमीरचंद उसके मुख्य सूत्रधारों में से एक थे। वो मंजर जो कलेजा चीर दे: अंग्रेजों ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। उनके साथ उनके युवा बेटे को ...

#अम्बेडकर पर आरटीआई सरकार से मांगी गई और लोकसभा सचिवालय का जवाब संलग्न है / जिसमें स्पष्ट कहा गया कि प्रारूप समिति का अध्यक्ष बनाने से कोई संविधान निर्माता नहीं हो जाता.. 💪अंग्रेज़ों के भारत छोड़ने से सबसे ज्यादा दुखी यही अम्बेडकर थे, जो अंग्रेज़ों से विनती कर रहे थे की मेरा क्या होगा, हमको वेतन कोन देगा ? इन्होंने अंग्रेजो से विनती की थी कि आप लोग देश छोड़कर जा रहे है तो कम से कम मुझे #highcourt जज ही बना दीजिये ताकि मेरा बचा हुआ जीवन बेहतर तरिके से गुज़रे! पूरा जीवन अंग्रेजी शिक्षा, अंग्रेजी विचारधारा मे बिताने वाले अम्बेडकर अंग्रेज़ों के बहुत बड़े मोहरे थे ।अम्बेडकर नहीं है संविधान निर्माता/ ब्राह्मण डॉ #बीएन_राव ने बनाया था संविधान यह जानकारी सूचना के अधिकार से प्राप्त हुयी। जानकारी जो मै साझा कर रही, यह गृह मंत्रालय मे #RTI लगाई गई थी, जो क़ानून मंत्रालय होते हुए पार्लियामेंट हाउस पहुंची और वहाँ से हमें जानकारी प्राप्त हुई। जिसके अनुसार दूसरे पत्र का #point नंबर 2 देखे जिसमे साफ लिखा है की "first draft constitution of India and Schedules (as prepared by the cons advisor shri B N Rau) यानि संविधान का पहला ड्राफ्ट व अनुसूची डॉ बी एन राव ने तैयार की थी..न कि किसी अम्बेडकर ने । फिर तीसरे पत्र का point नंबर 4 देखे जिसमे साफ लिखा है कि संसद मे ऐसा कोई दस्तावेज नहीं है जो अम्बेडकर को संविधान निर्माता घोषित करता हो । और क्या प्रमाण चाहिये ? ये फर्जी लोग पिछले कई दशकों से अंग्रेज एजेंट को महामानव बना

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#अम्बेडकर पर आरटीआई सरकार से मांगी गई और लोकसभा सचिवालय का जवाब संलग्न है / जिसमें स्पष्ट कहा गया कि प्रारूप समिति का अध्यक्ष बनाने से कोई संविधान निर्माता नहीं हो जाता.. 💪 अंग्रेज़ों के भारत छोड़ने से सबसे ज्यादा दुखी यही अम्बेडकर थे, जो अंग्रेज़ों से विनती कर रहे थे की मेरा क्या होगा, हमको वेतन कोन देगा ? इन्होंने अंग्रेजो से विनती की थी कि आप लोग देश छोड़कर जा रहे है तो कम से कम मुझे #highcourt जज ही बना दीजिये ताकि मेरा बचा हुआ जीवन बेहतर तरिके से गुज़रे! पूरा जीवन अंग्रेजी शिक्षा, अंग्रेजी विचारधारा मे बिताने वाले अम्बेडकर अंग्रेज़ों के बहुत बड़े मोहरे थे । अम्बेडकर नहीं है संविधान निर्माता/ ब्राह्मण डॉ #बीएन_राव ने बनाया था संविधान यह जानकारी सूचना के अधिकार से प्राप्त हुयी। जानकारी जो मै साझा कर रही, यह गृह मंत्रालय मे #RTI लगाई गई थी, जो क़ानून मंत्रालय होते हुए पार्लियामेंट हाउस पहुंची और वहाँ से हमें जानकारी प्राप्त हुई। जिसके अनुसार दूसरे पत्र का #point नंबर 2 देखे जिसमे साफ लिखा है की "first draft constitution of India and Schedules (as prepared by the cons advisor shri B N R...

ज्यादा पुरानी नही मात्र 1960 की फोटो है , श्रीनगर के बाजार में अपनी दुकानो के बाहर बेफिक्री के साथ आराम से बैठकर धूप सेकते हुये कश्मीरी हिन्दू।1960 में इन्हें मालूम नहीं था कि मात्र 20 वर्ष बाद इनते व इनकी अगली पीढ़ी के साथ यहां क्या-क्या होने वाला हैं। पूरी घाटी हिन्दू विहीन हो जायेगी।इन्हें गौर से देखिये ये श्रीनगर के बाजार में धूप सेंकते कश्मीरी पंडित हैं' कश्मीरी पंडितों का दर्द इन दिनों फिर सुर्खियों में है। वे कश्मीरी पंडित, जो कभी कश्मीर के धनाढय रहवासी थे और जिनके पास सैकड़ों बीघा सेवफल के बगीचे, केसर का फलता - फूलता कारोबार और स्वर्ग कहलाने वाली कश्मीर घाटी थी। 1960 में लिए गए इस चित्र में देखाजा सकता है कि शीत के दिनों में ये किस आनंद और बेफिक्री से बाजार में बैठकर धूप सेंकते थे। इन्हें अपनी वेशभूषा साफा, कुर्ता, धोती, बंडी पहनने का सुख हासिल था। किंतु ये अपनी अस्मिता के प्रति संघर्ष करने में चूके और हमलावरों ने इन्हें इनकी मातृभूमि कश्मीर से खदेड़ दिया। अब इनके परिजन दर - दर की ठोकरे खा

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ज्यादा पुरानी नही मात्र 1960 की फोटो है , श्रीनगर के बाजार में अपनी दुकानो के बाहर बेफिक्री के साथ आराम से बैठकर धूप सेकते हुये कश्मीरी हिन्दू। 1960 में इन्हें मालूम नहीं था कि मात्र 20 वर्ष बाद इनते व इनकी अगली पीढ़ी के साथ यहां क्या-क्या होने वाला हैं। पूरी घाटी हिन्दू विहीन हो जायेगी। इन्हें गौर से देखिये ये श्रीनगर के बाजार में धूप सेंकते कश्मीरी पंडित हैं' कश्मीरी पंडितों का दर्द इन दिनों फिर सुर्खियों में है। वे कश्मीरी पंडित, जो कभी कश्मीर के धनाढय रहवासी थे और जिनके पास सैकड़ों बीघा सेवफल के बगीचे, केसर का फलता - फूलता कारोबार और स्वर्ग कहलाने वाली कश्मीर घाटी थी। 1960 में लिए गए इस चित्र में देखाजा सकता है कि शीत के दिनों में ये किस आनंद और बेफिक्री से बाजार में बैठकर धूप सेंकते थे। इन्हें अपनी वेशभूषा साफा, कुर्ता, धोती, बंडी पहनने का सुख हासिल था। किंतु ये अपनी अस्मिता के प्रति संघर्ष करने में चूके और हमलावरों ने इन्हें इनकी मातृभूमि कश्मीर से खदेड़ दिया। अब इनके परिजन दर - दर की ठोकरे खा रहे हैं, यहां - वहां तंबू बनाकर शरणार्थियों की तरह रह रहे हैं। शांति और आनंद से भरे ...

