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300 वर्ष तक भारत के बड़े भूभाग पर राज करने वाले होलकर की जाति से आने वाले धनगर और सिंधिया के कुनबे वाले आज पिछड़े हैं।वहीं उन महाराजा विक्रमादित्य हेमराज तेली के वंशज आज पिछड़े हैं जिन्होंने अखंड भारत पर राज किया..!वह मौर्य साम्राज्य आज पिछड़ा/दलित है, जिनके वंशजों ने पीढ़ियों तक बंगाल की खाड़ी से लेकर पर्शिया की सीमा तक अखंड भारतवर्ष पर राज किया।महापद्मनंद और धनानंद का वंशज नाई समुदाय आज पिछड़ा है। जो भारत के सबसे शक्तिशाली राजे होते थे !हिंदुओं के सबसे पवित्र ग्रंथ रामायण के रचियता महर्षि वाल्मीकि के वंशज आज अछूत कैसे हो गए या हो सकते हैं!महर्षि वेद व्यास की माता व मछुआरा समुदाय से आने वाली रानी सत्यवती के वंशज भी आज पिछड़े हैं। जिनके बच्चे हस्तिनापुर पर राज करने वाले कौरव और पांडव अखंड भारत के सबसे महान योद्धा और चक्रवर्ती सम्राट थे।उस आदिवासी कन्या शकुंतला का समुदाय भी आज अनुसूचित जनजाति में काउंट होता है जिनके पुत्र "भरत" के नाम पर इस देश का नाम भारत पड़ा।महर्षि वेद व्यास, महर्षि वाल्मीकि, आचार्य विदुर, सम्राट चंद्रगुप्त, सम्राट अशोक जैसे और भी अनेका अनेक उदाहरण हैं.... जिनके वंशज/स्वजातीय लोग आज स्वयं को अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़ा वर्ग का बताकर अपने साथ शोषण, दमन और अत्याचार हुआ बताते हैं।अब सवाल ये उठता है कि...क्या इतने लंबे समय तक राज करने वाले इन वर्गों के राजाओं ने अपनी ही जात, बिरादरी वालों पर स्वयं ही अत्याचार किया/होने दिया या उन को पढ़ने/बढ़ने नही दिया !! उन्हें हजारो वर्षों से अनपढ़, गंवार व शोषित बनाये रखा !!भगवान कृष्ण के वंशज होने का दावा करने वाले, आज भी बड़ी बड़ी जमीन जायदाद वाले, हर तरह से संपन्न यदुवंशी अंततः पिछड़े कैसे हो गए !!मध्य काल में बहराइच से नेपाल तक बड़े भूभाग पर राज करने वाले पासी आखिर दलित कैसे हो गए !!मध्यकाल में प्रसिद्ध पाल वंशी राजाओं के वंशज कैसे पिछड़े हो गए !!इतिहास में चंवर वंशी राजाओं का जिक्र है जो आज दलित कहे जाते हैं।गौर, गुर्जर, मीणा, जाट, वर्मा, गोंड आदि वर्ग के राजा सब बड़े लम्बे समय तक शासक रहे हैं। देश के इतिहास में इनकी छाप है। लेकिन ऐसा क्या हुआ कि मुगल आक्रांताओं के शासन काल व उसके बाद अंग्रेजी शासन काल की गुलामी के बाद ये सारे वर्ग विभाजित होकर वंचित, शोषित और पीड़ित कहलाने लगे.... क्या किसी ने यह विचार किया कि कहीं विदेशी आक्रांताओं ने ही हिंदू सनातन समाज में फूट डालने के लिए ये अंकुरण तो नहीं किया?परतंत्रता से निकलने के बाद भी विभाजन की दोधारी तलवार से समस्त हिंदु समाज को काटने की रणनीति के चलते ही 1947 के बाद इस विभाजन को और गहरा ही किया गया।अन्यथा यह

