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Showing posts from December, 2020

*"मैं हिन्दू हूँ"* *जब से मैंने होश संभाला है,लगातार सुनता आ रहा हूँ कि...!!!!* -बनिया कंजूस होता है -नाई चतुर होता है -ब्राह्मण धर्म के नाम पर बेवकूफ बनाता है -यादव अलग ही दिमाग़ के होते है -राजपूत अत्याचारी होते हैं -दलित गंदे होते हैं -जाट और गुर्ज्जर बेवजह लड़ते हैं -मारवाड़ी लालची होते हैं... और ना जाने, ऐसी कितनी असत्य बातें,सभी हिन्दुओं को, आहिस्ते आहिस्ते सिखाई गई... नतीजा हीन भावना... एक दूसरे की जाति पर,शक और द्वेष,धीरे धीरे आपस में टकराव होना शुरू हुआ,और अंतिम परिणाम हुआ कि,मजबूत कर्मयोगी और सहिष्णु हिन्दू समाज,

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 *"मैं हिन्दू हूँ"* *जब से मैंने होश संभाला है,लगातार सुनता आ रहा हूँ कि...!!!!* -बनिया कंजूस होता है -नाई चतुर होता है -ब्राह्मण धर्म के नाम पर बेवकूफ बनाता है -यादव अलग ही दिमाग़ के होते है -राजपूत अत्याचारी होते हैं -दलित गंदे होते हैं -जाट और गुर्ज्जर बेवजह लड़ते हैं -मारवाड़ी लालची होते हैं... और ना जाने, ऐसी कितनी असत्य बातें,सभी हिन्दुओं को, आहिस्ते आहिस्ते सिखाई गई... नतीजा हीन भावना... एक दूसरे की जाति पर,शक और द्वेष,धीरे धीरे आपस में टकराव होना शुरू हुआ,और अंतिम परिणाम हुआ कि,मजबूत कर्मयोगी और सहिष्णु हिन्दू समाज,आपस में ही लड़कर कमजोर होने लगा... विधर्मीयो को उनका लक्ष्य प्राप्त हुआ ,हजारों साल से आप एक थे आपसे लड़ना मुश्किल था,अब आपको मिटाना आसान है,आपको पूछना चाहिए था कि...  अत्याचारी राजपूतों ने,सभी जातियों की,देश की रक्षा के लिए,हमेशा अपना खून क्यों बहाया... आपको पूछना था कि,अगर दलित को ब्राह्मण इतना ही गन्दा समझते थे,तो बाल्मीकि रामायण जो एक दलित ने लिखा,उसकी सभी पूजा क्यों करते हैं, माता सीता क्यों महर्षि वाल्मीकि के आश्रम में रहती... आपने नहीं पूछा कि ,आपको सोन...

🚩 1 जनवरी का इतिहास जान लेंगे आप तो छोड़ देंगआक्रमणकारियों ने भारत में राज करने के लिए सबसे पहले भारतीय संस्कृति पर कुठाराघात किया जिससे4000 वर्ष पहले से बेबीलोन में मनाया जाता था। लेकिन उस समय नए वर्ष का ये त्यौहार 21 मार्च को मनाया जाता था जो कि वसंत के आगमन की तिथि (हिन्दुओं का नववर्ष ) भी मानी जाती थी। प्राचीन रोम में भी ये तिथि नव वर्षोत्सव के लिए चुनी गई थी लेकिन रोम के तानाशाह जूलियस सीजर को भारतीय नववर्ष मनाना पसन्द नहीं आ रहा था इसलिए उसने ईसा पूर्व 45वें वर्ष में जूलियन कैलेंडर की स्थापना की..

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विदेशी आक्रमणकारियों ने भारत में राज करने के लिए सबसे पहले भारतीय संस्कृति पर कुठाराघात किया जिससे हम अपनी महान दिव्य संस्कृति भूल जाएं और उनकी पाश्चात्य संस्कृति अपना लें जिसके कारण वे भारत में राज कर सकें। 🚩अपनी संस्कृति का ज्ञान न होने के कारण आज हिन्दू भी 31 दिसंबर की रात्रि में एक-दूसरे को हैपी न्यू इयर कहते हुए नववर्ष की शुभकामनाएं देते हैं । 🚩नववर्ष उत्सव 4000 वर्ष पहले से बेबीलोन में मनाया जाता था। लेकिन उस समय नए वर्ष का ये त्यौहार 21 मार्च को मनाया जाता था जो कि वसंत के आगमन की तिथि (हिन्दुओं का नववर्ष ) भी मानी जाती थी। प्राचीन रोम में भी ये तिथि नव वर्षोत्सव के लिए चुनी गई थी लेकिन रोम के तानाशाह जूलियस सीजर को भारतीय नववर्ष मनाना पसन्द नहीं आ रहा था इसलिए उसने ईसा पूर्व 45वें वर्ष में जूलियन कैलेंडर की स्थापना की, उस समय विश्व में पहली बार 1 जनवरी को नए वर्ष का उत्सव मनाया गया। ऐसा करने के लिए जूलियस सीजर को पिछला वर्ष यानि, ईसापूर्व 46 ईस्वी को 445 दिनों का करना पड़ा था । उसके बाद भारतीय नववर्ष के अनुसार छोड़कर ईसाई समुदाय उनके देशों में 1 जनवरी से नववर्ष मनाने लगे । 🚩भ...

