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Showing posts from July, 2022

शाहजहाँ ने बताया था, हिंदू क्यों गुलाम हुआ ? समय न हो तो भी, एक बार तो अवश्य पढें।

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 मुग़ल बादशाह शाहजहाँ लाल किले में तख्त-ए-ताऊस पर बैठा हुआ था ।    दरबार का अपना सम्मोहन होता है और इस सम्मोहन को राजपूत वीर अमर सिंह राठौर ने अपनी पद चापों से भंग कर दिया । अमर सिंह राठौर शाहजहां के तख्त की तरफ आगे बढ़ रहे थे । तभी मुगलों के सेनापति सलावत खां ने उन्हें रोक दिया ।  सलावत खां - ठहर जाओ अमर सिंह जी, आप 8 दिन की छुट्टी पर गए थे और आज 16वें दिन तशरीफ़ लाए हैं ।  अमर सिंह - मैं राजा हूँ । मेरे पास रियासत है फौज है, मैं किसी का गुलाम नहीं ।  सलावत खां - आप राजा थे ।अब सिर्फ आप  हमारे सेनापति हैं, आप मेरे मातहत हैं । आप पर जुर्माना लगाया जाता है । शाम तक जुर्माने के सात लाख रुपए भिजवा दीजिएगा ।  अमर सिंह - अगर मैं जुर्माना ना दूँ  । सलावत खां- (तख्त की तरफ देखते हुए) हुज़ूर, ये काफि़र आपके सामने हुकूम उदूली कर रहा है ।  अमर सिंह के कानों ने काफि़र शब्द सुना । उनका हाथ तलवार की मूंठ पर गया,  तलवार बिजली की तरह निकली और सलावत खां की गर्दन पर गिरी । मुगलों के सेनापति सलावत खां का सिर जमीन पर आ गिरा । अकड़ कर बैठा सलावत खां का...

पेंग्विन दुनिया के सबसे ठंडे स्थान Antarctica में रहते है। सामान्यत तो उन्हें ठंड नही लगती , लेकिन जब वहाँ की सर्दियों के सबसे ठंडे दिन आते है तो उन्हें भी ठंड लगती है। पेंग्विन क्या करते है?

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 पेंग्विन दुनिया के सबसे ठंडे स्थान Antarctica में रहते है। सामान्यत तो उन्हें ठंड नही लगती , लेकिन जब वहाँ की सर्दियों के सबसे ठंडे दिन आते है तो उन्हें भी ठंड लगती है।  पेंग्विन क्या करते है? सारे पेंग्विन एक साथ खड़े हो जाते है सटकर। तो हर पेंग्विन चारों ओर से ढक जाता है। मतलब शरीर के रेडीएशन से जो ऊष्मा की हानि होती है वह  पड़ोसी पेंग्विन को ही मिल जाती है, व्यर्थ नही होती। याने हर पेंग्विन दूसरे का हीटर बन जाता है।  लेकिन झुंड की बाउंड्री भी तो होती है। जो बाउंड्री पर होंगे वे तो एक ओर से uncovered होकर ठंड से पीड़ित होंगे।  लेकिन पेंग्विन लोगों ने उसका भी हल ढूँढ लिया है। झुंड की बाउंड्री के सदस्य को कुछ ही क्षणो में झुंड के अंदर ले लिया जाता है व उनके स्थान पर दूसरे पेंग्विन आ जाते है। इस निरंतर चलते रहने से भी शरीर गर्म रहते है।  बहुत बुद्धिमान है पेंग्विन लोग। जानते है साथ नही रहेंगे तो मर जाएँगे। व कोई भेदभाव नही है। हर पेंग्विन को बाउंड्री पर जाना होता है, व हर पेंग्विन को केंद्र में जाने को मिलता है। जानते है बाउंड्री वालों को वही रखेंगे तो वे क...

क्या पोस्टमैन के चरित्र की रक्षा के लिए तलवार एक अनिवार्य आवश्यकता है (काल्पनिक लघुकथा)