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300 वर्ष तक भारत के बड़े भूभाग पर राज करने वाले होलकर की जाति से आने वाले धनगर और सिंधिया के कुनबे वाले आज पिछड़े हैं। वहीं उन महाराजा विक्रमादित्य हेमराज तेली के वंशज आज पिछड़े हैं जिन्होंने अखंड भारत पर राज किया..! वह मौर्य साम्राज्य आज पिछड़ा/दलित है, जिनके वंशजों ने पीढ़ियों तक बंगाल की खाड़ी से लेकर पर्शिया की सीमा तक अखंड भारतवर्ष पर राज किया। महापद्मनंद और धनानंद का वंशज नाई समुदाय आज पिछड़ा है। जो भारत के सबसे शक्तिशाली राजे होते थे ! हिंदुओं के सबसे पवित्र ग्रंथ रामायण के रचियता महर्षि वाल्मीकि के वंशज आज अछूत कैसे हो गए या हो सकते हैं! महर्षि वेद व्यास की माता व मछुआरा समुदाय से आने वाली रानी सत्यवती के वंशज भी आज पिछड़े हैं। जिनके बच्चे हस्तिनापुर पर राज करने वाले कौरव और पांडव अखंड भारत के सबसे महान योद्धा और चक्रवर्ती सम्राट थे। उस आदिवासी कन्या शकुंतला का समुदाय भी आज अनुसूचित जनजाति में काउंट होता है जिनके पुत्र "भरत" के नाम पर इस देश का नाम भारत पड़ा। महर्षि वेद व्यास, महर्षि वाल्मीकि, आचार्य विदुर, सम्राट चंद्रगुप्त, सम्राट अशोक जैसे और भी अनेका अन...

सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में कहा कि सोनम वांगचुक राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा हैं। वह लद्दाख को नेपाल या बांग्लादेश जैसा बनाना चाहते हैं। ऐसे व्यक्ति को और जहर उगलने की इजाजत नहीं दी जा सकती। जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस प्रसन्ना बी वराले की बैंच लद्दाख हिंसा मामले में एक्टिविस्ट वांगचुक की गिरफ्तारी के खिलाफ याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इस दौरान केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि वांगचुक के भाषण में राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा सीधा खतरा दिखता है।जिला मजिस्ट्रेट ने हालात को देखते हुए गिरफ्तारी का सही फैसला लिया। मेहता ने कहा कि नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे उदाहरण देना, युवाओं को भडक़ाने और देश की एकता के खिलाफ माहौल बनाने के बराबर है। यह राष्ट्रीय सुरक्षा पर खतरे के लिए पर्याप्त आधार है। मामले की सुनवाई अब मंगलवार को दोपहर दो बजे फिर होगी। दरअसल 24 सितंबर, 2025 को लेह में हिंसा भडक़ाने के आरोप में 26 सितंबर को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) के तहत वांगचुक को पुलिस ने हिरासत में लिया गया था। तब से वह जोधपुर जेल में हैं।

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केंद्र सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में कहा कि सोनम वांगचुक राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा हैं। वह लद्दाख को नेपाल या बांग्लादेश जैसा बनाना चाहते हैं। ऐसे व्यक्ति को और जहर उगलने की इजाजत नहीं दी जा सकती। जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस प्रसन्ना बी वराले की बैंच लद्दाख हिंसा मामले में एक्टिविस्ट वांगचुक की गिरफ्तारी के खिलाफ याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इस दौरान केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि वांगचुक के भाषण में राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा सीधा खतरा दिखता है। जिला मजिस्ट्रेट ने हालात को देखते हुए गिरफ्तारी का सही फैसला लिया। मेहता ने कहा कि नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे उदाहरण देना, युवाओं को भडक़ाने और देश की एकता के खिलाफ माहौल बनाने के बराबर है। यह राष्ट्रीय सुरक्षा पर खतरे के लिए पर्याप्त आधार है। मामले की सुनवाई अब मंगलवार को दोपहर दो बजे फिर होगी। दरअसल 24 सितंबर, 2025 को लेह में हिंसा भडक़ाने के आरोप में 26 सितंबर को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) के तहत वांगचुक को पुलिस ने हिरासत में लिया गया था। तब से वह जोधपुर जेल में हैं।  दिव्य हिमा...

