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Showing posts from November, 2025

इस पोस्ट के बाद आप कहेंगे कि बदला लो तो ऐसे लो वरना मत लो, जब हिनू को क्रोध आता है तो ना बसे जलती है ना ही देश विरोधी नारे लगते है बस ज्वालामुखी फटता है और उसका लावा सबकुछ जला डालता है। जब हिनू प्रतिशोध लेता है तो क्या होता है,,,,,? एक झांकी देखिये।बात 1761 की है पानीपत का युद्ध समाप्त हो चुका था, एक लाख मराठे मारे गए थे। इस युद्ध मे सबसे ज्यादा नुकसान पेशवा वंश का हुआ था क्योकि उसके उत्तराधिकारी विश्वास राव वीरगति को प्राप्त हुए थे। मगर एक वंश और था जिसने अपने 4 हीरे खो दिए थे ये थे सिंधिया। पानीपत के युद्ध मे सिंधिया परिवार के 5 लोग लड़े थे जिसमे से 4 शहीद हुए बस एक बच गए महादजी सिंधिया।युद्ध मे महादजी सिंधिया का पैर कट गया था और वे 2 साल तक चल फिर नही पाए। महादजी के भाइयो को बेरहमी से मारा गया था।उत्तर भारत मे अफगानी पठानों का भारी प्रभाव था इनके सरदार नजीब खान ने ही अब्दाली को बुलवाया था और इन सभी पठानों ने Eस्लाम के नाम पर अब्दाली को समर्थन दिया था तथा भारत से गद्दारी की थी। इसलिए महादजी ने प्रण लिया की भारतभूमि पर अब कोई अफगान जिंदा नही बचेगा।1766 में महादजी सिंधिया स्वस्थ होकर पुणे आये, सिंहासन पर बैठे पेशवा माधवराव के सामने अपनी तलवार निकाल कर रख दी और कहा आप बस इसे चलाने का आदेश दे मैं अफगानों के सिर आपके कदमो में रख दूंगा। पेशवा ने उनकी छिपी प्रतिभा को जान लिया, उन्हें अपना सेनापति और ग्वालियर का शासक बनाया।फिर तो क्या था 1767 में महादजी सिंधिया ने यमुना पार की तथा मराठा साम्राज्य का विस्तार शुरू किया। 1771 में उन्होंने फिर से दिल्ली में लाल किले पर भगवा फहरा दिया। दिल्ली में महादजी ने अपनी तलवार हवा में लहरा दी जिसका सीधा अर्थ था जहाँ जो अफगान दिखे उसे मारो। 1766 से ही पठानों की मौत का सिलसिला शुरू हुआ और 1773 तक जारि रहा।मराठो ने चुनचुनकर पानीपत का बदला लिया और 5 लाख पठानों का कत्लेआम कर दिया। नजीब खां की किस्मत अच्छी थी कि वो पहले ही मर गया मगर उसका बेटा दर बदर ठोकर खाता रहा। मराठो का खौफ इतना था कि पठानों को कही शरण भी नही मिली।इसके बाद मराठो ने रुहेलखंड पर हमला किया, हरिद्वार में पठानों ने मंदिर तोड़कर मस्जिदे बना दी थी। मराठो ने फिर से मंदिरों को खड़ा कर दिया तथा यहाँ 1 लाख पठानों को और मारा गया। पठानों की मौत का समाचार

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इस पोस्ट के बाद आप कहेंगे कि बदला लो तो ऐसे लो वरना मत लो, जब हिनू को क्रोध आता है तो ना बसे जलती है ना ही देश विरोधी नारे लगते है बस ज्वालामुखी फटता है और उसका लावा सबकुछ जला डालता है। जब हिनू प्रतिशोध लेता है तो क्या होता है,,,,,?  एक झांकी देखिये। बात 1761 की है पानीपत का युद्ध समाप्त हो चुका था, एक लाख मराठे मारे गए थे। इस युद्ध मे सबसे ज्यादा नुकसान पेशवा वंश का हुआ था क्योकि उसके उत्तराधिकारी विश्वास राव वीरगति को प्राप्त हुए थे। मगर एक वंश और था जिसने अपने 4 हीरे खो दिए थे ये थे सिंधिया। पानीपत के युद्ध मे सिंधिया परिवार के 5 लोग लड़े थे जिसमे से 4 शहीद हुए बस एक बच गए महादजी सिंधिया। युद्ध मे महादजी सिंधिया का पैर कट गया था और वे 2 साल तक चल फिर नही पाए। महादजी के भाइयो को बेरहमी से मारा गया था। उत्तर भारत मे अफगानी पठानों का भारी प्रभाव था इनके सरदार नजीब खान ने ही अब्दाली को बुलवाया था और इन सभी पठानों ने Eस्लाम के नाम पर अब्दाली को समर्थन दिया था तथा भारत से गद्दारी की थी। इसलिए महादजी ने प्रण लिया की भारतभूमि पर अब कोई अफगान जिंदा नही बचेगा। 1766 में महादजी सिंधिया स्वस्...

