यह पोस्ट आज से ठीक 5 वर्ष पूर्व का है। आज भी उसी 5 साल पुरानी कसौटी पर पुनः अवलोकन कीजिए।राहुल गांधी के लिए मुसीबतों का दौर बढ़ता जा रहा है। राहुल गांधी एक ऐसे व्यक्ति के रूप में देश की राजनीति में देखे जाते हैं जिन्होंने अभी तक अपनी राजनीतिक परिपक्वता को छुआ नहीं है।
राहुल गांधी के लिए मुसीबतों का दौर बढ़ता जा रहा है। राहुल गांधी एक ऐसे व्यक्ति के रूप में देश की राजनीति में देखे जाते हैं जिन्होंने अभी तक अपनी राजनीतिक परिपक्वता को छुआ नहीं है। उनकी राजनीतिक परिपक्वता के बारे में संदेह आज भी होता है। इस बीच राहुल गांधी के और लोकप्रिय होने की बातें विभिन्न इकोसिस्टम द्वारा किए जाती रही है। यह वह कांग्रेसी इकोसिस्टम है जो कांग्रेस पार्टी ने 70 साल में बनाया है। दुर्भाग्यवश भारतीय जनता पार्टी के पास ऐसा कोई सिस्टम नहीं है। यदि होता तो निश्चित रूप से मान कर चलिए कि नरेंद्र मोदी के सामने परसेप्शन के मामले में कोई टिक ना पाता । वैसे आज भी स्थितियां कुछ ऐसी ही है लेकिन इसके लिए नरेंद्र मोदी को जो जी तोड़ मेहनत करनी पड़ी है वह देश की जनता जानती है।
कांग्रेस पार्टी को एक अमरत्व प्राप्त है। अमरत्व का मतलब देश में स्थितियां चाहे जो भी हो कांग्रेस पार्टी कभी दोषी नहीं रही। जब देश में महंगाई बढ़ी तो कहां गया कि महंगाई बढ़ गई है। वहां कांग्रेस को दोष नहीं दिया गया। उसकी नीतियों का बात नहीं हुई। जब देश में आतंकवादी हमला हुआ तो यह नहीं कहा गया कि कांग्रेस ने देश की सुरक्षा में चूक की। उल्टा यह कहा गया कि देश में आतंकवादी हमला हो गया। यानी हर प्रकार से कांग्रेस पार्टी का इकोसिस्टम उसको बचाता ही आया है। पिछले 5 साल में इस इकोसिस्टम की पोल खुली है। यही कारण है कि आज राहुल गांधी देश के गृह मंत्रालय को अपना जवाब सत्यापित करेंगे।
■ राहुल गांधी पर नई मुसीबत :
भारतीय राजनीति में आज वह क्षण आया जब देश में सर्वाधिक समय के लिए राज करने वाली पार्टी के अध्यक्ष राहुल गांधी को गृह मंत्रालय की तरफ से नोटिस गया। यह नोटिस उनकी नागरिकता को लेकर था। इस नोटिस में स्पष्ट रूप से राहुल गांधी से जवाब मांगा गया है कि आखिर उनकी नागरिकता के विषय में इतने सवाल क्यों उठ रहे हैं। इसके पीछे गृह मंत्रालय ने कुछ तथ्य भी सामने रखे हैं। यह तथ्य सुब्रमण्यम स्वामी द्वारा दिए गए हैं। गृह मंत्रालय ने कथित तौर पर कुछ सप्ताह पहले हुए नागरिकता विवाद को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को नोटिस जारी किया था। गृह मंत्रालय ने ब्रिटिश कंपनी बैकऑप्स के दस्तावेजों का हवाला दिया है जहां राहुल गांधी ने रिटर्न दाखिल किया है और उन्हें उसमें एक ब्रिटिश नागरिक जैसा कहा गया है। 10 दिनों के भीतर उनसे जवाब मांगा गया है। गृह मंत्रालय ने अपने नोटिस में राहुल गांधी को नोटिस की प्राप्ति के एक पखवाड़े के भीतर मंत्रालय को इस मामले में तथ्यात्मक स्थिति के बारे में बताने के लिए कहा है।
@ANI
Ministry of Home Affairs issues notice to Congress President Rahul Gandhi over his citizenship after receiving a complaint from Rajya Sabha MP Dr Subramanian Swamy; MHA asks Rahul Gandhi to respond in the matter within a 'fortnight'.