ऋषिकेश में गङ्गा किनारे चार दिन की सड़ी हुई एक ला#श मिली थी। भीड़ इकट्ठी हो गयी, पुलिस बुला ली गयी। सबने ला#श से बार बार पूछा- "ला#श! कौन हो तुम?"ला#श का मुँह सड़ गया था। वह कुछ बोल नहीं पा रही थी। भारत में पुलिस के आगे जिन्दे लोग नहीं बोल पाते, वह तो फिर भी ला#श थी। हाँ, उसके कपड़ों ने बताया- वह एक बूढ़ी बंगालन स्त्री थी।किसी ने कहा कि मुक्ति मिल गयी। किसी ने परिजनों के लिए धिक्कार की गालियां गढ़ीं। पुलिस ने चौकीदारों से ला#श को तिरपाल में लपेटवाया और ले गयी। चौकीदारों ने मन ही मन गालियां दी- "ऐसी नौकरी तो सा#ली दुश्मन को भी न मिले..."पुलिस मुख्यालय में अधिकारी महीनों तक ला#श से उसका परिचय पूछते रहे। बीच बीच में कुछ पत्रकारों ने भी पूछा, शहर की समाजसेवी संस्थाओं के लोगों ने पूछा, उस इलाके के नेताओं ने पूछा, पर कोई उत्तर नहीं मिला।इन सबने मिल कर महीनों तक कड़ियां जोड़ीं। जाँच हुई, गायब हुए लोगों का पता किया गया,अंदाजे लगाए गए। अब ला#श बोलने लायक हुई। ला#श जानती थी कि यह जादुई यथार्थवाद का युग है, सो उसने बोलने के अनुरोध को स्वीकार कर लिया। इंस्पेक्टर ने अबकी पूछा तो ला#श सुगबुगाई। पुलिस को बल मिला, इंस्पेक्टर ने पूछा- "बुढ़िया बता! किसकी ला#श है तू? ला#श बोली- "बीना दास (वीणा) को जानते हो दारोगा साहब?""कौन बीना दास? मैं नहीं जानता किसी बीना वीणा को...""पद्मश्री बीना दास! सुभाष चन्द्र बोस के गुरु बेनीमाधव दास और समाजसेवी कमला देवी की पुत्री बीना दास। वही बीना, जिसे अंग्रेज गवर्नर को गोली मारने के कारण कालापानी की सजा हुई थी। जिसने सेलुलर जेल में दस वर्ष काटे थे।"हैं,,,?? यह कौन सी कथा है रे बुढ़िया? मैंने तो कभी नाम तक नहीं सुना..." इंस्पेक्टर झुंझला गया था।ला#श ठहाके लगा कर हँसने लगी। कुछ देर बाद बोली- "कोई बात नहीं साहब! आजाद भारत क्यों याद रखे स्वतन्त्रता संग्राम को? सुख के दिनों में दुख की कथाएँ कौन गाये...""अच्छा तो तू ही बता दे उनके बारे में..." सब एक साथ चीखे।ला#श हँसी। बोली, " सुनो! बीना के पिता बंगाल के क्रांतिकारियों में प्रतिष्ठित और पूज्य थे। उसकी माँ लड़कियों के लिए विद्यालय चलाती थी। बचपन से ही उसने सुभाष बाबू को अपने घर आते देखा था और उनसे बहुत प्रभावित रहती थी।"सबकी निगाह ला#श पर जम गई थी। वह बोलती गयी, "कलकत्ता विश्वविद्यालय से उसने बीए की परीक्षा पास की थी। दीक्षांत समारोह के दिन ही उसने अपने जीवन को सार्थक करने का मन बनाया था। इस काम में उसके पिता और मां दोनों उसके साथ थे। माँ ने जाने कहाँ से ला कर उसे भरी हुई पिस्तौल दी थी।विश्वविद्यालय में डिग्री बांटने के लिए गवर्नर स्टैनली जैक्शन आया था। वह जैसे ही मंच पर खड़ा हुआ, वीणा उठ कर आगे बढ़ी, और फायर झोंक दिया। गोली गवर्नर की कनपट्टी को छूती हुई निकक गयी। वह दूसरा फायर करती तबतक इंस्पेक्टर सोहरावर्दी ने एक हाथ से उसका गला पकड़ लिया, और दूसरे हाथ से उसके पिस्तौल वाले हाथों को ऊपर उठा दिया। वह फिर भी फायर करती रही। उसके पांचों फायर बेकार गए..."सबके चेहरे पर आश्चर्य पसरा हुआ था। वे सन्न पड़े चुपचाप सुन रहे थे। लाश ने कहा, " उसके बाद केस चला, दस साल की सजा हुई। सन 1939 तक सजा काटी। छूटने के बाद फिर आंदोलनों में सक्रिय हो गयी। भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान भी जेल गयी..." "फिर?""फिर 1947 में देश आजाद हुआ तो बीना ने विवाह कर लिया। आयु 36 की हो गयी थी, पर सोचा कि अब सुखी जीवन जीने के दिन हैं... पर शायद ईश्वर को मंजूर नहीं था। पति का देहांत हुआ और फिर आगे पीछे कोई न दिखा! बीना ऋषिकेश आ गयी। एक स्कूल में पढ़ाती, उसी से खर्च चल जाता।""फिर?""फिर क्या? एक दिन आया जब उम्र देह पर भारी पड़ने लगी। पढ़ाने की शक्ति नहीं रही। कुछ दिन इधर उधर से मांग कर पेट भर लिया... और एक दिन सड़क पर चलते चलते ठोकर लगी,ऐसी गिरी कि उठ न सकी... वहीं से निकल ली।""ओह... हे भगवान! तुम.. आप वही हैं?"" हाँ जी! पर दुखी मत

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ऋषिकेश में गङ्गा किनारे चार दिन की सड़ी हुई एक ला#श मिली थी। भीड़ इकट्ठी हो गयी, पुलिस बुला ली गयी। सबने ला#श से बार बार पूछा- "ला#श! कौन हो तुम?" ला#श का मुँह सड़ गया था। वह कुछ बोल नहीं पा रही थी। भारत में पुलिस के आगे जिन्दे लोग नहीं बोल पाते, वह तो फिर भी ला#श थी। हाँ, उसके कपड़ों ने बताया- वह एक बूढ़ी बंगालन स्त्री थी। किसी ने कहा कि मुक्ति मिल गयी। किसी ने परिजनों के लिए धिक्कार की गालियां गढ़ीं। पुलिस ने चौकीदारों से ला#श को तिरपाल में लपेटवाया और ले गयी। चौकीदारों ने मन ही मन गालियां दी- "ऐसी नौकरी तो सा#ली दुश्मन को भी न मिले..." पुलिस मुख्यालय में अधिकारी महीनों तक ला#श से उसका परिचय पूछते रहे। बीच बीच में कुछ पत्रकारों ने भी पूछा, शहर की समाजसेवी संस्थाओं के लोगों ने पूछा, उस इलाके के नेताओं ने पूछा, पर कोई उत्तर नहीं मिला। इन सबने मिल कर महीनों तक कड़ियां जोड़ीं। जाँच हुई, गायब हुए लोगों का पता किया गया,अंदाजे लगाए गए। अब ला#श बोलने लायक हुई। ला#श जानती थी कि यह जादुई यथार्थवाद का युग है, सो उसने बोलने के अनुरोध को स्वीकार कर लिया। इंस्पेक्टर ने अबकी पूछा तो ला#...

