मेरा लिखा पुराना पोस्ट है लेकिन हर दिन इसकी रेलिवेंसी बढती जा रही है। 😜रामायण काल्पनिक है लेकिन रावण दलित और मूलनिवासी था, और राम ने शम्बूक को मारकर दलितों की भावना का अपमान किया है।महाभारत काल्पनिक है लेकिन एकलव्य के साथ बुरा हुआ था।800 साल शरिया 200 साल रोलेट एक्ट चला लेकिन मनुस्मृति ने दलितों को गुलाम बनाया।दलितों को पढने का अधिकार नहीं था लेकिन अंबेडकर के बाप दादा पढे लिखे सूबेदार थे। संत रविदास भी हमारे हैं, वाल्मीकि और भिम भी हमारे हैं। हां वो बात अलग है कि अब हमने उन दोनो को हटाकर भिम को भगवान बनाकर उसी की पूजा करनी शुरु कर दी है। 😛राजपूतों ब्राह्मणों ने हम पर अत्याचार किये लेकिन अंबेडकर को पढाने वाला कंधे पर बैठाकर झूमने वाले, अपना सरनेम देने वाले ब्राह्मण और विदेश भेजने वाले सयाजीराव गायकवाड़ राजपूत थे।हम ब्राह्मणों को नंगा भिखारी कहके चिढाते हैं... वो बात अलग है कि अपनी भाट्सेप इनभर्सिटी में हम कहते हैं कि ब्राह्मणों के पास सबसे ज्यादा धन मान और पद हैं। हमें अछूत कहा गया, वो बात अलग है कि अंबेडकर से शादी ब्राह्मण कन्या ने की।हमें धन दौलत का अधिकार नहीं था लेकिन आजादी के समय आधे से ज्यादा रियासते SC ST के पास थी।संविधान अकेले बाबा साहब ने दिमाग लगाकर बनाया जबकि असल में Copy Pasted है।बाबा साहब संविधान निर्माता हैं जबकि टोटल 300+ लोग थे। बाबा केवल ड्राफ्टमैन थे।ब्राह्मण बाबा से चिढते थे जबकि हार के बावजूद उनको सरकार में शामिल किया ब्राह्मण राजेंद्र प्रसाद और जवाहरलाल ने।बाबा के कारण आज सबको आरक्षण मिला, वो बात अलग है कि बाबा ने आरक्षण केवल दस साल को देकर कहा कि इसका सर्वाधिक दुरुपयोग होगा।हम गर्व से कहेंगे द ग्रेट C#मार लेकिन अगर किसी और ने कह दिया कि और सुनाओ द ग्रेट C#मार साहब क्या हाल हैं? तो बिना सुनवाई जेल में डलवा देंगे बेल भी नहीं हो पाएगी।हम लोगो को बताते हैं कि हम हिन्दू नहीं हैं लेकिन जातिप्रमाण पत्र में धर्म के कॉलम हिन्दू ही लिखते हैं।हम हिन्दुओं का मजाक बनाते हैं कि खीर खाने से कोई कैसे पैदा हो सकता है? भले वह औषधीय खीर ही क्यों ना हो, लेकिन हमारे भगवान बुत हाथी के संभोग से पैदा हो सकते हैं।हम दलितों को मन्दिर का पुजारी क्यों नहीं बनाते? वो अलग बात है कि हमारी भगवान में कोई आस्था नहीं हम नास्तिक हो गये हैं।ब्राह्मण हमसे रोटी बेटी का रिश्ता नहीं रखते वो अलग बात है हममें भी घोर ऊंच नीच और 600+ Sect Subsect हैं जिनके हाथ का हम पानी नहीं पीते आपस में कोई रोटी बेटी का सम्बन्ध नहीं रखते।ओबीसी भी शूद्र होते हैं... अपना प्रोपगंडा चलाने के लिए ऐसा हमने सबको बताया है। वरना हम भी जानते हैं कि दलित और शूद्र अलग चीजें हैं...और ओबीसी 1991 से पहले की वो सवर्ण जातियाँ ही हैं जो आर्थिक व शैक्षणिक के रूप में पिछडे हुए थे।मंडल कमीशन व ओबीसी आरक्षण से पहले ये सब सवर्ण ही कहलाते थे।पर क्या करें पापी पेट का सवाल है... गाली नहीं देंगे तो रोजी रोटी कैसे चलेगी। ☺ब्राह्मण क्षत्रिय आर्य विदेशी हैं... वो अलग बात है कि कांग्रेसी हमें अफ्रीकन रेस का बताते आए हैं।