लाहौर मे 1938 मे इस गली मे हवेलीया बनवाने वाले हिन्दूओ को क्या पता था कि 9 वर्ष बाद ही 1947 यहां से सब कुछ छोडकर भागना पडेगा..?? लाहौर एक दास्तां है जो हिन्दुओ को यह बताती है कि पैसा कमा लेना सबकुछ नही है,,।श्री राम के पुत्र लव द्वारा बसाया गया शहर लाहौर। महाराज रणजीत सिंह के समय लाहौर में वाराणसी से ज्यादा मंदिर और गुरुद्वारे थे। बंटवारे तक व्यापार में अग्रवालों, जाटो और सिखों का डंका बजता था। मगर इन मूर्खो ने सदैव छद्म धर्मनिरपेक्षता बनाये रखी, लाहौर में म्लेच्छ मुसलमानो को अपने यहाँ काम पर रखते गए। उन्ही म्लेच्छ मुसलमानो ने बहुसंख्यक होकर अग्रवालों और सिखों को घसीट घसीट कर मारा।

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लाहौर मे 1938 मे इस गली मे हवेलीया बनवाने वाले हिन्दूओ को क्या पता था कि 9 वर्ष बाद ही 1947 यहां से सब कुछ छोडकर भागना पडेगा..?? लाहौर एक दास्तां है जो हिन्दुओ को यह बताती है कि पैसा कमा लेना सबकुछ नही है,,। श्री राम के पुत्र लव द्वारा बसाया गया शहर लाहौर। महाराज रणजीत सिंह के समय लाहौर में वाराणसी से ज्यादा मंदिर और गुरुद्वारे थे। बंटवारे तक व्यापार में अग्रवालों, जाटो और सिखों का डंका बजता था।  मगर इन मूर्खो ने सदैव छद्म धर्मनिरपेक्षता बनाये रखी, लाहौर में म्लेच्छ मुसलमानो को अपने यहाँ काम पर रखते गए। उन्ही म्लेच्छ मुसलमानो ने बहुसंख्यक होकर अग्रवालों और सिखों को घसीट घसीट कर मारा। ऊंची ऊंची शेखावटी हवेलियां और सरदारों के महल जेहादियो ने कब्जा लिए।  भारत में लाहौर पेशावर मुल्तान ढाका गुजरांवाला मीरपुरखास में बड़ी-बड़ी हवेलिया और बड़ी-बड़ी कोठियां रखने वाले हिंदुओं और सिखों को भी रातों-रात अपना सब कुछ छोड़ कर भागना पड़ा था। हिन्दुओं को रातों रात कराची लाहोर कश्मीर बलोच कांधार छोड़ना पड़ा। हिन्दू वाल्मिकी मेगवार समाज के जो लाहौर रुक गए वे मिटा दिये गये, उनकी बहू बेटियां उठा ...