कृषि सुधारों के जरिए हमने किसानों को बेहतर विकल्प दिए हैं। इन कानूनों के बाद किसान जहां चाहें- जिसे चाहें अपनी उपज बेच सकते हैं। किसानों को जहां सही दाम मिले, वहां पर वे अपनी उपज बेच सकते हैं। - पीएम Narendra Modi

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क्या आज भी शुद्धि आन्दोलन कि आवश्यकता है???? स्वामी श्रद्धानन्द जी द्वारा चलाये गये शुद्धि आन्दोलन आज भी उतना ही आवश्यक है जितना तब था.... 11 फरवरी 1923 को स्वामी श्रद्धानन्द ने 'भारतीय शुद्धि सभा' की स्थापना की और शुद्धि का कार्य आरम्भ किया था।

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  क्या आज भी शुद्धि आन्दोलन कि आवश्यकता है???? स्वामी श्रद्धानन्द जी द्वारा चलाये गये शुद्धि आन्दोलन आज भी उतना ही आवश्यक है जितना तब था.... 11 फरवरी 1923 को स्वामी श्रद्धानन्द ने 'भारतीय शुद्धि सभा' की स्थापना की और शुद्धि का कार्य आरम्भ किया था। शुद्धि का उद्देश्य धार्मिक था, न कि राजनैतिक। हिन्दू समाज में समानता उनका लक्ष्य था। अछूतोद्धार, शिक्षा एवं नारी जाति में जागरण कर स्वामी श्रद्धानन्द एक महान समाज की स्थापना करना चाहते थे।.... भारत में कान्वेंट स्कूलों ने पहले किताब बदली यूरोप की कहानियाँ पाठ्यक्रम में घुसा दी फिर बच्चों की ड्रेस बदली लडकियों को सलवार कमीज से स्कर्ट में इसलिए लाये ताकि ये लड़कियां आगे चलकर सम्मान के साथ नन्गता स्वीकार कर ले। इसके अलावा कान्वेंट स्कूलों में दैनिक प्रार्थना बदली अनुशासन के नाम पर नियम कायदे कानून बदले और अब बच्चों के नाम बदल रहे है। हो सकता है कल आपके घर से कान्वेंट स्कुल में पढने वाले किसी दीपक या रोहित का नाम रोबर्ट या पीटर हो जाये तो चौकना मत ये सब एक घिनोनी साजिश के तहत किया जा रहा है। मिशनरीज ऐसी अनेकों करतूत हर रोज अखबारों में पढने...

आपको प्रशांत किशोर नाम याद हैं !! जरा दिमाग पर जोर डालिये और मात्र छह साल पहले 2014 अगस्त याद कीजिये जब कोंग्रेस ने प्रशांत किशोर को ठेका दिया था राहुलगांधी को राजनीति में चमकाने का ! प्रशांत ने 350 करोड़ में राहुलगांधी को राजनीति का सूरज बना देने का कॉन्ट्रेक्ट साइन किया था ।

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  आपको प्रशांत किशोर नाम याद हैं !! जरा दिमाग पर जोर डालिये और मात्र छह साल पहले 2014 अगस्त याद कीजिये जब कोंग्रेस ने प्रशांत किशोर को ठेका दिया था राहुलगांधी को राजनीति में चमकाने का ! प्रशांत ने 350 करोड़ में राहुलगांधी को राजनीति का सूरज बना देने का कॉन्ट्रेक्ट साइन किया था । अगस्त के आखिर में प्रशांत किशोर ने बाकायदा सोशल मीडिया पर एक विज्ञप्ति निकाली थी कि जो लोग सोशल मीडिया पर लिखने में एक्सपर्ट हैं वे उससे जुड़े ओर करीब 60 हजार लोगों की लिस्ट बनी थी । मुंबई में एक मीटिंग रखी गई और दूसरी बनारस में । लगभग पांच हजार लोगों को छांट कर एक आईटी सेल बनाई गई जो दिन रात कोंग्रेस को अपग्रेड करते थे ! दूसरा आपको "द वायर" याद हैं ! जिसने अमितशाह के बेटे पर 300% मुनाफा कमाने का आरोप लगाया था और रातों रात चर्चा में आई थी ?? हालांकि 'द वायर' ने बाद में केजरीवाल की तरह माफी भी मांगी और कोर्ट में जुर्माना भी भरा था, लेकिन द वायर को चर्चा में आना था सो वह आ गई । अब तीसरा हाल ही का - "कैम्ब्रिज अनालिटिका" को याद कीजिये । हजार करोड़ लेकर कोंग्रेस से सरकार बनवाने का कॉन्ट्रे...