ब्राह्मण क्षत्रिय हमारे 5000 साल से दुश्मन हैं... वो अलग बात है कि हमारा भगवान रावण खुद ब्राह्मण और बुद्ध क्षत्रिय था। 😜ब्राह्मण ने हमसे चमडा उठवाया ताकि हम उनके लिए जूते बना सकें... वो बात अलग है कि ब्राह्मण लकडी के खडाऊं पहना करते थे। 😛ब्राह्मणों ने अपने कुएं से पानी नहीं पीने दिया वो बात अलग है कि कुएं हम ही खोदते थे। 😜जनेऊ ब्राह्मणवाद और दलितों पर अत्याचार की पहचान है... वो अलग बात है कि हमारा भगवान बुद खुद जनेऊ पहनता था। 😝भगवान बुद हम दलितों का भगवान है... वो बात अलग है कि उसने कहा था कि मेरे बोधिसत्व सिर्फ ब्राह्मण और क्षत्रिय कुल में पैदा होते हैं। ... घोर जातिवादी था हमारा भगवान। 😪लेकिन कोई बात नहीं हम किताब में ही उलटफेर कर देंगे। 🤑भगवान बुद्ध मूलनिवासी थे ना कि बाहरी विदेशी आर्य... हालांकि उनका जनम नेपाल में हुआ था और उन्होंने दुनिया को वेदों से पांच आर्य सत्य बताए।लेकिन पापी पेट के लिए अफ्रीकन मूलनिवासियों का हूतिया काटना पडता है.. उनको भाट्सेप पर हिन्दुओं के खिलाफ भडकाना पडता है, नीला झंडा उठवाएंगे, एक दिन सत्ता में आएंगे।और सत्ता संभालने के लिए फिर ब्राह्मण क्षत्रियों को टिकिट देंगे और उन्ही से सत्ता चलवाएंगे।बस हम अपनी मूर्तियाँ बनवाएंगे। 😎बोलो जेज्जे जेज्जे जे भिमहमें आरक्षण इसलिए मिला ताकि हम खूब पढ सकें... वो अलग बात है कि हमारा IQ लेवल अपेक्षाकृत बढा नहीं, हम बुद्धिहीन प्रोडक्ट दे रहे हैं। शिक्षा शेरनी का दूध है लेकिन आरक्षण कुतिया का दूध। हमें शिक्षा से ज्यादा आरक्षण चाहिए। 😭- अंकुर आर्य
मेरा लिखा पुराना पोस्ट है लेकिन हर दिन इसकी रेलिवेंसी बढती जा रही है। 😜
रामायण काल्पनिक है लेकिन रावण दलित और मूलनिवासी था, और राम ने शम्बूक को मारकर दलितों की भावना का अपमान किया है।
महाभारत काल्पनिक है लेकिन एकलव्य के साथ बुरा हुआ था।
800 साल शरिया 200 साल रोलेट एक्ट चला लेकिन मनुस्मृति ने दलितों को गुलाम बनाया।
दलितों को पढने का अधिकार नहीं था लेकिन अंबेडकर के बाप दादा पढे लिखे सूबेदार थे।
संत रविदास भी हमारे हैं, वाल्मीकि और भिम भी हमारे हैं। हां वो बात अलग है कि अब हमने उन दोनो को हटाकर भिम को भगवान बनाकर उसी की पूजा करनी शुरु कर दी है। 😛
राजपूतों ब्राह्मणों ने हम पर अत्याचार किये लेकिन अंबेडकर को पढाने वाला कंधे पर बैठाकर झूमने वाले, अपना सरनेम देने वाले ब्राह्मण और विदेश भेजने वाले सयाजीराव गायकवाड़ राजपूत थे।
हम ब्राह्मणों को नंगा भिखारी कहके चिढाते हैं... वो बात अलग है कि अपनी भाट्सेप इनभर्सिटी में हम कहते हैं कि ब्राह्मणों के पास सबसे ज्यादा धन मान और पद हैं।
हमें अछूत कहा गया, वो बात अलग है कि अंबेडकर से शादी ब्राह्मण कन्या ने की।
हमें धन दौलत का अधिकार नहीं था लेकिन आजादी के समय आधे से ज्यादा रियासते SC ST के पास थी।
संविधान अकेले बाबा साहब ने दिमाग लगाकर बनाया जबकि असल में Copy Pasted है।
बाबा साहब संविधान निर्माता हैं जबकि टोटल 300+ लोग थे। बाबा केवल ड्राफ्टमैन थे।
ब्राह्मण बाबा से चिढते थे जबकि हार के बावजूद उनको सरकार में शामिल किया ब्राह्मण राजेंद्र प्रसाद और जवाहरलाल ने।