यह डॉक्टरो के आतंकवादी बनने पर आप अगर आश्चर्यचकित हो रहे हैं तो अमेरिका में बेहद शानदार जिंदगी जीने वाली दुनिया की सर्वोच्च संस्था मैसाच्युसेट्स इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलॉजी से पोस्ट ग्रेजुएट और पीएचडी करके अमेरिका की न्यूक्लियर साइंस विभाग में असिस्टेंट डायरेक्टर की नौकरी करने वाली डॉक्टर आफिया सिद्दीकी अपने 5 बच्चों और पति को छोड़कर आतंकवादी बन गई थीपाकिस्तानी मूल की एक लड़की आफिया सिद्दीकी पढ़ने में बहुत ब्रिलियंट थी आगा खान ट्रस्ट के स्कॉलरशिप पर उसने प्रतिष्ठित MIT से न्यूक्लियर साइंटिस्ट में मास्टर्स डिग्री लिया और फिर आगा खां ट्रस्ट के स्कॉलरशिप पर उसने अमेरिका में ही न्यूरो न्यूक्लियर साइंटिस्ट में पीएचडी किया उसके बाद वह अमेरिका के न्यूक्लियर साइंस विभाग में बड़े पद पर काम करने लगी साथ ही साथ वह अमेरिका की दो यूनिवर्सिटी में पीएचडी और मास्टर्स डिग्री वाले बच्चों को न्यूक्लियर साइंस की प्रैक्टिकल नॉलेज भी पार्ट टाइम में देती थी वह अमेरिका की कुछ चुनिंदा लोगों में से थी जिसे यूरेनियम और कलपुर्जे ले जाने पर कोई रोक-टोक नहीं थाउसका पति भी बहुत बड़ा साइंटिस्ट था उसके 5 बच्चे थे कुछ समय के बाद वह बहुत कट्टर आतंकवादी बनने लगीवह आतंकवादियों को परमाणु बम बनाने की ट्रेनिंग देने के फिराक में थी और उसने अपने घर पर इतना युरेनियम जमा कर लिया था जिससे एक छोटा मोटा परमाणु बम बनाया जा सके इतना ही नहीं वह 9/11 के प्रमुख आतंकी खालिद शेख मोहम्मद के संपर्क में भी थी और उसने तीन आतंकवादियों को अपने घर पर पनाह भी दिया था वह इतनी ज्यादा कट्टरपंथी हो गई थी कि अपने वैज्ञानिक पति को तलाक देकर उसने आतंकी खालिद शेख मोहम्मद के आतंकी भतीजे से दूसरा निकाह कर लिया जबकि वह 5 बच्चों की मां थीवह जब अमेरिका छोड़कर अफगानिस्तान में आतंकवादियों के साथ रहने लगी तब से अमेरिका उसके ऊपर कड़ी नजर रख रहा था वह आतंकवादियों के लिए एक न्यूक्लियर साइंस लैबोरेट्री बना रही थी और जब उसे अमेरिकी मरीन फोर्स ने अफगानिस्तान में गिरफ्तार किया था तब उसने एक अमेरिकी सैनिक का 9 MM पिस्टल छीनकर गोलीबारी करके दो अमेरिकी सैनिकों का कत्ल भी कर दिया था आफिया सिद्दीकी अभी अमेरिका की एक जेल में बंद है वह पिछले कई सालों से जेल में है और अमेरिकी कानून ने उसे जब तक वह जिंदा रहेगी तब तक जेल में रखने का सजा सुनाया हैयहां तक कि उसके कारनामे सुनकर अमेरिका की उस जेल में बंद दूसरी महिला कैदी जो अमेरिकी थी उन्होंने उसकी जमकर कंबल पिटाई भी कर दिया था जेल में उसके ऊपर तीन बार हमले हुए इसीलिए उसे जेल के एक विशेष सेल में रखा गया हैपाकिस्तान उसकी रिहाई के लिए बहुत कोशिश कर रहा हैऔर पाकिस्तान की मूर्खता देखिए ओसामा बिन लादेन का पता लगाने के लिए अमेरिका की सीआईए ने एक पाकिस्तानी डॉक्टर शकील अफरीदी को पैसे देकर इलाके में टीकाकरण कार्यक्रम करवाया था फिर इस टीकाकरण के बहाने ओसामा बिन लादेन और उसके पूरे परिवार का पता चला था पाकिस्तान ने अपने ही डॉक्टर शकील अफरीदी को अमेरिका के लिए जासूसी करने के आरोप में कैद में रखा है तो पाकिस्तान ने कई बार अमेरिका से प्रस्ताव रखा है कि मैं डॉक्टर शकील आफरीदी को रिहा कर देता हूं आप बदले में डॉक्टर आफिया सिद्दीकी को रिहा कर दीजिए तब अमेरिका ने यही जवाब दिया है अबे तू हमको पागल समझा है क्या बे डॉक्टर शकील अफरीदी तेरा नागरिक है तो उसकेलसाथ जो चाहे वह करडॉ आफिया सिद्दीकी को रिहा करवाने के लिए कई बार आतंकियों ने कोशिश भी किया एक साल पहले पाकिस्तानी ने दो ak-56 लेकर टेक्सास के यहूदियों के पूजा स्थल सिनेगॉग में घुसकर कई यहूदियों को बंधक बना लिया और अब वह अमेरिकी सरकार से मांग कर रहा है कि आफिया सिद्दीकी को रिहा किया जाए वरना वह यहूदी बंधकों को मार देगा फिर स्वाट कमांडो ने उसे आतंकी का भेजा उड़ा दियामैंने पहले भी कहा है अभी भी कह रहा हूं जो ये ऐसे लोग जितना ज्यादा पढ़ा लेता है वह उतना ही बड़ा आतंकवादी बनता है