#भिंडरावाला को संत बनाने वाली #इंदिरा खालिस्तान के कारण नहीं मरी"इतिहास के पन्नों में दर्ज है कि इंदिरा गाँधी, #करपात्री जी महाराज के पास पीएम बनने का आशीर्वाद लेने गई थी, क्योंकि करपात्री जी महाराज का आशीर्वाद कभी निष्फल नहीं जाता था। तब करपात्री जी ने इस शर्त पर आशीर्वाद दिया था कि पीएम बनते ही सबसे पहले गौ हत्या के विरुद्ध कानून बना कर गौ हत्या बंद करनी होगी, इंदिरा जी ने वादा किया कि PM बनने पर पहला काम यही करूंगी।करपात्री जी महाराज के आशीर्वाद से इंदिरा गाँधी पीएम बनी। इसके करीब दो महीने बाद करपात्री जी महाराज इंदिरा जी से मिले और उनका वादा याद दिला कर गौ हत्या के विरुद्ध कानून बनाने के लिए कहा तो इंदिरा जी ने कहा कि महाराज जी अभी तो मैं नई नई हूँ, कुछ समय दीजिए। कुछ समय बाद करपात्री जी फिर गए और कानून की मांग की लेकिन इंदिरा ने फिर टाल दिया।कई बार मिलने और वादा याद दिलाने के बाद भी जब इंदिरा ने गौ हत्या बंद नहीं की, कानून नहीं बनाया तो 7 नवम्बर 1966, उस दिन कार्तिक मास, शुक्‍ल पक्ष की अष्‍टमी तिथि थी, जिसे हम-आप #गोपाष्‍ठमी# नाम से जानते हैं, को देश का संत समाज, शंकराचार्य, अपने छत्र आदि छोड़ कर पैदल ही, ने आम जनता के साथ, गायों को आगे आगे करके संसद कूच किया, करपात्री जी महाराज के नेतृत्व में जगन्नाथपुरी, ज्योतिष पीठ व द्वारका पीठ के शंकराचार्य, वल्लभ संप्रदाय के सातों पीठों के पीठाधिपति, रामानुज संप्रदाय, मध्व संप्रदाय, रामानंदाचार्य, आर्य समाज, नाथ संप्रदाय, जैन, बौद्ध व सिख समाज के प्रतिनिधि, सिखों के निहंग व हजारों की संख्या में मौजूद नागा साधुओं को पंडित लक्ष्मीनारायण जी चंदन तिलक लगाकर विदा कर रहे थे। #लालकिला मैदान से आरंभ होकर नई सड़क व चावड़ी बाजार से होते हुए पटेल चौक के पास से संसद भवन पहुंचने के लिए इस विशाल जुलूस ने पैदल चलना आरंभ किया। रास्ते में अपने घरों से लोग फूलों की वर्षा कर रहे थे। हर गली फूलों का बिछौना बन गया था।यह हिंदू समाज के लिए सबसे बड़ा ऐतिहासिक दिन था। इतने विवाद और अहं की लड़ाई होते हुए भी सभी शंकराचार्य और पीठाधिपतियों ने अपने छत्र, सिंहासन आदि का त्याग किया और पैदल चलते हुए संसद भवन के पास मंच पर समान कतार में बैठे। उसके बाद से आज तक ऐसा कभी नहीं हुआ। नई दिल्ली का पूरा इलाका लोगों की भीड़ से भरा था। संसद गेट से लेकर चांदनी चौक तक सिर ही सिर दिखाई दे रहा था। कम से कम 10 लाख लोगों की भीड़ जुटी थी, जिसमें 10 से 20 हजार तो केवल महिलाएं ही शामिल थीं।#जम्मू-कश्मीर से लेकर केरल तक के लोग गो हत्या बंद कराने के लिए कानून बनाने की मांग लेकर संसद के समक्ष जुटे थे। उस वक्त इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री थी और गुलजारी लाल नंदा गृहमंत्री थे।इस सिंहनाद को देख कर इंदिरा ने सत्ता के मद में चूर होकर संतों, साधुओं, गायों और जनता पर अंधाधुंध गोलियों की बारिश

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#भिंडरावाला को संत बनाने वाली #इंदिरा खालिस्तान के कारण नहीं मरी" इतिहास के पन्नों में दर्ज है कि इंदिरा गाँधी, #करपात्री जी महाराज के पास पीएम बनने का आशीर्वाद लेने गई थी, क्योंकि करपात्री जी महाराज का आशीर्वाद कभी निष्फल नहीं जाता था।  तब करपात्री जी ने इस शर्त पर आशीर्वाद दिया था कि पीएम बनते ही सबसे पहले गौ हत्या के विरुद्ध कानून बना कर गौ हत्या बंद करनी होगी,  इंदिरा जी ने वादा किया कि PM बनने पर पहला काम यही करूंगी। करपात्री जी महाराज के आशीर्वाद से इंदिरा गाँधी पीएम बनी।  इसके करीब दो महीने बाद करपात्री जी महाराज इंदिरा जी से मिले और उनका वादा याद दिला कर गौ हत्या के विरुद्ध कानून बनाने के लिए कहा तो इंदिरा जी ने कहा कि महाराज जी अभी तो मैं नई नई हूँ, कुछ समय दीजिए। कुछ समय बाद करपात्री जी फिर गए और कानून की मांग की लेकिन इंदिरा ने फिर टाल दिया। कई बार मिलने और वादा याद दिलाने के बाद भी जब इंदिरा ने गौ हत्या बंद नहीं की, कानून नहीं बनाया तो 7 नवम्बर 1966, उस दिन कार्तिक मास, शुक्‍ल पक्ष की अष्‍टमी तिथि थी, जिसे हम-आप  #गोपाष्‍ठमी# नाम से जानते हैं,...

