क्या आज भी शुद्धि आन्दोलन कि आवश्यकता है???? स्वामी श्रद्धानन्द जी द्वारा चलाये गये शुद्धि आन्दोलन आज भी उतना ही आवश्यक है जितना तब था.... 11 फरवरी 1923 को स्वामी श्रद्धानन्द ने 'भारतीय शुद्धि सभा' की स्थापना की और शुद्धि का कार्य आरम्भ किया था।
क्या आज भी शुद्धि आन्दोलन कि आवश्यकता है????
स्वामी श्रद्धानन्द जी द्वारा चलाये गये शुद्धि आन्दोलन आज भी उतना ही आवश्यक है जितना तब था....
11 फरवरी 1923 को स्वामी श्रद्धानन्द ने 'भारतीय शुद्धि सभा' की स्थापना की और शुद्धि का कार्य आरम्भ किया था। शुद्धि का उद्देश्य धार्मिक था, न कि राजनैतिक। हिन्दू समाज में समानता उनका लक्ष्य था। अछूतोद्धार, शिक्षा एवं नारी जाति में जागरण कर स्वामी श्रद्धानन्द एक महान समाज की स्थापना करना चाहते थे।....
भारत में कान्वेंट स्कूलों ने पहले किताब बदली यूरोप की कहानियाँ पाठ्यक्रम में घुसा दी फिर बच्चों की ड्रेस बदली लडकियों को सलवार कमीज से स्कर्ट में इसलिए लाये ताकि ये लड़कियां आगे चलकर सम्मान के साथ नन्गता स्वीकार कर ले।
इसके अलावा कान्वेंट स्कूलों में दैनिक प्रार्थना बदली अनुशासन के नाम पर नियम कायदे कानून बदले और अब बच्चों के नाम बदल रहे है। हो सकता है कल आपके घर से कान्वेंट स्कुल में पढने वाले किसी दीपक या रोहित का नाम रोबर्ट या पीटर हो जाये तो चौकना मत ये सब एक घिनोनी साजिश के तहत किया जा रहा है।
मिशनरीज ऐसी अनेकों करतूत हर रोज अखबारों में पढने को मिल जाएगी एक गुडविल पब्लिक स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों की सीबीएसई की अंकतालिका हाथ में आने के बाद जब इस गोरखधंधे का खुलासा हुआ, तो बच्चों को एक कागज थमा दिया गया जिसके अनुसार नाम बदलने के पीछे मतांतरण की मंशा न होने की बात कही गयी थी। यह मामला देश भर में ईसाई फंदे के शातिर हथकंडों की कई कडि़यां खोल गया था।
इसमें सबसे ज्यादा शिकार कौन लोग हो रहे है एक-एक कड़ी समझिये अमीर बच्चों की शिक्षा के साथ आधुनिकता के नाम पर संस्कार बदल दिए जाते है, और गरीब बच्चों के अंकतालिका में नाम। जैसा पिछले दिनों दिल्ली एक बाल गृह में हुआ था। जहां रहने वाले बच्चों के स्कूल प्रमाणपत्र में माता-पिता के नाम की जगह ईसाई संचालक ने अपना और अपनी पत्नी का नाम दर्ज कराया हुआ था। हैरानी की बात यह है कि ये सभी बच्चे संचालक को फादर ही बोलते थे।
बालगृह में प्रार्थना करते-करते बच्चे एक दिन स्वयं ईसाई बन जाते हैं क्योंकि स्कुल रिकार्ड में उनके हिन्दू यानी असली माता-पिता का नाम नहीं, बल्कि ईसाई माता-पिता का नाम रहता है। यही कारण है कि कई बार बच्चों को नाबालिग से बालिग होने पर हिन्दू धर्म से ईसाई बनने का पता ही नहीं चलता है कि वो कब ईसाई बन गये!
देश में हमने ही जिनको दूर किया अछूत कह कर अलग किया तो इन मिस्नारियों ने उनको गले लगा कर अपने में मिला कर ईसाई बना दिया..
एसे ही लोगों को शुद्धि आन्दोलन के माध्यम से स्वामी श्रद्धानंद जी ने हजारों अछूतों को शुद्ध करके अपने धर्म में वापस लेकर आये ..
स्वामी जी के कर्मठता को, त्याग को, तपस्या को हम व्यर्थ में न गवाएं ... आज देश को पुनः जागृत होना पड़ेगा ...
हमें इस षड्यंत्र को समझना होगा और सब को लेकर चलना होगा ...
हमें इनके चाल को समझना होगा और अपने धर्म का प्रचार करना होगा ..जो धनवान है वो दिखावा नहीं सही मायने में गरीबों कि सहायता करें जिससे उनको शिक्षा ओए स्वास्थ्य के नाम पर कोई प्यार से ही सही ईसाई न बना सके ...
आपका अपना
डॉ ० दयानिधि सेवार्थी
क्रन्तिकारी वैदिक प्रवक्ता

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