🚩 महाराना प्रताप के जीवन के अंतीम पल !!🚩 ऊनके मुख से निकले हुये अंतीम शब्द क्या थे ? 🚩 अश्रूभीनी आंखो से मात्रृभुमी और अपनी प्रजा से अंतीम विदाय 🚩🌞🚩🌞🚩🌞🚩🌞🚩🌞🚩🚩🚩 विर महाराना प्रताप 25 वर्षो से निरंतर युद्ध करते करते उनका शरीर जर्जर हो चूका था उन्हें आराम की सख्त जरुरत थी. परन्तु राणा प्रताप ने अपने सुख चैन और आराम को कभी भी महत्त्व नहीं दिया. 🚩🚩 उनकी एकमात्र चिंता बस यही थी की देश के राजपूताने में एक ऐसा जूनून पैदा हो की वे एक होना सीखे और बहरी ताकतों के हाथों में न खेलकर अपनी ताकतों को पहचाने और अपने देश में अपने संयुक्त साम्राज्य की स्थापना के लिए कुछ करें.🚩🚩 महाराणा प्रताप के अंतिम पल थे तब उनके मन में एक ही चिंता घर कर गयी थी की उनके बाद मातृभूमि के लिए लड़ने वाले राजपूतों की परम्परा समाप्त हो जाएगी. मेवाड़ का भविष्य भी उनको उज्जवल नहीं दिख रहा था. उन्हें भय था की उनके बाद अमर सिंह मुगलों का दयित्व स्वीकार कर लेगा. 🚩🚩 जिस प्रतिष्ठा के लिए वे आजीवन हर तरह के कष्ट सहते हुए शत्रुओं से जूझते रहे, उनकी मृत्यु के बाद वह धुल में मिल जाएगी. राणा प्रताप से मिलने प्रतिदिन अनेक लोग आते थे. राणा बीमार है और मृत्यु की शय्या पर है ऐसी खबर दूर दूर तक फ़ैल गयी थी. 🚩🚩 अनेक राजपूत राजा उनका हाल चाल जानने और उनके दर्शन के लिए आने लगे थे. राजपूत ही नहीं अनेक बहादुर मुसलमान और मुस्लिम सरदार भी राणा के दर्शन करने में अपना अहोभाग्य समझते थे.🚩🚩 अब तो अंतिम दिन निकट आ पहुंचा था. महाराणा की दशा बिगड़ गयी थी. उन्होंने अपने विश्वस्त साथियों गोविन्दसिंह,पृथ्वीराज, शक्तिसिंह अमरसिंह आदि को बुलाया और कहने लगे-“अब मुझे केवल एक बात बताओ मेरे बाद इस मातृभूमि की लड़ाई कौन लडेगा आप सब थक चुके है और अमरसिंह अभी छोटे है. 🚩🚩 “आप शांत रहिये भैया” शक्तिसिंह ने आगे बढ़कर कहा-“जब तक हम चितौड़ का किला जीत नहीं लेते है, मुगलों से कोई समझौता नहीं करेंगे. हम मुगलों के आगे कभी नहीं झुकेंगे, आपके द्वारा स्थापित वीरता की परंपरा को धक्का नहीं लगने देंगे, चाहे हमारे प्राण ही क्यों ना चले जाए.” 🚩🚩 बाबा रावत को साक्षी मानकर सभी राजपूतों ने प्रतिज्ञा की. राणा आश्वस्त हो गए और बोले-“मुझे आप लोगो पर पूरा भरोसा है अब मैं चैन से मर सकूँगा”.कहते हुए महाराणा ने शून्य में देखा और फिर गर्दन झुकाकर कहने लगे –“मेरा अंत समय निकट आ गया है. 🚩🚩 प्राण के निकलते समय मैं चित्तौडगढ के दर्शन करना चाहूँगा आप सब मुझे ऐसी जगह लिटा दीजिये जहाँ से मैं चितौड़गढ़ का किला स्पष्ट रूप से देख सकूँ. चितौड़गढ़ का किला जब राणा जी को दिखने लगा तो वो उठ बैठे और बोले –“हे मुग़ल पददलित चितौडगढ़ मैं तुझे अपने जीवन में प्राप्त ना कर

🚩 महाराना प्रताप के जीवन के अंतीम पल !! 🚩 ऊनके मुख से निकले हुये अंतीम शब्द क्या थे ? 🚩 अश्रूभीनी आंखो से मात्रृभुमी और अपनी प्रजा से अंतीम विदाय 🚩🌞🚩🌞🚩🌞🚩🌞🚩🌞🚩 🚩🚩 विर महाराना प्रताप 25 वर्षो से निरंतर युद्ध करते करते उनका शरीर जर्जर हो चूका था उन्हें आराम की सख्त जरुरत थी. परन्तु राणा प्रताप ने अपने सुख चैन और आराम को कभी भी महत्त्व नहीं दिया.  🚩🚩 उनकी एकमात्र चिंता बस यही थी की देश के राजपूताने में एक ऐसा जूनून पैदा हो की वे एक होना सीखे और बहरी ताकतों के हाथों में न खेलकर अपनी ताकतों को पहचाने और अपने देश में अपने संयुक्त साम्राज्य की स्थापना के लिए कुछ करें. 🚩🚩 महाराणा प्रताप के अंतिम पल थे तब उनके मन में एक ही चिंता घर कर गयी थी की उनके बाद मातृभूमि के लिए लड़ने वाले राजपूतों की परम्परा समाप्त हो जाएगी. मेवाड़ का भविष्य भी उनको उज्जवल नहीं दिख रहा था. उन्हें भय था की उनके बाद अमर सिंह मुगलों का दयित्व स्वीकार कर लेगा.  🚩🚩 जिस प्रतिष्ठा के लिए वे आजीवन हर तरह के कष्ट सहते हुए शत्रुओं से जूझते रहे, उनकी मृत्यु के बाद वह धुल में मिल जाएगी. राणा प्रताप से...

एक तो मुझे ये गाँधी परिवार की क़ुरबानी वाली अवधारणा समझ नहीं आती।कोई भी चुनाव हो... इनके चशमो चिराग तो यही गाते हैं कि हमारी दादी ने देश के लिए क़ुरबानी दी, हमारे पापा ने देश के लिए

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एक तो मुझे ये गाँधी परिवार की क़ुरबानी वाली अवधारणा समझ नहीं आती। कोई भी चुनाव हो... इनके चशमो चिराग तो यही गाते हैं कि हमारी दादी ने देश के लिए क़ुरबानी दी, हमारे पापा ने देश के लिए क़ुरबानी दी। अरे भैया कौन सी क़ुरबानी... कौन सा बलिदान?? पंजाब में सब सही चल रहा था... अकाली दल को रोकने के लिए इंदिरा गाँधी एक विकल्प ढूंढ रही थी... फिर उन्हें भिंडरावाले मिला... उसको दिल्ली बुला कर बकायादा संजय गाँधी ने साक्षात्कार ले कर अपने काम के लिए तैयार किया। फिर इनका प्यादा भिंडरावाले महत्वकांक्षी हो गया... ऊपर से पाकिस्तान ने भी उसके सर पर हाथ रख दिया... उसे ख़ालिस्तान का सपना दिखाया और फिर वह कांग्रेस के हाथों से निकल गया। फिर उसे मरवाने के लिए स्वर्ण मंदिर पर चढ़ाई कर दी... सैंकड़ो सिख मारे गए... बाद में इस घटना का बदला लेने के लिए 2 सिख अंगरक्षकों ने इंदिरा गाँधी को मार दिया। यह कोई क़ुरबानी या बलिदान नहीं था... खुद के कुकर्मो का फल था... जिन कुकर्मो के कारण 70-80 के दशक में हजारों हिन्दू मारे गए पंजाब में... और फिर 84 के दंगों के बाद हजारों सिख मारे गए... पंजाब आतंकवाद की आग में 2 दशक झुल...

ये जो आराम से बैठा है ना!वो है, "सेक्युलर राजनीतिक हिंदू ".!!उसको लगता है कि वो मस्त हरियाली गलीचे पर "सुरक्षित" विराजमान है.!परंतु सारे संसार को उसका "भविष्य" पता है.!तृप्तिकरण का अफ़ीम विनाशकारी है.!मरी हुई मछली धार के साथ बहती है परंतु जीवित मछली धारा के विपरित तैरती है.!यदि आप🫵भी जीवित हैं तो गलत का विरोध करना सीखें, फिर चाहे वो आपके आदर्श प्रतिमान ही क्यों न हो.!यदि आप विरोध नहीं करते हैं तो आप उसे, दूसरी और तीसरी... गलती के लिए प्रेरित कर रहे हैं, अवसर दे रहे हैं.! आगे आपकी मर्ज़ी.....जय श्री राम 🚩

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ये जो आराम से बैठा है ना! वो है, "सेक्युलर राजनीतिक हिंदू ".!! उसको लगता है कि वो मस्त हरियाली गलीचे पर "सुरक्षित" विराजमान है.! परंतु सारे संसार को उसका "भविष्य" पता है.! तृप्तिकरण का अफ़ीम विनाशकारी है.! मरी हुई मछली धार के साथ बहती है परंतु जीवित मछली धारा के विपरित तैरती है.! यदि आप🫵भी जीवित हैं तो गलत का विरोध करना सीखें, फिर चाहे वो आपके आदर्श प्रतिमान ही क्यों न हो.! यदि आप विरोध नहीं करते हैं तो आप उसे, दूसरी और तीसरी... गलती के लिए प्रेरित कर रहे हैं, अवसर दे रहे हैं.!  आगे आपकी मर्ज़ी..... जय श्री राम 🚩