प्रोपेगेंडा है।Jawaharlal Nehru ने AIIMS नहीं बनाया।AIIMS Rajkumari Amrit Kaur की वजह से अस्तित्व में आया।AIIMS इसलिए बना क्योंकि एक महिला नेज़मीन दी, पैसा जुटाया, सिस्टम से लड़ी और काम करवा कर दिखाया—जबकि कांग्रेस देखती रही और बाद में ब्रांडिंग कर गई।वह ज़मीन, जिसका ज़िक्र कभी नहीं होताAIIMS दिल्ली, अंसारी नगर की लगभग 190 एकड़ की कीमती ज़मीन पर खड़ा है।यह ज़मीन:न सरकार ने खरीदीन अधिग्रहित कीयह राजकुमारी अमृत कौर की पारिवारिक संपत्ति थी—जो उन्होंने दान में दी।आज के मूल्य पर यह ज़मीन हज़ारों-हज़ार करोड़ रुपये की है।कांग्रेस ने इस पर एक रुपया भी खर्च नहीं किया।वह पैसा, जो नेहरू के पास नहीं थाआज़ादी के बाद भारत आर्थिक रूप से टूटा हुआ था।कांग्रेस के पास न संसाधन थे, न तैयारी—सिर्फ़ नारे थे।तब अमृत कौर ने:न्यूज़ीलैंड से विदेशी सहायता जुटाईअंतरराष्ट्रीय मेडिकल सहयोग लायाउपकरण, प्रशिक्षण और विशेषज्ञता की व्यवस्था कीअगर कांग्रेस सक्षम होती, तो विदेशी मदद की ज़रूरत ही क्यों पड़ती?वह क़ानून, जिसे कांग्रेस टालती रहीAIIMS अधिनियम, 1956नेहरू की तत्परता से नहीं,अमृत कौर के लगातार दबाव से पास हुआ।उन्होंने लड़ाई लड़ी:अफ़सरशाही की सुस्ती सेमंत्रिमंडल

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एक महिला ने AIIMS बनाया। कांग्रेस ने उनका नाम मिटा दिया। नेहरू ने श्रेय ले लिया। AIIMS राजकुमारी अमृत कौर ने बनाया। इतिहास की किताबें लिखती हैं— “नेहरू ने AIIMS बनाया”। यह पंक्ति इतिहास नहीं, प्रोपेगेंडा है। Jawaharlal Nehru ने AIIMS नहीं बनाया। AIIMS Rajkumari Amrit Kaur की वजह से अस्तित्व में आया। AIIMS इसलिए बना क्योंकि एक महिला ने ज़मीन दी, पैसा जुटाया, सिस्टम से लड़ी और काम करवा कर दिखाया— जबकि कांग्रेस देखती रही और बाद में ब्रांडिंग कर गई। वह ज़मीन, जिसका ज़िक्र कभी नहीं होता AIIMS दिल्ली, अंसारी नगर की लगभग 190 एकड़ की कीमती ज़मीन पर खड़ा है। यह ज़मीन: न सरकार ने खरीदी न अधिग्रहित की यह राजकुमारी अमृत कौर की पारिवारिक संपत्ति थी— जो उन्होंने दान में दी। आज के मूल्य पर यह ज़मीन हज़ारों-हज़ार करोड़ रुपये की है। कांग्रेस ने इस पर एक रुपया भी खर्च नहीं किया। वह पैसा, जो नेहरू के पास नहीं था आज़ादी के बाद भारत आर्थिक रूप से टूटा हुआ था। कांग्रेस के पास न संसाधन थे, न तैयारी—सिर्फ़ नारे थे। तब अमृत कौर ने: न्यूज़ीलैंड से विदेशी सहायता जुटाई अंतरराष्ट्रीय मेडिकल सहयोग लाया उपकरण, प्रशि...