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 क्या पोस्टमैन के चरित्र की रक्षा के लिए तलवार एक अनिवार्य आवश्यकता है  (काल्पनिक लघुकथा) 20वीं सदी में अफ्रीका में एक पोस्टमैन था जिसने कहा कि मैं ऊपर वाले की चिट्ठी लेकर आता हूं । लोग उस पोस्टमैन पर विश्वास नहीं कर रहे थे । तब उस पोस्टमैन ने कहा कि तुम मेरे साथ जुड़ो । लोगों ने पूछा इसके बदले हमें क्या मिलेगा ? तब उस पोस्टमैन ने जवाब दिया कि तुम लोगों को मेरे साथ जुड़ने के बदले लड़कियां मिलेंगी जिनके साथ तुम रेप भी कर सकोगे ।  -धीरे धीरे लड़कियों और लूट की लालच में सैकड़ों लोग उसके साथ जुड़ गए इसमें से ज्यादातर लोग अपराधी किस्म के थे । इन अपराधी किस्म के लोगों ने तलवार के बल से लूटना और लड़कियों का अपहरण और रेप शुरू हुआ । कुछ दिनों बाद इन अपराधियों के गैंग ने एक पूरे शहर पर ही कब्जा कर लिया और जो लोग ये नहीं मानते थे कि पोस्टमैन का ऊपर वाले से कोई संबंध नहीं है उन सभी को तलवार के दम पर मार दिया गया या फिर गैंग में ही जबरन शामिल करवा लिया गया -अब उस पोस्टमैन ने धीरे धीरे दूसरे शहर के लोगों को भी सताना शुरू कर दिया और ये कहना शुरू कर दिया कि अगर तुम ये स्वीकार नहीं करोगे ...

जिस आदमी ने श्रीमदभगवद गीता का पहला उर्दू अनुवाद किया वो था मोहम्मद मेहरुल्लाह! बाद में उसने सनातन धर्म अपना लिया!

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  जिस आदमी ने श्रीमदभगवद गीता का पहला उर्दू अनुवाद किया वो था मोहम्मद मेहरुल्लाह! बाद में उसने सनातन धर्म अपना लिया! पहला व्यक्ति जिसने श्रीमदभागवद गीता का अरबी अनुवाद किया वो एक फिलिस्तीनी था अल फतेह कमांडो नाम का! जिसने बाद में जर्मनी में इस्कॉन जॉइन किया और अब हिंदुत्व में है! पहला व्यक्ति जिसने इंग्लिश अनुवाद किया उसका नाम चार्ल्स विलिक्नोस था! उसने भी बाद में हिन्दू धर्म अपना लिया उसका तो ये तक कहना था कि दुनिया मे केवल हिंदुत्व बचेगा! हिब्रू में अनुवाद करने वाला व्यक्ति Bezashition le fanah नाम का इसरायली था जिसने बाद में हिंदुत्व अपना लिया था भारत मे आकर! पहला व्यक्ति जिसने रूसी भाषा मे अनुवाद किया उसका नाम था नोविकोव जो बाद में भगवान कृष्ण का भक्त बन गया था!* आज तक 283 बुद्धिमानों ने श्रीमद भगवद गीता का अनुवाद किया है अलग अलग भाषाओं में जिनमें से 58 बंगाली, 44 अंग्रेजी, 12 जर्मन, 4 रूसी, 4 फ्रेंच, 13 स्पेनिश, 5 अरबी, 3 उर्दू और अन्य कई भाषाएं थी ओर इन सब मे दिलचस्प बात यह है कि इन सभी ने बाद मैं हिन्दू धर्म को अपना लिया था। जिस व्यक्ति ने कुरान को बंगाली में अनुवाद किया उसक...

गिलोय बेल गरीब के घर की डॉक्टर है जो 70 रोगों को जड़ से मिटाती है i

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  गिलोय एक प्रकार की लता/बेल है, जिसके पत्ते पान के पत्ते की तरह होते है। यह इतनी अधिक गुणकारी होती है, कि इसका नाम अमृता रखा गया है। आयुर्वेद में गिलोय को बुखार की एक महान औषधि के रूप में माना गया है। गिलोय का रस पीने से शरीर में पाए जाने वाली विभिन्न प्रकार की बीमारियाँ दूर होने लगती हैं। गिलोय की पत्तियों में कैल्शियम, प्रोटीन तथा फास्फोरस पाए जाते है। यह वात, कफ और पित्त नाशक होती है। यह हमारे शरीर की रोगप्रतिरोधक शक्ति को बढाने में सहायता करती है। इसमें विभिन्न प्रकार के महत्वपूर्ण एंटीबायोटिक तथा एंटीवायरल तत्व पाए जाते है जिनसे शारीरिक स्वास्थ्य को लाभ पहुँचता है। यह गरीब के घर की डॉक्टर है क्योंकि यह गाँवो में सहजता से मिल जाती है। गिलोय में प्राकृतिक रूप से शरीर के दोषों को संतुलित करने की क्षमता पाई जाती है। गिलोय एक बहुत ही महत्वपूर्ण आयुर्वेदिक जडीबूटी है। गिलोय बहुत शीघ्रता से फलने फूलनेवाली बेल होती है। गिलोय की टहनियों को भी औषधि के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। गिलोय की बेल जीवन शक्ति से भरपूर होती है, क्योंकि इस बेल का यदि एक छोटा-सा टुकडा भी जमीन में डाल दिया ...

