*ये वह यजीदी महिलाएं हैं जिनके पति, पिता और भाइयों को मारकर जेहादियों ने सेक्स-स्लेव बनाकर बच्चे पैदा करने के लिए अपने कैदखाने में रखा था।*जब अमेरिकी सेनाओं ने मोसुल नगर में ऐसे ही एक कैदखाने को अपने कब्जे में लेकर इन्हें आजाद कराया तो कोई भी महिला बिना बच्चों के न थी ,जेहादी हर दिन इन्हें अपनी हवश का शिकार बनाते थे और नए जेहादी पैदा करने के लिए इन्हें पालते थे।

*ये वह यजीदी महिलाएं हैं जिनके पति, पिता और भाइयों को मारकर जेहादियों ने सेक्स-स्लेव बनाकर बच्चे पैदा करने के लिए अपने कैदखाने में रखा था।*

जब अमेरिकी सेनाओं ने मोसुल नगर में ऐसे ही एक कैदखाने को अपने कब्जे में लेकर इन्हें आजाद कराया तो कोई भी महिला बिना बच्चों के न थी ,जेहादी हर दिन इन्हें अपनी हवश का शिकार बनाते थे और नए जेहादी पैदा करने के लिए इन्हें पालते थे।

यजीदी परिवारों के पुरुषों को मारने और इन्हें बंदी बनाने के पीछे की सोच मात्र यह है कि यजीदी काफ़िर हैं।

और काफिरों के साथ उनका यह व्यवहार उनके इस्लामिक मजहब के अनुसार है।

उत्तरी इराक के दोहूक प्रान्त की रहने वाली 23 साल की यज़ीदी महिला फरीदा की शादी को अभी दो माह हुए थे कि एक रात जेहादियों ने उनके घर को घेर लिया और काफ़िर बताकर उनके सामने ही पांच भाइयो, पिता को मारकर

फरीदा और उसकी बहन को उठा ले गए थे।

बाद में जब अमेरिकी सेना ने फरीदा को मोसुल के एक सेक्स-स्लेव सेंटर से आजाद कराया तो फरीदा ने बताया कि...

मेरी बहन 16 साल की है. उसकी निकाह सात मर्दों से करा दी गई है. वह अभी भी सीरिया में ही है यह कहते हुए फरीदा फूट-फूट कर रोने लगती है. और फिर बताती है कि ‘मैंने एक आदमी को बारी-बारी से चार महिलाओं के साथ बलात्कार करते हुए देखा, और मैंने देखा कि इस्लामिक स्टेट के लोगों ने एक मां से उसके बच्चे को अलग कर दिया। वो भी तब जब वो अपने बच्चे को दूध पिला रही थी. उस बच्चे का मुंह उसकी मां के स्तन से लगा हुआ था। फिर उस औरत के साथ बलात्कार करने लगे. वहां एक बंदे से मेरा निकाह होने वाली था. फिर उसके दोस्त मुझे देखने आये. उसका एक दोस्त भी मुझे पसंद करने लगा. उसने मुझसे शादी का इरादा बना लिया। और बाद में मैं खुद पांच मर्दों को बेच दी गई।'

जब एक सेकुलर पत्रकार ने

फरीदा से पूछा कि ‘कई लोगों का ऐसा कहना है कि इस्लामिक स्टेट के लोग ड्रग लेते हैं। और इसलिए इस तरह हिंसा और बलात्कार की घटनाओं को अंजाम देते हैं’। इस पर फरीदा ने बताया कि ‘वे लोग ये काम बिल्कुल स्वतंत्र रूप से और दिल से करते हैं. वो इस्लाम की ही सांस लेते हैं, खाते और सोते हैं। और इसी के लिए वो पागल हैं. ये एक सनक है. उनके बच्चे भी उनसे यही सीख रहे हैं। वो भी आगे जाकर उनके जैसे ही बनेंगे. मैंने वहां किसी को भी इस मानसिकता से अलग नहीं देखा’।

इस्लामिक जेहादियों के चंगुल से किसी तरह जान बचा कर भागी 25 वर्षीय यजीदी महिला नादिया मुराद को वर्ष 2018 में शांति के नोबेल पुरस्कार के लिए चुना गया था।नादिया मुराद ने बताया कि इराक के सिंजर के निकट यजीदी समुदाय के गढ़ के गाँव कोचों में शांतिपूर्वक जीवन जी रहीं थी