नशे में चूर, हिंसा की भूख से पागल,AK-47 और RPG उठाएदो हज़ार से ज़्यादा हत्यारेएक गांव की ओर बढ़ रहे थे…उस गांव मेंतीस हज़ार निहत्थे लोग थे—मांएं, बच्चे, बुज़ुर्गजिन्हें मौत बस एक कदम दूर से घूर रही थी।और उन 30,000 जिंदगियों और कत्लेआम के बीचसिर्फ़ 40 भारतीय सैनिकचट्टान की तरह खड़े थे।बाक़ी मदद रास्ते में थी,पर रास्ते काट दिए गए थे।चारों तरफ़ दुश्मन,पीछे हटने का कोई विकल्प नहीं।यह कोई फ़िल्मी दृश्य नहीं था।यह भारतीय सेना की वह गाथा थीजो शोर नहीं करती—सीधे इतिहास में उतरती है।यह कहानी हैदक्षिण सूडान के मलाकाल की।जहाँ संयुक्त राष्ट्र की शांति चौकीअचानक“व्हाइट आर्मी” नाम केनरसंहार के इरादे से आए विद्रोहियों से घिर गई।गांव वालों को लगा—अब सब खत्म है।लेकिन वे भूल गए थेकि उनके गांव के दरवाज़े परकौन खड़ा है।भारतीय सेना।इस टुकड़ी का नेतृत्व कर रहे थेमेजर समर तूर(8 राजपूताना राइफल्स)जब हालात देखकरकई पीसकीपिंग दस्ते डगमगा गए,तब समर तूर आगे बढ़े—और नेतृत्व को आदेश नहीं,उदाहरण बना दिया।व्हाइट आर्मी ने झुंड बनाकरचौकी को रौंदने की कोशिश की।उनका भरोसा संख्या पर था—घमंड हथियारों पर।पर उन्हें नहीं पता थाकि सामनेरणनीति खड़ी है।72 घंटे।लगातार।भारतीय सैनिकों ने ऐसा जवाब दियाकि 2,000 की भीड़अपने ही साए से डरने लगी।यह सिर्फ़ गोलीबारी नहीं थी—यह दिमाग़ की जंग थी।भारतीय स्नाइपर्स ने800 मीटर दूर सेविद्रोही कमांडरों कोएक-एक कर खामोश करना शुरू किया।दुश्मन को समझ ही नहीं आया—गोली कहां से आ रही है,कमान कौन संभाले,और अब भागें या लड़ें?मेजर तूर की बनाई रणनीति नेउनकी कमान भी तोड़ीऔर मनोबल भी।जब उग्र भीड़ नेघेरा तोड़ने की कोशिश की,तब BMP-2 बख़्तरबंद वाहनआगे बढ़ेऔर दुश्मन का रास्ताउसी पर बंद कर दिया।नतीजा साफ़ था—2,000 हारे।40 जीते।अनुशासन नेअराजकता को कुचल दिया।व्हाइट आर्मीपीछे नहीं हटी—वो हथियार छोड़कर भागी।मलाकाल बच गया।हज़ारों जिंदगियां बच गईं।इस अद्वितीय नेतृत्व और साहस के लिएमेजर समर तूर कोशौर्य चक्र से सम्मानित किया गया।उन्होंने साबित कर दिया—भारतीय सैनिक के लिएसीमा नहीं,कर्तव्य सर्वोपरि होता है।लेकिन यह विजयबलिदान के बिना नहीं आई।लेफ्टिनेंट कर्नल महिपाल सिंह(9 मैकेनाइज़्ड इन्फैंट्री)घात में फंसे BMP काफ़िले कोखुद लीड करते हुए आगे बढ़ेताकि भारतीय घेरा न टूटे।छाती में गोलियां लगीं,पर बंदूक नहीं गिरी।आख़िरी सांस तकजवाबी फायर करते रहे।सूबेदार धर्मेश सांगवानऔरसूबेदार कुमार पाल सिंहअकोबो में2,000 की उग्र भीड़ के सामनेडटकर खड़े रहे !

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नशे में चूर, हिंसा की भूख से पागल, AK-47 और RPG उठाए दो हज़ार से ज़्यादा हत्यारे एक गांव की ओर बढ़ रहे थे… उस गांव में तीस हज़ार निहत्थे लोग थे— मांएं, बच्चे, बुज़ुर्ग जिन्हें मौत बस एक कदम दूर से घूर रही थी। और उन 30,000 जिंदगियों और कत्लेआम के बीच सिर्फ़ 40 भारतीय सैनिक चट्टान की तरह खड़े थे। बाक़ी मदद रास्ते में थी, पर रास्ते काट दिए गए थे। चारों तरफ़ दुश्मन, पीछे हटने का कोई विकल्प नहीं। यह कोई फ़िल्मी दृश्य नहीं था। यह भारतीय सेना की वह गाथा थी जो शोर नहीं करती— सीधे इतिहास में उतरती है। यह कहानी है दक्षिण सूडान के मलाकाल की। जहाँ संयुक्त राष्ट्र की शांति चौकी अचानक “व्हाइट आर्मी” नाम के नरसंहार के इरादे से आए विद्रोहियों से घिर गई। गांव वालों को लगा— अब सब खत्म है। लेकिन वे भूल गए थे कि उनके गांव के दरवाज़े पर कौन खड़ा है। भारतीय सेना। इस टुकड़ी का नेतृत्व कर रहे थे मेजर समर तूर (8 राजपूताना राइफल्स) जब हालात देखकर कई पीसकीपिंग दस्ते डगमगा गए, तब समर तूर आगे बढ़े— और नेतृत्व को आदेश नहीं, उदाहरण बना दिया। व्हाइट आर्मी ने झुंड बनाकर चौकी को रौंदने की कोशिश की। उनका भरो...