कांग्रेस एक धोखा... हम हिन्दू भूलने में माहिर हैं।16 जून 2013 को उत्तराखंड केदारनाथ में जलप्रलय शुरू हुआ जो भीषण तबाही मचा गया था। केदारनाथ में लगभग पच्चीस हजार श्रद्धालु मर गये थे।तीन दिन चली इस भीषण तबाही में कांग्रेस की सरकार ने केदारनाथ में फंसे श्रद्धालु भक्तों की कोई मदद नही की।चौथे दिन जब इस भयंकर तबाही की खबर अंतरराष्ट्रीय मीडिया की सुर्खियां बन गई तब निर्लज्ज कांग्रेस ने सहायता भेजने का एलान किया! ध्यान रहे सिर्फ एलान किया था।18 जून को Antonio Maino सोनिया गांधी अमेरिका अपना गुप्त इलाज कराने गई हुई थी और राहुल गांधी मसाज बैंकॉक में थे। उन्हें सूचना भेजी गई तब दोनों मां बेटे 21 जून को भारत पहुंचे!कांग्रेस ने बहुत तामझाम करके आपदा में फंसे लोगों की सहायता के लिये बिस्किट के पैकेट और पानी की बोतलों के आठ ट्रक रवाना किये।जिन पर सोनिया गांधी और राहुल गांधी के बड़े बड़े पोस्टर लगाकर मां बेटे ने उन्हें झंडी दिखाकर रवाना किया फोटो भी खिंचवाए गये जो अखबारों की सुर्खियां बने थे।उन ट्रकों को न किराया दिया गया न डीजल दिया गया था।आठ दिन भटककर उन ड्राइवरों ने वो बिस्किट बेचकर अपना किराया वसूल किया और निकल लिये।आज तक कोई पूछने भी नही गया उस राहत सामग्री का क्या हुआ! फिर जब वहां लाशें सड़ने लगी तो महामारी का खतरा बढ़ता देख आसपास के गांवों के लोगों ने आन्दोलन किया।वह भी पन्द्रह दिन बाद किया जब लाशों से बदबू आने लगी थी।कई ग्रामीणों ने सामूहिक दाहसंस्कार भी किये लेकिन शव ही शव फैले देखकर लोग डर गये थे।अब देखे हिन्दुओ की लाशों पर कैसे व्यापार हुआ।तब कांग्रेस ने उन लाशों को निकालने के लिये एक विज्ञप्ति निकाली।एक कम्पनी आगे आई जिसने एक लाश निकालने के 4,60,000 रुपये में टेंडर लिया था। और लगभग 16,000 लाशें तीन दिन में निकाली थी।सरकार ने उस कम्पनी को 'सात अरब छतीस करोड़' का भुगतान तुरन्त कर दिया था।हालांकि लाशें मिलने का सिलसिला महीनों चलता रहा, फिर कई दिन कंकाल मिलते रहे। हाँ लाशें निकालने वाली कम्पनी रॉबर्ट वाड्रा की थी जो उसने किराये के हेलीकॉप्टर लेकर रातोंरात बनाई थी।कांग्रेस की सरकारी सहायता के नाम पर किया

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कांग्रेस एक धोखा... हम हिन्दू भूलने में माहिर हैं। 16 जून 2013 को उत्तराखंड केदारनाथ में जलप्रलय शुरू हुआ जो भीषण तबाही मचा गया था। केदारनाथ में लगभग पच्चीस हजार श्रद्धालु मर गये थे। तीन दिन चली इस भीषण तबाही में कांग्रेस की सरकार ने केदारनाथ में फंसे श्रद्धालु भक्तों की कोई मदद नही की। चौथे दिन जब इस भयंकर तबाही की खबर अंतरराष्ट्रीय मीडिया की सुर्खियां बन गई तब निर्लज्ज कांग्रेस ने सहायता भेजने का एलान किया! ध्यान रहे सिर्फ एलान किया था। 18 जून को Antonio Maino सोनिया गांधी अमेरिका अपना गुप्त इलाज कराने गई हुई थी और राहुल गांधी मसाज बैंकॉक में थे। उन्हें सूचना भेजी गई तब दोनों मां बेटे 21 जून को भारत पहुंचे! कांग्रेस ने बहुत तामझाम करके आपदा में फंसे लोगों की सहायता के लिये बिस्किट के पैकेट और पानी की बोतलों के आठ ट्रक रवाना किये। जिन पर सोनिया गांधी और राहुल गांधी के बड़े बड़े पोस्टर लगाकर मां बेटे ने उन्हें झंडी दिखाकर रवाना किया फोटो भी खिंचवाए गये जो अखबारों की सुर्खियां बने थे। उन ट्रकों को न किराया दिया गया न डीजल दिया गया था। आठ दिन भटककर उन ड्राइवरों ने वो बिस्किट बे...

ये गोपाल पाठा जी है जिनके नाम से ही मुस्लिम लीग के नेताओं की लूंगी में पेशा ब हो जाती थी जिनको लोग हिन्दू रक्षक के नाम से भी जानते है...!!कलकत्ता के एक व्यव सायी जिन्होंने १९४६ के कुख्यात सीधी कार्यवाही दिवस के समय हिन्दुओं को दं गाई मुसलमानों से बचाने के लिये 'भारतीय जातीय बाहिनी' नामक एक सशस्त्र वाहिनी का निर्माण किया था और हिन्दुओं की रक्षा की थी उनकी कोलकाता में मां स विक्रय की दुकान थी, जिसकी वजह उन्हें पाँठा कहा जाता था....!!16 अगस्त 1946 को कलकत्ता में मुस्लिम लीग के ‘डायरेक्ट एक्शन‘ के घोषणा के बाद कोलकाता की गलियों में मुसल मान गुंडों ने निर्दोष हिन्दुओं की एकतरफा और अकारण ह त्या करना शुरु कर दिया यह अत्यन्त भयानक नरसंहार था जिसमें कोलकाता की गलियां शमशान सी दिखने लगी थीं बंगाल के तत्कालीन मुख्यमंत्री हुसैन शाहिद सुहरावर्दी ने भीड़ से बोला था कि वे शहर में हिंदुओ का नरसंहार करो तुम्हारे खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी...!!हिन्दुओं पर हो रहे अत्याचार को देखकर गोपाल चंद्र मुखोपाध्याय को अत्यन्त पीड़ा हुई वह 'शठे शाठयम समाचरेत' अर्थात जैसे को तैसा की नीति के पक्षधर थे उनने अपने साथी एकत्र किये, हथि यार और ब म इकट्ठे किये, और दंगाइयों को सबक सिखाने निकल पड़े उन्होंने भारतीय जातीय बाहिनी के नाम से संगठन बनाया गोपाल पाठा के कारण मुस्लिम दं गाइयों में दहशत फैल गई और जब हिन्दुओ का पलड़ा भारी होने लगा तो सुहरावर्दी ने सेना बुला ली तब जाकर दंगे रुके गोपाल पाठा ने कोलकाता को मुस्लिमों से बचा लिया...!!गाँधी जी ने कोलकाता आकर अनशन प्रारम्भ कर दिया उन्होंने खुद गोपाल पाठा को दो बार बुलाया लेकिन गोपाल ने स्पष्ट मना कर दिया तीसरी बार जब एक कांग्रेस के स्थानीय नेता ने प्रार्थना की कम से कम कुछ हथियार तो गाँधी जी सामने डाल दो तब गोपाल ने कहा जब हिन्दुओ की हत्या हो रही थी तब तुम्हारे गाँधी जी कहाँ थे मैंने इन हथियारों से अपने इलाके की हिन्दू महिलाओ की रक्षा की है, मै हथियार नहीं डालूँगा...!!गोपाल मुखर्जी ने कहा कि हम नहीं चाहते थे कोलकाता में दं गा फैले, लेकिन उनके लाख प्रयासों के बावजूद हिंसा शुरू हो गयी हिंसा के पहले और दूसरे दिन मैंने सबको रोकने की कोशिश की मैंने अपने मुसलमान दोस्तों से भी यह कहा कि हम भाई-भाई की तरह रहते हैं और वैसे ही रहेंगे, हिंसा ठीक नहीं है, लेकिन जब मेरी बात नहीं मानी गई और 'लड़ के लेंगे पाकिस्तान' का स्लोगन गूंजने लगा तो मैंने अपने लड़कों को भी तैयार रहने को कहा और उन्हें यह स्पष्ट कर दिया कि अगर वे हमारे एक लोगों को मारेंगे तो हम उनके 10 लोगों को मारेंगे...!!जब हिं सा के बाद लोग अपने ह थियारों को गांधी जी के पास जमा करा रहे थे तो उन्होंने ऐसा नहीं किया इसका कारण यह था कि वह उन हथियारों को अपने पास रखना चाहते थे जिससे वह अपनी बहू-बेटियों की रक्षा की थी वे यह भी बताते हैं कि मैंने अपने लड़कों से यह कहा था कि वे दं गा इयों के अलावा किसी को निशाना ना बनाएं और ना ही महिलाओं के साथ कोई गलत हरकत करें....!!यह हकीकत है तथाकथित महात्मा की जो हिन्दू को जब मारा जा रहा था तब चुप था और जैसे ही हिन्दू ने पलटवार किया तो दौड़े दौड़े अनशन पर बैठ गया था,यही चीज भारत पाकिस्तान के अलग होने पर किया था,इसे किस मुंह से महात्मा कहूं,किस मुंह से बाप कहूं 😡पोस्ट साभार फोटो सोर्स इंटरनेट