विश्व क़ा दूसरा सबसे बड़ा नर संहार ( 30 लाख हिन्दुओं क़ा कत्लेआम हुआ था) ----------------------------------------------------- बांग्लादेश की पीएम शेख हसीना के पिछले सप्ताह के रहस्योद्घाटन के बाद से दुनिया के सामने एक नई मर्मान्तक तस्वीर को उभारा जाना चाहिए था । मगर प्रेस और मीडिया सब खामोश है ।

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  विश्व क़ा दूसरा सबसे बड़ा नर संहार ( 30 लाख हिन्दुओं क़ा कत्लेआम हुआ था) ----------------------------------------------------- बांग्लादेश की पीएम शेख हसीना के पिछले सप्ताह के रहस्योद्घाटन के बाद से दुनिया के सामने एक नई मर्मान्तक तस्वीर को उभारा जाना चाहिए था । मगर प्रेस और मीडिया सब खामोश है ।  पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) में 1970-71 में जनरल टिक्का खान, जुल्फिकार अली खान और याहिया खान की सहमति से पाकिस्तानी फौज और जमाते इस्लामी ने मिलकर 30 लाख बंगाली हिंदुओं को मौत के घाट उतारा था । जिसमे लगभग इतने ही बलात्कार शामिल हैं। अधिकांश बलात्कार पीड़ितों को बलात्कार के बाद निर्ममता से कत्ल कर दिया गया था । हिटलर द्वारा 60 लाख यहूदियों की हत्या की घटना के बाद विश्व की यह सबसे बड़ी त्रासदी थी ।  गुजरात में 2002 में 700 हत्याओं को, जिनमें 242 हिन्दू भी थे, को पूरा विश्व जानता है ।  मगर 30 लाख अभागे हिन्दुओं क़ी मौत क़ो जानने वाले वाला कोई नहीं है । क्यांकि मरने वाले सब हिन्दू थे । पूर्वी पाकिस्तान से आये 1 करोड़ बंगाली हिन्दू शरणार्थियों के धर्म को भारतीयों से ही गोपनीय रखा गय...

6 वर्षों में मुझे पता चला" कुछ इसी तरह आपको भी पता चला हो तो आप भी अपने अनुभव जरूर जोड़े। मात्र 6 वर्ष पहले मैं भी एक सामान्य व्यक्ति था, मुझे भी औरो की तरह नेहरू, गांधी, गांधी परिवार तथा हिन्दू मुस्लिम भाई भाई जैसे नारे अच्छे लगते थे।

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  कृपया आप सभी ध्यान से पढ़े। आपका नजरिया बदल देगा ये पोस्ट पुरा पढ़े और अपना अनुभव बताए " 6 वर्षों में मुझे पता चला" कुछ इसी तरह आपको भी पता चला हो तो आप भी अपने अनुभव जरूर जोड़े। मात्र 6 वर्ष पहले मैं भी एक सामान्य व्यक्ति था, मुझे भी औरो की तरह नेहरू, गांधी, गांधी परिवार तथा हिन्दू मुस्लिम भाई भाई जैसे नारे अच्छे लगते थे। मगर..... इन 6 वर्षों में मुझे कुछ ऐसे सत्य पता चले जो हैरान करने वाले थे। 1. सोशल मीडिया से मुझे यह पता चला कि "पत्रकार" निष्पक्ष नही होते। वे भी किसी खास विचारधारा से जुड़े होते हैं। 2. लेखक, साहित्यकार भी निष्पक्ष नही होते। वे भी किसी खास विचारधारा से जुडे होते है। 3. साहित्य अकादमी, बुकर, मैग्ससे पुरस्कार प्राप्त बुद्धिजीवी भी निष्पक्ष नही होते। 4. फिल्मों के नाम पर एक खास विचारधारा को बढ़ावा दिया जाता है। बालीबुड का सच पता चला। 5. हिन्दू धर्म को सनातन धर्म कहते हैं और देश का नाम हिंदुस्तान है, क्योंकि यह हिंदुओं का इकलौता देश है। 6. हिन्दू शब्द सिंधु से नही (ईरानियों द्वारा स को ह बोलने से) नही आया बल्कि "हिन्दू" शब्द "ऋग्वेद...