"गंगादास! एक शहर के अन्तरराष्ट्रीय प्रसिद्धि के विद्यालय के बगीचे में तेज धूप और गर्मी की परवाह किये बिना,बड़ी लग्न से पेड़ पौधों की काट छाट में लगा था कि, तभी विद्यालय के चपरासी की आवाज सुनाई दी, "गंगादास! तुझे प्रधानाचार्या जी तुरंत बुला रही हैं।"

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 "गंगादास!  एक शहर के अन्तरराष्ट्रीय प्रसिद्धि के विद्यालय के बगीचे में तेज धूप और गर्मी की परवाह किये बिना,बड़ी लग्न से पेड़ पौधों की काट छाट में लगा था कि, तभी विद्यालय के चपरासी की आवाज सुनाई दी, "गंगादास! तुझे प्रधानाचार्या जी तुरंत बुला रही हैं।"            गंगादास को आखिरी पांच शब्दो में काफी तेजी महसूस हुई और उसे लगा कि कोई महत्वपूर्ण बात हुई है जिसकी वजह से प्रधानाचार्या जी ने उसे तुरंत ही बुलाया है।           शीघ्रता से उठा, अपने हाथों को धोकर साफ किया और  चल दिया,द्रुत गति से प्रधानाचार्य के कार्यलय की ओर।           उसे प्रधानाचार्य महोदया के कार्यालय की दूरी मीलो की लग रही थी जो खत्म होने का नाम नहीं ले रही थी। उसकी ह्र्दयगति बढ़ गई थी।  सोच रहा था कि उससे क्या गलत हो गया जो आज उसको प्रधानाचार्य महोदया ने  तुरंत ही अपने कार्यालय में आने को कहा।             वह एक ईमानदार कर्मचारी था और अपने कार्य को पूरी निष्ठा से पूर्ण कर...

मृत्यु के क्षण में लोग तड़फते क्यों हैं?

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 मृत्यु के क्षण में लोग तड़फते क्यों हैं? तुमने किसी पक्षी को मरते देखा ? ऐसे सरल, ऐसे सहज, चुपचाप विदा हो जाता है! पंख भी नहीं फड़फड़ाता। शोरगुल भी नहीं मचाता। पक्षी तो इतने चुपचाप विदा हो जाते हैं,  इतनी सरलता से विदा हो जाते हैं! ज़रा नोच-खचोंट नहीं। ज़रा शोरगुल नहीं। तुमने पशुओं को मरते देखा? मौत में भी एक अपूर्व शांति होती है। आदमी को मरते देखो--कितना उपद्रव मचाता है, कितना रोकने की अपने को चेष्टा करता है! क्या होगा कारण? कारण हैः जिंदगी व्यर्थ गई और मौत आ गई। अब आगे कोई समय न बचा। खाली आए खाली गए, कुछ भराव नहीं और यह मौत आ गई। तड़फे न आदमी तो क्या करे ? भरे हुए आदमी ही शांति से मर सकते हैं। हां, बुद्ध विदा होते हैं शांति से, उल्लास से, उमंग से; जैसे किसी प्यारी यात्रा पर जाते हों! ज़रा भी क्षण-भर को भी, कण-भर को भी मोह नहीं होता इस तट से बंधे रहने का। छोड़ देते अपनी नाव उस पार जाने को। खोल देते अपने पंख। विराट की पुकार आ गई, आवाज आ गई, संदेश आ गया। रुकना कैसा? फिर इस तट को खूब जी लिया, मन भर कर जी लिया जी भरकर जी लिया! इस तट के गीत भी सुन लिए, इस तट का गीत भी गा ल...

दुश्मन को न पहचानने वाली, नेतृत्वहीन विराट सेना भी अंततः युद्ध हार जाती है ! हिंदु कौम एक ऐसी ही सेना है जिसका कोई लक्ष्य नहीं, कोई मंजिल नहीं, शत्रु की पहचान नहीं, अपना कोई सेनापति नहीं !

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 दुश्मन को न पहचानने वाली, नेतृत्वहीन विराट सेना भी अंततः युद्ध हार जाती है ! हिंदु कौम एक ऐसी ही सेना है जिसका कोई लक्ष्य नहीं,  कोई मंजिल नहीं, शत्रु की पहचान नहीं, अपना कोई सेनापति नहीं ! हिंदुओं से ज्यादा राजनैतिक लक्ष्यहीन और दिशाहीन कौम कोई नहीं, क्योंकि हिंदुओं के नेता तो बहुत हैं पर उनके मन में हिंदुओं के साम्राज्य जैसा कोई लक्ष्य नहीं, कोई महत्वाकांक्षा नहीं; इसलिए हिंदु नेताओं को सेकुलरिज्म की चादर ओढ़कर हिंदुओं के रक्त की प्यासी कौम से भाईचारा निभाने में भी कोई लज्जा नहीं आती! सत्ता का जो तंत्र अंग्रेज स्थापित कर गए, मात्र वे उसे ढोना चाहते हैं, उसपर बैठकर उसे भोगना चाहते हैं, यही हिंदु नेताओं की महत्वाकांक्षा है! जबकि कम्युनिस्टों, मुसलमानों और ईसाईयों का स्पष्ट राजनैतिक लक्ष्य है। कम्युनिस्ट साम्यवादी शासन वाला भारत चाहते हैं, मुसलमान शरीयत कानून वाला इस्लामिक भारत चाहते हैं और ईसाई बाइबिल वाला रोमानियाई भारत चाहते हैं, पर हिंदुओं के मन में ऐसा कोई लक्ष्य नहीं है। उनके पास चीन, अरब और रोम का मॉडल है पर हिंदुओं के पास ऐसा कोई मॉडल नहीं । हिंदुओं से राजनैतिक लक्ष्य क...