अब राहुल गांधी की बड़ी मुसीबत यह है कि वह अपने राजनीतिक जीवन को बचाने के लिए क्या अपनी नागरिकता को साबित कर पाएंगे। एक ही व्यक्ति की नागरिकता को लेकर हर तरफ से उठ रहे सवाल किसी न किसी तथ्य पर आधारित होंगे ही। यह राहुल गांधी के लिए एक अच्छी खबर नहीं होगी। पिछले कुछ महीने राहुल गांधी के लिए बढ़िया नहीं रहे है क्योंकि उनकी नागरिकता को लेकर सवाल हमेशा से ही राजनीतिक गलियारों में होते रहे हैं। अगर वह अपने राजनैतिक जीवन को बचाना चाहते हैं तो उन्हें अपनी नागरिकता को सिद्ध करना पड़ेगा। अगर वह इसमें कामयाब नहीं रहते हैं तो उनका चुनाव लड़ना भी निरस्त किया जा सकता है। यह कांग्रेस और उसके भविष्य के लिए एक अच्छी खबर नहीं होगी।
■ नागरिकता का भंडाफोड़ :
यह नोटिस भाजपा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी के एक प्रतिनिधित्व पर आधारित है जिसमें उन्होंने कहा है कि बैकप्स लिमिटेड नामक एक कंपनी यूनाइटेड किंगडम में वर्ष 2003 में पंजीकृत हुई थी। नोटिस में कहा गया है कि राहुल गांधी उक्त कंपनी के निदेशक और सचिव थे। नोटिस में यह भी कहा गया है कि 10 अक्टूबर 2005 और 31 अक्टूबर 2009 को दायर कंपनी एनुअल रिटर्न में राहुल गांधी ने अपनी राष्ट्रीयता का उल्लेख ब्रिटिश के रूप में किया था। अमेठी से राहुल गांधी के चुनावी हलफनामे के बारे में चुनाव आयोग में प्रतिनिधित्व किए जाने पर नागरिकता का मामला भी उठा था। उस शिकायत को यह कहते हुए निपटा दिया गया कि यह गृह मंत्रालय का डोमेन है न कि चुनाव आयोग का।
Subramanian Swamy
✔
@Swamy39
Has MHA issued Notice on my Complaint to Buddhu on his British Citizenship today?
■ पहले भी नागरिकता सन्देह में रही है :
ऐसा नहीं है कि इससे पहले राहुल गांधी की नागरिकता को लेकर सवाल नहीं किए गए हैं। वायनाड से राहुल गांधी की नागरिकता को लेकर सवाल किए गए हैं। वायनाड में कांग्रेस के खिलाफ लड़ रहे वामपंथी दल के प्रत्याशी ने राहुल गांधी की नागरिकता को लेकर सवाल किए थे। हालांकि चुनाव आयोग ने उनके नामांकन को सही ठहराया था लेकिन बैकअप्स लिमिटेड के साथ राहुल गांधी के जुड़ाव को देखते हुए ऐसा प्रतीत होता है कि दाल में कुछ काला जरूर है। हमेशा की तरह कांग्रेस को बचाते हुए रणदीप सुरजेवाला ने यह कहा है कि भारतीय जनता पार्टी अपनी नाकामियों से भागने के लिए इस प्रकार के मनगढ़ंत आरोप गढ़ रही है। वह यह जान ले कि वह कि वह सफल नहीं होने वाली। दुनिया जानती है कि राहुल गांधी जन्मजात भारतीय हैं भारतीय हैं। चाहे जो भी हो लेकिन राहुल गांधी की मुसीबतें बढ़ती हुई अवश्य प्रतीत होती हैं।
■ IRC विश्लेषण :
झूठ की बुनियाद पर चलाई जा रही राहुल गांधी की राजनीति राजनीति हमेशा ही संदेह के घेरे में रही है। राहुल गांधी एक परिपक्व नेता के रूप में इसलिए नहीं आ पा रहे हैं क्योंकि उन्हें येन केन प्रकारेण अपने को दूसरे से बेहतर सिद्ध करने का लालच लगा रहता है। राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता अपनी जगह सही है लेकिन आप राजनीति में अपने प्रतिद्वंदी को फंसाने के लिए जब झूठ का सहारा लेने लगते हैं तब वहां से दिक्कतें बढ़नी शुरू होती हैं हैं। इसमें आप हर मर्यादा को भूल जाते हैं और यही आप के के पतन का कारण बनती है। राहुल गांधी का राजनीतिक पतन भी अब शुरू हो चुका है। पूर्व काल में उनके और उनकी पार्टी द्वारा किए गए कारनामे अब जनता जनता के समक्ष आ रहे हैं। देखना यह होगा कि कांग्रेस पार्टी अब किस प्रकार से राहुल गांधी को बचाती है।
आज ऐसे नेता के साथ कौन खड़ा रहना चाहेगा,लोग साथ नही छोड़ेंगे तो उनके पास विकल्प ही क्या है??
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