एक थे राघव राम कौल काश्मीरी ब्राह्मण, जिनको गौ मांस खिला कर मुसलमान बनाया गया था! इनके पुत्र का नाम शेख इब्राहीम था। शेख इब्राहीम के पुत्र का नाम शेख अब्दुल्ला! शेख अब्दूल्ला के पुत्र का नाम फारुक अब्दूल्ला... फारुक अब्दूल्ला के पुत्र है उमर अब्दूल्ला।है राघव राम कौल का अब्दूल्ला परिवार। जब तक इनकी ताकत थी कश्मीर में इन्होंने भी लोगों

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एक थे राघव राम कौल काश्मीरी ब्राह्मण, जिनको गौ मांस खिला कर मुसलमान बनाया गया था!   इनके पुत्र का नाम शेख इब्राहीम था। शेख इब्राहीम के पुत्र का नाम शेख अब्दुल्ला!  शेख अब्दूल्ला के पुत्र का नाम फारुक अब्दूल्ला... फारुक अब्दूल्ला के पुत्र है  उमर अब्दूल्ला। है राघव राम कौल का अब्दूल्ला परिवार।  जब तक इनकी ताकत थी कश्मीर में इन्होंने भी लोगों के साथ वही व्यवहार किया है, वही नैरेटिव चल रहा था, डोगरा सिंधी कश्मीरी पंडित बाल्मीकि समाज, सब के मांस को नोच नोच कर खाया, पलायन हत्या से भरा काश्मीर के इतिहास का 70 साल। एक थे चितपावन ब्राह्मण जिनका नाम तुलसीराम था!  उन्होंने टीपू सुल्तान से बचने के लिए इस्लाम कुबूल कर लिया था और अपने गांव ओवैस को उन्होंने अपना सरनेम ओवैसी बना लिया!  उन्ही तुलसीराम के पुत्र का नाम अब्दुल वाहिद ओवैसी था! अब्दूल वाहिद के पुत्र का नाम सुल्तान ओवैसी था! सुल्तान ओवैसी के पुत्र का नाम सलाहुद्दीन ओवैसी था!  सलाहुद्दीन ओवैसी के पुत्र का नाम असद्दुदीन ओवैसी और अकबरूद्दीन ओवैसी। और विडंबना देखिये कि ओवैशी ब्रदर जिस गोडसे से घृणा करते है...

बेटियों के बलात्कारियों से जब माँ ने कहा "अब्दुल अली एक-एक करके करो, नहीं तो वो मर जाएंगी "।ये सच्ची घटना घटित हुई थी 8 अक्टूबर 2001 को बांग्लादेश में।अनिल चंद्र और उनका परिवार 2 बेटीयों पूर्णिमा व 6 वर्षीय छोटी बेटी के साथ बांग्लादेश के सिराजगंज में रहता था। उनके पास जीने खाने और रहने के लिए पर्याप्त जमीन थी. बस एक गलती उनसे हो गयी, और ये गलती थी एक हिंदु होकर 14 साल व 6 साल की बेटी के साथ बांग्लादेश में रहना। एक क़ाफिर के पास इतनी जमीन कैसे रह सकती है..? यही सवाल था बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिद ज़िया के पार्टी से सम्बंधित कुछ उन्मादी लोगों का।8 अक्टूबर के दिनअब्दुल अली, अल्ताफ हुसैन, हुसैन अली, अब्दुर रउफ, यासीन अली, लिटन शेख और 5 अन्य लोगों ने अनिल चंद्र के घर पर धावा बोल दिया, अनिल चंद्र को मारकर डंडो से बाँध दिया, और उनको काफ़िर कहकर गालियां देने लगे। इसके बाद ये शैतान माँ के सामने ही उस १४ साल की निर्दोष बच्ची पर टूट पड़े और उस वक्त जो शब्द उस बेबस लाचार मां के मुँह से निकले वो पूरी इंसानियत को झंकझोर देने वाले हैं।अपनी बेटी के साथ होते इस अत्याचार को देखकर उसने कहा "अब्दुल अली, एक एक करके करो, नहीं तो मर जाएगी, वो सिर्फ १४ साल की है।"वो यहीं नहीं रुके उन माँ बाप के सामने उनकी छोटी 6 वर्षीय बेटी का भी सभी ने मिलकर ब#लात्कार किया ....

