*"मैं हिन्दू हूँ"* *जब से मैंने होश संभाला है,लगातार सुनता आ रहा हूँ कि...!!!!* -बनिया कंजूस होता है -नाई चतुर होता है -ब्राह्मण धर्म के नाम पर बेवकूफ बनाता है -यादव अलग ही दिमाग़ के होते है -राजपूत अत्याचारी होते हैं -दलित गंदे होते हैं -जाट और गुर्ज्जर बेवजह लड़ते हैं -मारवाड़ी लालची होते हैं... और ना जाने, ऐसी कितनी असत्य बातें,सभी हिन्दुओं को, आहिस्ते आहिस्ते सिखाई गई... नतीजा हीन भावना... एक दूसरे की जाति पर,शक और द्वेष,धीरे धीरे आपस में टकराव होना शुरू हुआ,और अंतिम परिणाम हुआ कि,मजबूत कर्मयोगी और सहिष्णु हिन्दू समाज,
*"मैं हिन्दू हूँ"* *जब से मैंने होश संभाला है,लगातार सुनता आ रहा हूँ कि...!!!!* -बनिया कंजूस होता है -नाई चतुर होता है -ब्राह्मण धर्म के नाम पर बेवकूफ बनाता है -यादव अलग ही दिमाग़ के होते है -राजपूत अत्याचारी होते हैं -दलित गंदे होते हैं -जाट और गुर्ज्जर बेवजह लड़ते हैं -मारवाड़ी लालची होते हैं... और ना जाने, ऐसी कितनी असत्य बातें,सभी हिन्दुओं को, आहिस्ते आहिस्ते सिखाई गई... नतीजा हीन भावना... एक दूसरे की जाति पर,शक और द्वेष,धीरे धीरे आपस में टकराव होना शुरू हुआ,और अंतिम परिणाम हुआ कि,मजबूत कर्मयोगी और सहिष्णु हिन्दू समाज,आपस में ही लड़कर कमजोर होने लगा... विधर्मीयो को उनका लक्ष्य प्राप्त हुआ ,हजारों साल से आप एक थे आपसे लड़ना मुश्किल था,अब आपको मिटाना आसान है,आपको पूछना चाहिए था कि... अत्याचारी राजपूतों ने,सभी जातियों की,देश की रक्षा के लिए,हमेशा अपना खून क्यों बहाया... आपको पूछना था कि,अगर दलित को ब्राह्मण इतना ही गन्दा समझते थे,तो बाल्मीकि रामायण जो एक दलित ने लिखा,उसकी सभी पूजा क्यों करते हैं, माता सीता क्यों महर्षि वाल्मीकि के आश्रम में रहती... आपने नहीं पूछा कि ,आपको सोन...