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ये गोपाल पाठा जी है जिनके नाम से ही मुस्लिम लीग के नेताओं की लूंगी में पेशा ब हो जाती थी जिनको लोग हिन्दू रक्षक के नाम से भी जानते है...!! कलकत्ता के एक व्यव सायी जिन्होंने १९४६ के कुख्यात सीधी कार्यवाही दिवस के समय हिन्दुओं को दं गाई मुसलमानों से बचाने के लिये 'भारतीय जातीय बाहिनी' नामक एक सशस्त्र वाहिनी का निर्माण किया था और हिन्दुओं की रक्षा की थी उनकी कोलकाता में मां स विक्रय की दुकान थी, जिसकी वजह उन्हें पाँठा कहा जाता था....!! 16 अगस्त 1946 को कलकत्ता में मुस्लिम लीग के ‘डायरेक्ट एक्शन‘ के घोषणा के बाद कोलकाता की गलियों में मुसल मान गुंडों ने निर्दोष हिन्दुओं की एकतरफा और अकारण ह त्या करना शुरु कर दिया यह अत्यन्त भयानक नरसंहार था जिसमें कोलकाता की गलियां शमशान सी दिखने लगी थीं बंगाल के तत्कालीन मुख्यमंत्री हुसैन शाहिद सुहरावर्दी ने भीड़ से बोला था कि वे शहर में हिंदुओ का नरसंहार करो तुम्हारे खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी...!! हिन्दुओं पर हो रहे अत्याचार को देखकर गोपाल चंद्र मुखोपाध्याय को अत्यन्त पीड़ा हुई वह 'शठे शाठयम समाचरेत' अर्थात जैसे को तैसा ...

राजस्थान में जाहरवीर गोगाजी मंदिर को लेकर हाल के समय में चर्चाएँ तेज़ हुई हैं। कुछ लोग यह दावा कर रहे हैं कि इस स्थल को “जाहर पीर” के नाम से पुकारा जा रहा है और यहाँ धार्मिक वाक्य लिखने तथा चादर चढ़ाने जैसी परंपराएँ निभाई जा रही हैं। इन घटनाओं ने श्रद्धालुओं के बीच भावनात्मक बहस को जन्म दिया है, क्योंकि यह स्थान केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि पहचान, परंपरा और सांस्कृतिक स्मृति से गहराई से जुड़ा हुआ है। ऐसे में आवश्यक है कि हम समझें—जाहरवीर

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राजस्थान में जाहरवीर गोगाजी मंदिर को लेकर हाल के समय में चर्चाएँ तेज़ हुई हैं। कुछ लोग यह दावा कर रहे हैं कि इस स्थल को “जाहर पीर” के नाम से पुकारा जा रहा है और यहाँ धार्मिक वाक्य लिखने तथा चादर चढ़ाने जैसी परंपराएँ निभाई जा रही हैं। इन घटनाओं ने श्रद्धालुओं के बीच भावनात्मक बहस को जन्म दिया है, क्योंकि यह स्थान केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि पहचान, परंपरा और सांस्कृतिक स्मृति से गहराई से जुड़ा हुआ है। ऐसे में आवश्यक है कि हम समझें—जाहरवीर गोगाजी महाराज वास्तव में कौन थे और उनकी ऐतिहासिक व लोक परंपराओं में क्या भूमिका रही है। जाहरवीर गोगाजी महाराज राजस्थान के एक पूज्य लोकदेवता हैं, जिनका जन्म चूरू जिले के ददरेवा गाँव में राजा जेवर सिंह और रानी बाछल देवी के यहाँ हुआ माना जाता है। लोककथाओं के अनुसार उनकी जन्मकथा गुरु गोरखनाथ के आशीर्वाद से जुड़ी है, जिससे उनके जीवन में आध्यात्मिक शक्ति और दिव्यता का विशेष स्थान माना जाता है। बचपन से ही वे अद्भुत साहस, धर्मनिष्ठा और जनकल्याण की भावना से ओत-प्रोत थे। गोगाजी को एक वीर योद्धा के रूप में स्मरण किया जाता है। जनश्रुतियों में वर्णित है कि एक य...

आरक्षण किसके पास❓सारा #भ्रम दूर हो जायेगा...गहना बनाने का आरक्षण--सुनारहथियार बनाने का आरक्षण--लोहारपत्तल बनाने का आरक्षण--बारी ,सूप बनाने का आरक्षण--धरिकार,नाव चलाने का आरक्षण--मल्लाह,बर्तन बनाने का आरक्षण--ठठेरा कपड़े सिलने का आरक्षण--दर्जी,फर्नीचर बनाने का आरक्षण--बढ़ई.

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#आरक्षण किसके पास❓ सारा #भ्रम दूर हो जायेगा... गहना बनाने का आरक्षण--सुनार हथियार बनाने का आरक्षण--लोहार पत्तल बनाने का आरक्षण--बारी सूप बनाने का आरक्षण--धरिकार नाव चलाने का आरक्षण--मल्लाह बर्तन बनाने का आरक्षण--ठठेरा कपड़े सिलने का आरक्षण--दर्जी फर्नीचर बनाने का आरक्षण--बढ़ई बाल काटने का आरक्षण--नाई ईंट बनाने का आरक्षण--प्रजापति मूर्ति बनाने का आरक्षण--शिल्पकार घर बनाने का आरक्षण--राजमिस्त्री तेल पेरने का आरक्षण--तेली पान बेचने का आरक्षण--बरई दूध बेचने का आरक्षण--ग्वाला मांस बेचने का आरक्षण--खटिक जूता बनाने का आरक्षण--चर्मकार माला बनाने का आरक्षण--माली मिठाई बनाने का आरक्षण--हलवाई टेक्सटाइल का आरक्षण--दर्जी चूड़ी का आरक्षण--मनिहार रियल सेक्टर का आरक्षण--कुम्हार क्या हजार साल से किसी सुनार ने लोहार को दामाद बनाकर उसको अपने आरक्षित व्यवसाय में घुसने दिया❓ तो फिर आखिर आरक्षण का असली आनन्द किसने लिया❓ जब हजारों साल इन्हीं पेशे से रोजगार लिया किसी को घुसने नही दिया, तो आज इस पेशे के कारण खुद को पिछड़ा क्यों कहते हो❓ इन सारे सम्मानित व्यवसाइयों को आज संविधान ने पिछड़ा और अछूत बना दिया है। सनात...