वर्ष 2014 के

एक दिन काले झंड़े लगे जिहादियों के ट्रक उनके गांव कोचो में धड़धड़ाते हुए घुस आए। इन आंतकवादियों ने पुरूषों की हत्या कर दी, बच्चों को लड़ाई सिखाने के लिए और हजारों महिलाओं को यौन दासी बनाने और बल पूर्वक काम कराने के लिए अपने कब्जे में ले लिया।

छह भाइयों , पिता और वृद्ध माँ का कत्ल कर दिया और सैकड़ो गांवों के हजारों यजीदी लड़कियों के साथ जेहादी मुराद को मोसुल ले आये ।मोसुल आईएस की इस्लामिक खिलाफत की ‘राजधानी’थी। दरिंदगी की हदें पार करते हुए आतंकवादियों ने उनसे लगातार सामूहिक दुष्कर्म किया, यातानांए दी।

वह बताती हैं कि जिहादी महिलाओं और बच्चियों को बेचने के लिए दास बाजार लगते हैं और यजीदी महिलाओं को धर्म बदल कर इस्लाम धर्म अपनाने का भी दबाव बनाते हैं। मुराद ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में आपबीती सुनाई। हजारों यजीदी महिलाओं की तरह मुराद का एक जिहादी के साथ जबरदस्ती निकाह कराया गया।

इस्लामिक स्टेट एक समय एक बड़े भूभाग पर शासन करने लगा था ।

ईराक, लीबिया और सीरिया के अनेकों तेल कुओं पर उसका कब्जा था जिससे तेल बेचकर इस्लामिक स्टेट रोज करोड़ों का मुनाफ़ा कमाता था और बाकायदा अन्य इस्लामिक देशों की तरह सरिया कानून लागू कर इस्लामिक शासन स्थापित किया था , जिसके समर्थन में पूरी दुनिया से मुसलमान इस्लामिक स्टेट के किये लड़ने रक्का और मोसुल में पहुंचे थे।

वैचारिक, सैनिक सहयोग के साथ करोड़ों रुपये प्रतिदिक मुसलमानों का आर्थिक सहयोग पूरी दुनिया से मोसुल में पहुंचता था

सुन्नी मुसलमानों की पूर्ण सहानुभूति इस्लामिक स्टेट के साथ इसलिए थी क्योंकि सीरिया, लीबिया,ईराक और लेबनान में शिया मुसलमान और यजीदी समुदाय पर इस्लामिक स्टेट क्रूरतम कहर ढा रहे थे

मुराद बताती हैं कि मोसुल में उन्हें एकबार भागने का मौका मिला. वह बागीचे की चहारदिवारी फांदने में सफल रहीं. लेकिन मोसुल की गलियों में भटकते हुए उन्हें जब समझ में नहीं आया कि क्या करें तो उन्होंने एक अनजान घर के दरवाजे की घंटी बजा दी और मदद की गुहार लगाई , घर एक मुसलमान का था उसने मुराद को तत्काल इस्लामिक स्टेट की सेना के हवाले कर दिया । भगाने की कोशिश करने वाली हर लड़की को सजा के रूप में सामूहिक बलात्कार की पीड़ा मिलती है

मुझे छह लड़ाकों की अपनी सेंट्री को सौंप दिया. उन सभी ने मेरे साथ तब तक बलात्कार किया, जब तक मैं होशो-हवास न खो बैठी."

मुराद बताती हैं कि इराक और सीरिया में उन्होंने देखा कि सुन्नी मुस्लिम आम जीवन जीते रहे, जबकि यजीदियों को IS के सारे जुल्म सितम सहने पड़े. मुराद बताती हैं कि हमारे लोगों की हत्याएं होती रहीं, रेप किए जाते रहे और सुन्नी मुस्लिम जुबान बंद किए सब देखते रहे. उन्होंने कुछ नहीं किया.

मुराद ने अपनी पुस्तक 'द लास्ट गर्ल : माई स्टोरी ऑफ कैप्टिविटी एंड माई फाइट अगेंस्ट द इस्लामिक स्टेट' में अपने साथ हुई बर्बरता का दिल दहला देने वाला वर्णन किया है.

ऐसा ही जेहादियों ने पिछले 1400 वर्षों में काफिरों के साथ किया है चाहे वह भारत की नारियों को अरब और अफगान की मंडियों में 2-2 दीनार में बेचना हो या कश्मीर में हिंदु पुरुषों को मारकर उनकी लड़कियों का बलात्कार करना हो

उनके लिए इसमें कुछ भी नया नहीं है।

कल जब भारत में इनकी संख्या बढ़ेगी, ये थोड़े और तागतवर होंगें तब यही हिंदुओं की बहन बेटियों के साथ होगा इसमें शंका न पालना।

जाग सको तो जागो और जगाओ

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