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यह डॉक्टरो के आतंकवादी बनने पर आप अगर आश्चर्यचकित हो रहे हैं तो अमेरिका में बेहद शानदार जिंदगी जीने वाली   दुनिया की सर्वोच्च संस्था मैसाच्युसेट्स इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलॉजी से पोस्ट ग्रेजुएट और पीएचडी करके अमेरिका की न्यूक्लियर साइंस विभाग में असिस्टेंट डायरेक्टर की नौकरी करने वाली डॉक्टर आफिया सिद्दीकी अपने 5 बच्चों और पति को छोड़कर आतंकवादी बन गई थी पाकिस्तानी मूल की एक लड़की आफिया सिद्दीकी पढ़ने में बहुत ब्रिलियंट  थी  आगा खान ट्रस्ट के स्कॉलरशिप पर उसने  प्रतिष्ठित MIT से न्यूक्लियर साइंटिस्ट में मास्टर्स डिग्री लिया और फिर आगा खां ट्रस्ट के स्कॉलरशिप पर उसने अमेरिका में ही न्यूरो न्यूक्लियर साइंटिस्ट में पीएचडी किया  उसके बाद वह अमेरिका के न्यूक्लियर साइंस विभाग में बड़े पद पर काम करने लगी साथ ही साथ वह अमेरिका की दो यूनिवर्सिटी में पीएचडी और मास्टर्स डिग्री वाले बच्चों को न्यूक्लियर साइंस की प्रैक्टिकल नॉलेज भी पार्ट टाइम में देती थी वह अमेरिका की कुछ चुनिंदा लोगों में से थी जिसे यूरेनियम और कलपुर्जे ले जाने पर कोई रोक-टोक नहीं था उसका पति भी बहुत बड़...

देश में सबसे अधिक मूर्ति अंबेडकर का टूटता है जो इस बात का प्रमाण है कि *देश की जनता अंबेडकरवाद से ऊब चुकी है और इसे जड़ से उखाड़ फेंकना चाहती है।,,

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लो जी एक और बाबा सांप की मूर्ति का सिर तन से जुदा कर दिया किसी ने अगर देश की जनता अंबेडकरवाद को पसंद करता तो मूर्ति क्यों तोड़ता,,।  देश में सबसे अधिक मूर्ति अंबेडकर का टूटता है जो इस बात का प्रमाण है कि *देश की जनता अंबेडकरवाद से ऊब चुकी है और इसे जड़ से उखाड़ फेंकना चाहती है।,,! #अम्बेडकर  इतिहास केवल तथ्यों का संग्रह नहीं होता, यह एक सचेत चयन भी होता है—क्या याद रखा जाए, और किसे भुला दिया जाए। भारतीय संविधान निर्माण के संदर्भ में, यह चयन स्पष्ट रूप से सत्ता की रणनीति और राजनीतिक लाभ से प्रेरित था। सर बी. एन. राउ जैसे व्यक्ति, जिनकी भूमिका संविधान के निर्माण में निर्णायक और केंद्रीय थी, को सामूहिक स्मृति से लगभग मिटा दिया गया। वहीं, डॉ. अंबेडकर को संविधान का एकमात्र और संपूर्ण पर्याय बना दिया गया। यह विस्मरण कोई आकस्मिक चूक या लापरवाही नहीं थी; यह कांग्रेस नेतृत्व, विशेषकर नेहरू की उस राजनीतिक रणनीति का हिस्सा था जिसमें प्रतीकों के ज़रिये एक विशेष प्रकार की सामाजिक इंजीनियरिंग की जा रही थी। अंबेडकर—जो दलित समुदाय के सबसे प्रखर और प्रभावशाली नेता थे—उस राजनीतिक प्...