गाजा में जो हो रहा है उसका जिम्मेदार कोई और नही खुद मुसलमान है. याद कीजिए 7 Oct जब एक मुस्लिम संगठन ने पार्टी कर रहे इजरायली लड़कियों को निशाना बनाया थाबिना कपड़ों के अपने साथ गाड़ी में भरकर ले गए.. और बकायदा वीडियो जारी किए

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गाजा में जो हो रहा है उसका जिम्मेदार कोई और नही खुद मुसलमान है. याद कीजिए 7 Oct जब एक मुस्लिम संगठन ने पार्टी कर रहे इजरायली लड़कियों को निशाना बनाया था बिना कपड़ों के अपने साथ गाड़ी में भरकर ले गए.. और बकायदा वीडियो जारी किए पूरी दुनिया के मुसलमानों ने जश्न मनाया... भारत मे उस दिल दहलाने वाली फ़ोटो को मुसलमान Iconic Picture 7 Oct कैप्शन के साथ शेयर कर रहे थे.. और जश्न मना रहे थे मुस्लिम संगठन ने न बच्चे देखे न महिलाएं देखी.. वो जो करने आये थे किया.. मुसलमानों ने उनका भव्य स्वागत किया.. उनके ऊपर फूलों की बरसात की गयी.. अल्लाह हु अकबर के नारे लगाए गए... जब ये वीडियो दुनिया भर में देखे गए तो दुनिया ने इनका सच देखा... इनका असली चेहरा सामने आया... उस दिन के बाद से इजरायल ने जो किया... उसे रोकने की ताकत किसी मे नही... यूएन हो... ह्यूमन राइट हो..या विश्व की कोई भी संस्था हो.. जब भी इजरायल को ज्ञान देने आगे आती है... इजरायल वो तस्वीरें वो वीडियो दिखाकर बस एक सवाल करता है... मान लो ये तुम्हारी बहन है ये तुम्हारी बच्ची है... और वो किसी भी कागज को फाड़कर फेक देता है... IDF के चीफ का बयान - हम नह...

कांग्रेस एक धोखा... हम हिन्दू भूलने में माहिर हैं।16 जून 2013 को उत्तराखंड केदारनाथ में जलप्रलय शुरू हुआ जो भीषण तबाही मचा गया था। केदारनाथ में लगभग पच्चीस हजार श्रद्धालु मर गये थे।तीन दिन चली इस भीषण तबाही में कांग्रेस की सरकार ने केदारनाथ में फंसे श्रद्धालु भक्तों की कोई मदद नही की।चौथे दिन जब इस भयंकर तबाही की खबर अंतरराष्ट्रीय मीडिया की सुर्खियां बन गई तब निर्लज्ज कांग्रेस ने सहायता भेजने का एलान किया! ध्यान रहे सिर्फ एलान किया था।18 जून को Antonio Maino सोनिया गांधी अमेरिका अपना गुप्त इलाज कराने गई हुई थी और राहुल गांधी मसाज बैंकॉक में थे। उन्हें सूचना भेजी गई तब दोनों मां बेटे 21 जून को भारत पहुंचे!कांग्रेस ने बहुत तामझाम करके आपदा में फंसे लोगों की सहायता के लिये बिस्किट के पैकेट और पानी की बोतलों के आठ ट्रक रवाना किये।जिन पर सोनिया गांधी और राहुल गांधी के बड़े बड़े पोस्टर लगाकर मां बेटे ने उन्हें झंडी दिखाकर रवाना किया फोटो भी खिंचवाए गये जो अखबारों की सुर्खियां बने थे।उन ट्रकों को न किराया दिया गया न डीजल दिया गया था।आठ दिन भटककर उन ड्राइवरों ने वो बिस्किट बेचकर अपना किराया वसूल किया और निकल लिये।आज तक कोई पूछने भी नही गया उस राहत सामग्री का क्या हुआ! फिर जब वहां लाशें सड़ने लगी तो महामारी का खतरा बढ़ता देख आसपास के गांवों के लोगों ने आन्दोलन किया।वह भी पन्द्रह दिन बाद किया जब लाशों से बदबू आने लगी थी।कई ग्रामीणों ने सामूहिक दाहसंस्कार भी किये लेकिन शव ही शव फैले देखकर लोग डर गये थे।अब देखे हिन्दुओ की लाशों पर कैसे व्यापार हुआ।तब कांग्रेस ने उन लाशों को निकालने के लिये एक विज्ञप्ति निकाली।एक कम्पनी आगे आई जिसने एक लाश निकालने के 4,60,000 रुपये में टेंडर लिया था। और लगभग 16,000 लाशें तीन दिन में निकाली थी।सरकार ने उस कम्पनी को 'सात अरब छतीस करोड़' का भुगतान तुरन्त कर दिया था।हालांकि लाशें मिलने का सिलसिला महीनों चलता रहा, फिर कई दिन कंकाल मिलते रहे। हाँ लाशें निकालने वाली कम्पनी रॉबर्ट वाड्रा की थी जो उसने किराये के हेलीकॉप्टर लेकर रातोंरात बनाई थी।कांग्रेस की सरकारी सहायता के नाम पर किया

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कांग्रेस एक धोखा... हम हिन्दू भूलने में माहिर हैं। 16 जून 2013 को उत्तराखंड केदारनाथ में जलप्रलय शुरू हुआ जो भीषण तबाही मचा गया था। केदारनाथ में लगभग पच्चीस हजार श्रद्धालु मर गये थे। तीन दिन चली इस भीषण तबाही में कांग्रेस की सरकार ने केदारनाथ में फंसे श्रद्धालु भक्तों की कोई मदद नही की। चौथे दिन जब इस भयंकर तबाही की खबर अंतरराष्ट्रीय मीडिया की सुर्खियां बन गई तब निर्लज्ज कांग्रेस ने सहायता भेजने का एलान किया! ध्यान रहे सिर्फ एलान किया था। 18 जून को Antonio Maino सोनिया गांधी अमेरिका अपना गुप्त इलाज कराने गई हुई थी और राहुल गांधी मसाज बैंकॉक में थे। उन्हें सूचना भेजी गई तब दोनों मां बेटे 21 जून को भारत पहुंचे! कांग्रेस ने बहुत तामझाम करके आपदा में फंसे लोगों की सहायता के लिये बिस्किट के पैकेट और पानी की बोतलों के आठ ट्रक रवाना किये। जिन पर सोनिया गांधी और राहुल गांधी के बड़े बड़े पोस्टर लगाकर मां बेटे ने उन्हें झंडी दिखाकर रवाना किया फोटो भी खिंचवाए गये जो अखबारों की सुर्खियां बने थे। उन ट्रकों को न किराया दिया गया न डीजल दिया गया था। आठ दिन भटककर उन ड्राइवरों ने वो बिस्किट बे...

साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल"-* 15 साल की उम्र में वेश्या की चौखट पर टहल आये .* 16 साल की उम्र में सम्भोग जब उनके पिता मृत्यु शैया पर थे .* 21 साल की उम्र में फिर उनका मन पराई स्त्री को देखकर मन मैं लड्डू फूटे* 28 साल की उम्र में अश्वेत स्त्री के पास जाते है* 40 साल की उम्र में अपने दोस्त हेनरी पोलक की पत्नी पर डोरे डाले

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"साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल"- * 15 साल की उम्र में वेश्या की चौखट पर टहल आये . * 16 साल की उम्र में सम्भोग जब उनके पिता मृत्यु शैया पर थे . * 21 साल की उम्र में फिर उनका मन पराई स्त्री को देखकर मन मैं लड्डू फूटे * 28 साल की उम्र में अश्वेत स्त्री के पास जाते है * 40 साल की उम्र में अपने दोस्त हेनरी पोलक की पत्नी पर डोरे डाले * 41 साल की उम्र में मोड नाम की लड़की पर दिल आशना हुआ * 48 की उम्र में 22 साल की एस्थर फेरिंग के साथ 'आशिकी-२" * 51 की उम्र में 48 साल की सरला देवी चोधरानी से प्रेम * 56 की उम्र में 33 साल की मेडलिन स्लेड से प्रेम * 60 की उम्र में 18 साल की महाराष्ट्रियन प्रेमा से प्रेम * 64 की उम्र में 24 साल की अमेरिका की नीला नागिनी के साथ बिताये कुछ हसीन अंतरंग क्षण * 65 की उम्र में 37 साल की जर्मन महिला मार्गरेट स्पीगल को कपडे पहनना सिखाया * 69 की उम्र में 18 साल की डॉक्टर शुशीला नैयर से नग्न होकर मालिश करवाई * 72 की उम्र में बाल विधवा लीलावती आसर,पटियाला के बड़े जमींदार की बेटी अम्तुस्स्लाम ,कपूरथला खानदान की राजकुमारी अमृत कौर तथा मशहूर समाजवादी नेता...

