ना नर में कोई राम बचा, नारी में न कोई सीता ,
ना नर में कोई राम बचा,
नारी में न कोई सीता ,
ना धरा बचाने की खातिर विष कोई शंकर पीता है ,
ना श्रीकृष्ण सा धर्म अधर्म का किसी में ज्ञान बचा हैं,
ना हरिश्चंद्र सा सत्य किसी के अंदर रचा बसा हैं,
ना गौतम बुद्ध सा धैर्य बचा,, ना नानक जी सा परम त्याग,
बस नाच रही है नर के भीतर प्रेतिशोध की कुटिल ये आग,
फिर बोलो...........
स्वर्णिम युग का क्या अंश बाकी तुममें ,कि किसकी धुनी में रमकर तुम फूले नही समाते हो,
,तुम स्वयं को श्रेष्ठ बताते हो ?.....
मानवता जीवन में कोई भी पराया नहीं होता ये केवल मन का वहम है भरोसा रुका तो मनुष्य पराया साँसे रुकी तो शरीर भी पराया हो जाता है भरोसा और विश्वास एक ही है भरोसा दिलाया जा सकता टूट हुआ विश्वास भी जीता जा सकता है इसलिए मनुष्य से प्रेम करें वस्तु से नहीं वस्तु का उपयोग करें मनुष्य का नहीं
✒️... जिन्होंने आपका संघर्ष देखा है केवल वही आपके सफलता का मूल्य जानते हैं अन्यथा औरों के लिए आपका भाग्य बहुत अच्छा है
"कमाई" की कोई निश्चित परिभाषा नहीं होती "परवाह" करने वाला मित्र "दर्द" समझने वाला पड़ोसी और "सम्मान" करने वाले संबंधी बुरे समय में साथ देने वाला परिवार यह सब कमाई के ही रूप हैं
✍️... जीवन का लक्ष्य सुनाने से अधिक दिखाने योग्य कार्यों पर केंद्रित होना चाहिए
✒️... मनुष्य का सबसे सच्चा साथी उसका स्वास्थ्य है जिस दिन स्वास्थ्य ने साथ छोड़ा मनुष्य प्रत्येक संबंध पर बोझ बन जाता है

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