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बेटियों के बलात्कारियों से जब माँ ने कहा "अब्दुल अली एक-एक करके करो, नहीं तो वो मर जाएंगी "। ये सच्ची घटना घटित हुई थी 8 अक्टूबर 2001 को बांग्लादेश में। अनिल चंद्र और उनका परिवार 2 बेटीयों पूर्णिमा व 6 वर्षीय छोटी बेटी के साथ बांग्लादेश के सिराजगंज में रहता था। उनके पास जीने खाने और रहने के लिए पर्याप्त जमीन थी. बस एक गलती उनसे हो गयी, और ये गलती थी एक हिंदु होकर 14 साल व 6 साल की बेटी के साथ बांग्लादेश में रहना। एक क़ाफिर के पास इतनी जमीन कैसे रह सकती है..? यही सवाल था बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिद ज़िया के पार्टी से सम्बंधित कुछ उन्मादी लोगों का। 8 अक्टूबर के दिन अब्दुल अली, अल्ताफ हुसैन, हुसैन अली, अब्दुर रउफ, यासीन अली, लिटन शेख और 5 अन्य लोगों ने अनिल चंद्र के घर पर धावा बोल दिया, अनिल चंद्र को मारकर डंडो से बाँध दिया, और उनको काफ़िर कहकर गालियां देने लगे।   इसके बाद ये शैतान माँ के सामने ही उस १४ साल की निर्दोष बच्ची पर टूट पड़े और उस वक्त जो शब्द उस बेबस लाचार मां के मुँह से निकले वो पूरी इंसानियत को झंकझोर देने वाले हैं। अपनी बेटी के साथ होते इस अत्य...

इस पोस्ट के बाद आप कहेंगे कि बदला लो तो ऐसे लो वरना मत लो, जब हिनू को क्रोध आता है तो ना बसे जलती है ना ही देश विरोधी नारे लगते है बस ज्वालामुखी फटता है और उसका लावा सबकुछ जला डालता है। जब हिनू प्रतिशोध लेता है तो क्या होता है,,,,,? एक झांकी देखिये।बात 1761 की है पानीपत का युद्ध समाप्त हो चुका था, एक लाख मराठे मारे गए थे। इस युद्ध मे सबसे ज्यादा नुकसान पेशवा वंश का हुआ था क्योकि उसके उत्तराधिकारी विश्वास राव वीरगति को प्राप्त हुए थे। मगर एक वंश और था जिसने अपने 4 हीरे खो दिए थे ये थे सिंधिया। पानीपत के युद्ध मे सिंधिया परिवार के 5 लोग लड़े थे जिसमे से 4 शहीद हुए बस एक बच गए महादजी सिंधिया।युद्ध मे महादजी सिंधिया का पैर कट गया था और वे 2 साल तक चल फिर नही पाए। महादजी के भाइयो को बेरहमी से मारा गया था।उत्तर भारत मे अफगानी पठानों का भारी प्रभाव था इनके सरदार नजीब खान ने ही अब्दाली को बुलवाया था और इन सभी पठानों ने Eस्लाम के नाम पर अब्दाली को समर्थन दिया था तथा भारत से गद्दारी की थी। इसलिए महादजी ने प्रण लिया की भारतभूमि पर अब कोई अफगान जिंदा नही बचेगा।1766 में महादजी सिंधिया स्वस्थ होकर पुणे आये, सिंहासन पर बैठे पेशवा माधवराव के सामने अपनी तलवार निकाल कर रख दी और कहा आप बस इसे चलाने का आदेश दे मैं अफगानों के सिर आपके कदमो में रख दूंगा। पेशवा ने उनकी छिपी प्रतिभा को जान लिया, उन्हें अपना सेनापति और ग्वालियर का शासक बनाया।फिर तो क्या था 1767 में महादजी सिंधिया ने यमुना पार की तथा मराठा साम्राज्य का विस्तार शुरू किया। 1771 में उन्होंने फिर से दिल्ली में लाल किले पर भगवा फहरा दिया। दिल्ली में महादजी ने अपनी तलवार हवा में लहरा दी जिसका सीधा अर्थ था जहाँ जो अफगान दिखे उसे मारो। 1766 से ही पठानों की मौत का सिलसिला शुरू हुआ और 1773 तक जारि रहा।मराठो ने चुनचुनकर पानीपत का बदला लिया और 5 लाख पठानों का कत्लेआम कर दिया। नजीब खां की किस्मत अच्छी थी कि वो पहले ही मर गया मगर उसका बेटा दर बदर ठोकर खाता रहा। मराठो का खौफ इतना था कि पठानों को कही शरण भी नही मिली।इसके बाद मराठो ने रुहेलखंड पर हमला किया, हरिद्वार में पठानों ने मंदिर तोड़कर मस्जिदे बना दी थी। मराठो ने फिर से मंदिरों को खड़ा कर दिया तथा यहाँ 1 लाख पठानों को और मारा गया। पठानों की मौत का समाचार