UGC बिल के विरोध में भाजपा के कोर वोटर जिस तरह से अचानक क्रोधित हुएउनका स्वाभाविक विरोध जिस तरह मोदी सरकार के विरुद्ध फूट पड़ा उसकी दो चार लाइनों में समीक्षा लिख रहा हूँ

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UGC बिल के विरोध में भाजपा के कोर वोटर जिस तरह से अचानक क्रोधित हुए उनका स्वाभाविक विरोध जिस तरह मोदी सरकार के विरुद्ध फूट पड़ा  उसकी दो चार लाइनों में समीक्षा लिख रहा हूँ  यह तो केवल एक छोटा सा तूफान था आया .. झकझोरा .. और .. मानिए या मत मानिए यह एक सप्ताह का तूफान .. मोदी जी की लोकप्रियता .. और अमित शाह का चाणक्य होने का गुरूर.. सब उड़ा ले गया तूफान के गुजरते ही चारों तरफ तबाही ही तबाही दिख रही है #सु_धांसू_त्रिवेदी के विद्वान होने की आभा का छप्पर उड़ गया.. #निशिक्रांत_दुबे की तेज तर्रार तर्कबाज की छवि ...की झोंपड़ी ढह गई.. गिरिराज सिंह ..#बौड़मबाबा .. जो हिंदूवादी बयानबाजी करके .. कुछ भक्तों के बल पर ..बरम बाबा का मेला लगा लेते थे.. अबकी बार ..बरम स्थान पर लगा ..पीपल का पेड़ .. महाबीरी झंडा .. और उनका #बंडा_आश्रम दुनो..भरभरा के ढह गया #धूर्तेंद्र_प्रधान जिस धूर्तता की कम्बल ओढ़े मलाई चांप रहे थे..  वह कंबल ऐसा उड़ा कि फुटपाथ पर नंगे दिखने लगे.. अब लोग चिल्ला रहे हैं.. भगाओ इस गंदे बदसूरत पागल को.. #रद्दीशंकर_प्रसाद .. जो लच्छेदार बातों की तुकबंदी करके .. बह...

लाखों ऐसी बहने जो सोने चाँदी के बरतनों में खाना खाती थी जिनके कोमल पैर कभी जमीं पर नहीं पड़े थे उन्हें 7 दिनों तक नंगा करके पाकिस्तान में घुमाया गया जहाँ भीड़ एक बार शुरू होती तो एक एक लड़की से 12 से 15 लोग रेप करते और 7 वे दिन सिर्फ़ 3 लड़कियां ज़िंदा बची उन्ही को काट के पकाकर उस भीड़ ने खाया तुम्हारे पूर्वजों को आजादी का ये नजराना मिला था और तुम इसे आजादी कहते हो । किसी घर में कोई मर जाता है तो उस दिन का त्योहार नहीं मनाया जाता जिस दिन लाखों लोग मर गए और लाखों के घर छिन गए उस दिन आप मनाओ आजादी का जश्न ।अमृतसर में हिन्दुओ और सिखों की लाशों से भरी ट्रैन आती थी लिखा रहता था, "ये आज़ादी का नजराना"पहली ट्रेन पाकिस्तान से (15.8.1947)😢

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लाखों ऐसी बहने जो सोने चाँदी के बरतनों में खाना खाती थी जिनके कोमल पैर कभी जमीं पर नहीं पड़े थे उन्हें 7 दिनों तक नंगा करके पाकिस्तान में घुमाया गया जहाँ भीड़ एक बार शुरू होती तो एक एक लड़की से 12 से 15 लोग रेप करते और 7 वे दिन सिर्फ़ 3 लड़कियां ज़िंदा बची उन्ही को काट के पकाकर उस भीड़ ने खाया तुम्हारे पूर्वजों को आजादी का ये नजराना मिला था और तुम इसे आजादी कहते हो । किसी घर में कोई मर जाता है तो उस दिन का त्योहार नहीं मनाया जाता जिस दिन लाखों लोग मर गए और लाखों के घर छिन गए उस दिन आप मनाओ आजादी का जश्न । अमृतसर में हिन्दुओ और सिखों की लाशों से भरी ट्रैन आती थी लिखा रहता था, "ये आज़ादी का नजराना" पहली ट्रेन पाकिस्तान से (15.8.1947)😢 अमृतसर का लाल इंटो वाला रेलवे स्टेशन अच्छा खासा शरणार्थियों कैम्प बना हुआ था । पंजाब के पाकिस्तानी हिस्से से भागकर आये हुए हज़ारों हिन्दुओ-सिखों को यहाँ से दूसरे ठिकानों पर भेजा जाता था ! वे धर्मशालाओं में टिकट की खिड़की के पास, प्लेट फार्मों पर भीड़ लगाये अपने खोये हुए मित्रों और रिश्तेदारों को हर आने वाली गाड़ी मै खोजते थे... 15 अगस्त ...

उस लड़की ने बस इतना कहा — “ठाकुर हूँ मैं ... मुझसे बकचोदी मत करना साले। ”…😡और देश का पूरा इकोसिस्टम अलर्ट मोड में आ गया ! टाइमलाइन गरम हुई, नैतिकता जाग उठी, सोशल मीडिया में भारी आक्रोश मच गया। अरे ये लड़की तो जातिवाद कर रही है। ऊँची जाति होने का घमण्ड दिखा रही है। ब्ला ब्ला। 😭पर ज़रा ठहरो… ! एक बात मुकेश जोशी की भी सुनो फिर फैसला करना।हम उसी देश में रहते हैं, जहाँ जाति प्रमाणपत्र सरकार खुद जारी करती है। फॉर्म से लेकर शादी के विज्ञापनों तक, हर जगह जाति लिखी जाती है। सरकारी योजनाएँ, करियर के मौके, राजनीति—सबमें जाति खुलकर इस्तेमाल होती है। वोट भी जाति के नाम पर माँगे जाते हैं।एडमिशन में जाति, नौकरी में जाति ,राजनीति में जाति, शादी में जाति वो सब आपके लिए ठीक 👌पर फिर उस लड़की का “ ठाकुर हूँ मैं” बोलना अपराध कैसे? ये कोरा दोगलापन है आपका। 👽इस लड़की ने ठाकुर होने का मुचलका भरा है। कीमत चुकाई है। उसको बचपन से आपने बताया है कि वो ठाकुर हूँ। और उससे ठाकुर होने की कीमत समय समय पर वसूलता रहेगा ये सिस्टम। इसके दलित दोस्तों ने कभी एग्जाम फ़ीस नहीं दी होगी ... क्योंकि इस ठाकुर लड़की से इस सिस्टम ने चार गुना फीस वसूली थी। बेशक़ सब ही गरीब और संघर्षरत रहे होंगे .... इस ठाकुर लड़की को सवर्ण होने के कारण अधिक मेरिट पर भी रेस से बाहर होना पड़ा होगा। 😓इस लड़की को तुमने समय समय पर एहसास करवाया है कि वो ठाकुर है। अब अगर वो प्राउडली कह रही है कि मैं ठाकुर हूँ .. तो तुमको मिर्च क्यों लग रही है दोस्त। 👽😎🔥----------------------------------------दोगलेपन को बेनकाब करना मेरा शौक है। मुझसे जुड़ने के लिए फॉलो करें। ❤️🔥

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उस लड़की ने बस इतना कहा — “ठाकुर हूँ मैं ... मुझसे बकचोदी मत करना साले। ”…😡 और देश का पूरा इकोसिस्टम अलर्ट मोड में आ गया ! टाइमलाइन गरम हुई, नैतिकता जाग उठी, सोशल मीडिया में भारी आक्रोश मच गया। अरे ये लड़की तो जातिवाद कर रही है। ऊँची जाति होने का घमण्ड दिखा रही है। ब्ला ब्ला। 😭 पर ज़रा ठहरो… ! एक बात मुकेश जोशी की भी सुनो फिर फैसला करना। हम उसी देश में रहते हैं, जहाँ जाति प्रमाणपत्र सरकार खुद जारी करती है। फॉर्म से लेकर शादी के विज्ञापनों तक, हर जगह जाति लिखी जाती है। सरकारी योजनाएँ, करियर के मौके, राजनीति—सबमें जाति खुलकर इस्तेमाल होती है। वोट भी जाति के नाम पर माँगे जाते हैं। एडमिशन में जाति, नौकरी में जाति ,राजनीति में जाति, शादी में जाति वो सब आपके लिए ठीक 👌 पर फिर उस लड़की का “ ठाकुर हूँ मैं” बोलना अपराध कैसे? ये कोरा दोगलापन है आपका। 👽 इस लड़की ने ठाकुर होने का मुचलका भरा है। कीमत चुकाई है। उसको बचपन से आपने बताया है कि वो ठाकुर हूँ। और उससे ठाकुर होने की कीमत समय समय पर वसूलता रहेगा ये सिस्टम।  इसके दलित दोस्तों ने कभी एग्जाम फ़ीस नहीं दी होगी ... क्योंकि इस ठ...