हिन्दू धर्म की 10 महत्वपूर्ण बातें

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१. 10 ध्वनियां  1.घंटी, 2.शंख, 3.बांसुरी, 4.वीणा, 5. मंजीरा, 6.करतल, 7.बीन (पुंगी), 8.ढोल, 9.नगाड़ा और 10.मृदंग २. 10 कर्तव्य  1. संध्या वंदन, 2. व्रत, 3. तीर्थ, 4. उत्सव, 5. दान, 6. सेवा 7. संस्कार, 8. यज्ञ, 9. वेदपाठ, 10. धर्म प्रचार।  ३. 10 दिशाएं दिशाएं 10 होती हैं जिनके नाम और क्रम इस प्रकार हैं- उर्ध्व, ईशान, पूर्व, आग्नेय, दक्षिण, नैऋत्य, पश्चिम, वायव्य, उत्तर और अधो।  ४. 10 दिग्पाल 10 दिशाओं के 10 दिग्पाल अर्थात द्वारपाल होते हैं या देवता होते हैं। उर्ध्व के ब्रह्मा, ईशान के शिव व ईश, पूर्व के इंद्र, आग्नेय के अग्नि या वह्रि, दक्षिण के यम, नैऋत्य के नऋति, पश्चिम के वरुण, वायव्य के वायु और मारुत, उत्तर के कुबेर और अधो के अनंत। ५. 10 देवीय आत्मा  1.कामधेनु गाय, 2.गरुढ़, 3.संपाति-जटायु, 4.उच्चै:श्रवा अश्व, 5.ऐरावत हाथी, 6.शेषनाग-वासुकि, 7.रीझ मानव, 8.वानर मानव, 9.येति, 10.मकर। ६. 10 देवीय वस्तुएं 1.कल्प वृक्ष, 2.अक्षय पात्र, 3.कर वच कुंडल, 4.दिव्य धनुष और तरकश, 5.पारस मणि, 6.अश्वत्थामा की मणि, 7.स्यंमतक मणि, 8.पांचजन्य शंख, 9.कौस्तुभ मणि और संजीवनी बूटी। ७....

हिन्दू - एक मरती हुई नस्ल' ! Hindu dying race नहीं है हम सनातन है?

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साल 1914 में यूएन मुखर्जी ने एक छोटी सी पुस्तक लिखी 'हिन्दू - एक मरती हुई नस्ल' 1911 की जनगणना को देखकर ही 1914 में मुखर्जी ने पाकिस्तान बनने की भविष्यवाणी कर दी।  उस समय संघ नहीं था सावरकर नहीं थे हिन्दू महासभा नहीं थी  तब भी मुखर्जी ने वो देख लिया जो पिछले 100 सालों में एक दर्जन नरसंहार और एक तिहाई भूमि से हिन्दू विलुप्त करा देने के बाद भी कांग्रेसी,सपाई, रालोदी, एनसीपी, तृणमूल वाले सेक्युलर  हिन्दू नहीं देख पा रहे।  इस किताब के छपते ही सुप्तावस्था से कुछ हिन्दू जगे।  अगले साल 1915 में पं मदन मोहन मालवीय जी के नेतृत्व में हिन्दू महासभा का गठन हुआ।  आर्य समाज ने शुद्धि आंदोलन शुरू किया जो एक मुस्लिम द्वारा स्वामी श्रद्धानंद की हत्या के साथ समाप्त हो गया।  1925 में हिन्दुओं को संगठित करने के उद्देश्य से संघ बना।  लेकिन ये सारे मिलकर भी वो नहीं रोक पाए जो यूएन मुखर्जी 1915 में ही देख लिया था। गांधीवादी अहिंसा ने इस्लामिक कट्टरवाद के साथ मिलकर मानव इतिहास के सबसे बड़े नरसंहार को जन्म दिया और काबुल से लेकर ढाका तक हिन्दू शरीयत के राज में समाप्त हो गए...