बाबा के कारण आज सबको आरक्षण मिला, वो बात अलग है कि बाबा ने आरक्षण केवल दस साल को देकर कहा कि इसका सर्वाधिक दुरुपयोग होगा।
हम गर्व से कहेंगे द ग्रेट C#मार लेकिन अगर किसी और ने कह दिया कि और सुनाओ द ग्रेट C#मार साहब क्या हाल हैं? तो बिना सुनवाई जेल में डलवा देंगे बेल भी नहीं हो पाएगी।
हम लोगो को बताते हैं कि हम हिन्दू नहीं हैं लेकिन जातिप्रमाण पत्र में धर्म के कॉलम हिन्दू ही लिखते हैं।
हम हिन्दुओं का मजाक बनाते हैं कि खीर खाने से कोई कैसे पैदा हो सकता है? भले वह औषधीय खीर ही क्यों ना हो, लेकिन हमारे भगवान बुत हाथी के संभोग से पैदा हो सकते हैं।
हम दलितों को मन्दिर का पुजारी क्यों नहीं बनाते? वो अलग बात है कि हमारी भगवान में कोई आस्था नहीं हम नास्तिक हो गये हैं।
ब्राह्मण हमसे रोटी बेटी का रिश्ता नहीं रखते वो अलग बात है हममें भी घोर ऊंच नीच और 600+ Sect Subsect हैं जिनके हाथ का हम पानी नहीं पीते आपस में कोई रोटी बेटी का सम्बन्ध नहीं रखते।
ओबीसी भी शूद्र होते हैं... अपना प्रोपगंडा चलाने के लिए ऐसा हमने सबको बताया है। वरना हम भी जानते हैं कि दलित और शूद्र अलग चीजें हैं...और ओबीसी 1991 से पहले की वो सवर्ण जातियाँ ही हैं जो आर्थिक व शैक्षणिक के रूप में पिछडे हुए थे।
मंडल कमीशन व ओबीसी आरक्षण से पहले ये सब सवर्ण ही कहलाते थे।
पर क्या करें पापी पेट का सवाल है... गाली नहीं देंगे तो रोजी रोटी कैसे चलेगी। ☺
ब्राह्मण क्षत्रिय आर्य विदेशी हैं... वो अलग बात है कि कांग्रेसी हमें अफ्रीकन रेस का बताते आए हैं।
ब्राह्मण क्षत्रिय हमारे 5000 साल से दुश्मन हैं... वो अलग बात है कि हमारा भगवान रावण खुद ब्राह्मण और बुद्ध क्षत्रिय था। 😜
ब्राह्मण ने हमसे चमडा उठवाया ताकि हम उनके लिए जूते बना सकें... वो बात अलग है कि ब्राह्मण लकडी के खडाऊं पहना करते थे। 😛
ब्राह्मणों ने अपने कुएं से पानी नहीं पीने दिया वो बात अलग है कि कुएं हम ही खोदते थे। 😜
जनेऊ ब्राह्मणवाद और दलितों पर अत्याचार की पहचान है... वो अलग बात है कि हमारा भगवान बुद खुद जनेऊ पहनता था। 😝
भगवान बुद हम दलितों का भगवान है... वो बात अलग है कि उसने कहा था कि मेरे बोधिसत्व सिर्फ ब्राह्मण और क्षत्रिय कुल में पैदा होते हैं। ... घोर जातिवादी था हमारा भगवान। 😪
लेकिन कोई बात नहीं हम किताब में ही उलटफेर कर देंगे। 🤑
भगवान बुद्ध मूलनिवासी थे ना कि बाहरी विदेशी आर्य... हालांकि उनका जनम नेपाल में हुआ था और उन्होंने दुनिया को वेदों से पांच आर्य सत्य बताए।
लेकिन पापी पेट के लिए अफ्रीकन मूलनिवासियों का हूतिया काटना पडता है.. उनको भाट्सेप पर हिन्दुओं के खिलाफ भडकाना पडता है, नीला झंडा उठवाएंगे, एक दिन सत्ता में आएंगे।
और सत्ता संभालने के लिए फिर ब्राह्मण क्षत्रियों को टिकिट देंगे और उन्ही से सत्ता चलवाएंगे।
बस हम अपनी मूर्तियाँ बनवाएंगे। 😎
बोलो जेज्जे जेज्जे जे भिम
हमें आरक्षण इसलिए मिला ताकि हम खूब पढ सकें... वो अलग बात है कि हमारा IQ लेवल अपेक्षाकृत बढा नहीं, हम बुद्धिहीन प्रोडक्ट दे रहे हैं।
शिक्षा शेरनी का दूध है लेकिन आरक्षण कुतिया का दूध। हमें शिक्षा से ज्यादा आरक्षण चाहिए। 😭
- अंकुर आर्य
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