मूर्ति के हाथ मे जो डमरू देख रहे हो ना, वो पत्थर का है। ये तो कुछ भी नही है,डमरू पर जो रस्सी देख रहे हो ना, वह भी पत्थर की है। ओर तो ओर आप पत्थर की रस्सी के नीचे उंगली भी डाल सकते हो इतनी जगह है।हुआ ना आश्चर्य??अब जरा सोचिए बिना किसी तकनीक के क्या केवल छेनी और हथौड़ी से यह सब कैसे संभव है??एक हल्की सी गलत चोट क्या पूरी मूर्ति को खराब नहीं कर सकती थी??और अगर छेनी -हथौड़े से संभव है तो आज इतनी तकनीक के बावजूद भी इतनी सटीकता से कोई इसकी प्रतिलिपि क्यों नहीं बना पाता है ??ऐसे हजारों आश्चर्य है सनातन में लेकिन कुछ वामपंथी इतिहासकारों ने इनको आश्चर्य ही बनाकर रहने दिया किसी के सामने आने ही नहीं दिया और हमारी विडंबना देखिए कि हम बड़ी-बड़ी बातें करते हैं लेकिन हमें हमारे पूर्वजों द्वारा बनाई गई इन महान कलाकृतियों का ज्ञान भी नहीं है।धन्य है हमारे वह पूर्वज जिन्होंने यह सब कुछ बनाया धन्य है हमारी सनातन संस्कृति।सनातन हमारी पहचान#चेन्नाकेशावा_मंदिर,कर्नाटक,भारतवर्षहर हर महादेव

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मूर्ति के हाथ मे जो डमरू देख रहे हो ना, वो पत्थर का है। ये तो कुछ भी नही है,डमरू पर जो रस्सी देख रहे हो ना, वह भी पत्थर की है। ओर तो ओर आप पत्थर की रस्सी के नीचे उंगली भी डाल सकते हो इतनी जगह है। हुआ ना आश्चर्य?? अब जरा सोचिए बिना किसी तकनीक के क्या केवल छेनी और हथौड़ी से यह सब कैसे संभव है?? एक हल्की सी गलत चोट क्या पूरी मूर्ति को खराब नहीं कर सकती थी?? और अगर छेनी -हथौड़े से संभव है तो आज इतनी तकनीक के बावजूद भी इतनी सटीकता से कोई इसकी प्रतिलिपि क्यों नहीं बना पाता है ?? ऐसे हजारों आश्चर्य है सनातन में लेकिन कुछ वामपंथी इतिहासकारों ने इनको आश्चर्य ही बनाकर रहने दिया किसी के सामने आने ही नहीं दिया और हमारी विडंबना देखिए कि हम बड़ी-बड़ी बातें करते हैं लेकिन हमें हमारे पूर्वजों द्वारा बनाई गई इन महान कलाकृतियों का ज्ञान भी नहीं है। धन्य है हमारे वह पूर्वज जिन्होंने यह सब कुछ बनाया धन्य है हमारी सनातन संस्कृति। सनातन हमारी पहचान #चेन्नाकेशावा_मंदिर,कर्नाटक,भारतवर्ष हर हर महादेव

बीफ की दुकानों पर नग्न टँगी थी हिन्दू महिलाएँ रेप के बाद छात्राओं को खिड़की से लटकाया जिसने देखा डायरेक्ट एक्शन डे उस बुजुर्ग से ही सुनिए बर्बरता...!!

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बीफ की दुकानों पर नग्न टँगी थी हिन्दू महिलाएँ रेप के बाद छात्राओं को खिड़की से लटकाया जिसने देखा डायरेक्ट एक्शन डे उस बुजुर्ग से ही सुनिए बर्बरता...!! भारत के विभाजन के लिए मुस्लिम नेताओं ने 16 अगस्त, 1946 को डायरेक्ट एक्शन डे का ऐलान किया था, जब मुस्लिम भीड़ ने हिन्दुओं पर जम कर कहर बरपाया बंगाल में इसका खासा असर देखने को मिला, जहाँ कई इलाकों में दंगे हुए नोआखली के दंगे उनमें सबसे ज्यादा कुख्यात हैं वहाँ तो कई महीनों तक दंगा चलता ही रहा था महात्मा गाँधी को इलाके में कैंप करना पड़ा था उस दौरान हुए इन्हीं दंगों को लेकर एक वयोवृद्ध व्यक्ति ने अपने अनुभव साझा किए हैं...!! डायरेक्ट एक्शन डे में ज़िंदा बच गए रबीन्द्रनाथ दत्ता ने अपनी आँखों के सामने मुस्लिम भीड़ की क्रूरता को देखा था उनकी उम्र 94साल है इस हिसाब से उस समय वो युवावस्था में थे और उनकी उम्र 14 साल के आसपास रही होगी उन्होंने बताया है कि कैसे राजा बाजार के बीफ की दुकानों पर हिन्दू महिलाओं की नग्न लाशें हुक से लटका कर रखी गई थीं...!! उन्होंने बताया कि विक्टोरिया कॉलेज में पढ़ने वाली कई हिन्दू छात्राओं का बलात्कार किया गया, उन...

यह_कुछ_हजम_नहीं_हो_रहा_बापू =================1. आप, एक काले आदमी, लंदन में रहकर बिना किसी परेशानी के गोरो के साथ पढ़ते हैं, होस्टल में एक ही कमरे में गोरों के साथ रहते हैं, एक ही मेस में खाते हैं फिर अचानक ट्रेन में एक साथ सफर करने में फेंक दिए जाते है?

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यह_कुछ_हजम_नहीं_हो_रहा_बापू  ================= 1. आप, एक काले आदमी, लंदन में रहकर बिना किसी परेशानी के गोरो के साथ पढ़ते हैं, होस्टल में एक ही कमरे में गोरों के साथ रहते हैं, एक ही मेस में खाते हैं फिर अचानक ट्रेन में एक साथ सफर करने में फेंक दिए जाते है?              क्यूँ? ये बात कतई हजम नहीं हुई।  2. फिर आपको,  उसी काले भारतीय को, उन्हीं गोरों की सेना में सार्जेंट मेजर बना दिया जाता हैं और दक्षिण अफ्रीका में ब्रिटिश बोर वार में आपकी तैनाती एम्बुलेंस यूनिट में होती है जहां आप लड़ाई में गोरों का कालों के विरुद्ध साथ देते हैं। मिलिट्री यूनिफॉर्म में आपकी फोटो पूरे इंटरनेट उपलब्ध है। सार्जेंट मेजर गांधी लिखकर कोई भी सर्च कर सकता है। यह बात भी कुछ हजम नहीं हो रही। 3. आप में 1915 में अचानक 46 वर्ष की उम्र में देशप्रेम जागा और मिलिट्री यूनिफार्म उतारकर आपको बैरिस्टर घोषित कर दिया गया। मैं ऐसा इसलिए बोल रहा क्योंकि रानी लक्ष्मी बाई, खुदीराम बोस, बिस्मिल, भगतसिंह और आजाद जैसे अनेकों देशभक्तों की 25 की उम्र आते आते तक शहादत हो गई थी...