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इस पोस्ट के बाद आप कहेंगे कि बदला लो तो ऐसे लो वरना मत लो, जब हिनू को क्रोध आता है तो ना बसे जलती है ना ही देश विरोधी नारे लगते है बस ज्वालामुखी फटता है और उसका लावा सबकुछ जला डालता है। जब हिनू प्रतिशोध लेता है तो क्या होता है,,,,,?  एक झांकी देखिये। बात 1761 की है पानीपत का युद्ध समाप्त हो चुका था, एक लाख मराठे मारे गए थे। इस युद्ध मे सबसे ज्यादा नुकसान पेशवा वंश का हुआ था क्योकि उसके उत्तराधिकारी विश्वास राव वीरगति को प्राप्त हुए थे। मगर एक वंश और था जिसने अपने 4 हीरे खो दिए थे ये थे सिंधिया। पानीपत के युद्ध मे सिंधिया परिवार के 5 लोग लड़े थे जिसमे से 4 शहीद हुए बस एक बच गए महादजी सिंधिया। युद्ध मे महादजी सिंधिया का पैर कट गया था और वे 2 साल तक चल फिर नही पाए। महादजी के भाइयो को बेरहमी से मारा गया था। उत्तर भारत मे अफगानी पठानों का भारी प्रभाव था इनके सरदार नजीब खान ने ही अब्दाली को बुलवाया था और इन सभी पठानों ने Eस्लाम के नाम पर अब्दाली को समर्थन दिया था तथा भारत से गद्दारी की थी। इसलिए महादजी ने प्रण लिया की भारतभूमि पर अब कोई अफगान जिंदा नही बचेगा। 1766 में महादजी सिंधिया स्वस्...

लाहौर मे 1938 मे इस गली मे हवेलीया बनवाने वाले हिन्दूओ को क्या पता था कि 9 वर्ष बाद ही 1947 यहां से सब कुछ छोडकर भागना पडेगा..?? लाहौर एक दास्तां है जो हिन्दुओ को यह बताती है कि पैसा कमा लेना सबकुछ नही है,,।श्री राम के पुत्र लव द्वारा बसाया गया शहर लाहौर। महाराज रणजीत सिंह के समय लाहौर में वाराणसी से ज्यादा मंदिर और गुरुद्वारे थे। बंटवारे तक व्यापार में अग्रवालों, जाटो और सिखों का डंका बजता था। मगर इन मूर्खो ने सदैव छद्म धर्मनिरपेक्षता बनाये रखी, लाहौर में म्लेच्छ मुसलमानो को अपने यहाँ काम पर रखते गए। उन्ही म्लेच्छ मुसलमानो ने बहुसंख्यक होकर अग्रवालों और सिखों को घसीट घसीट कर मारा।

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लाहौर मे 1938 मे इस गली मे हवेलीया बनवाने वाले हिन्दूओ को क्या पता था कि 9 वर्ष बाद ही 1947 यहां से सब कुछ छोडकर भागना पडेगा..?? लाहौर एक दास्तां है जो हिन्दुओ को यह बताती है कि पैसा कमा लेना सबकुछ नही है,,। श्री राम के पुत्र लव द्वारा बसाया गया शहर लाहौर। महाराज रणजीत सिंह के समय लाहौर में वाराणसी से ज्यादा मंदिर और गुरुद्वारे थे। बंटवारे तक व्यापार में अग्रवालों, जाटो और सिखों का डंका बजता था।  मगर इन मूर्खो ने सदैव छद्म धर्मनिरपेक्षता बनाये रखी, लाहौर में म्लेच्छ मुसलमानो को अपने यहाँ काम पर रखते गए। उन्ही म्लेच्छ मुसलमानो ने बहुसंख्यक होकर अग्रवालों और सिखों को घसीट घसीट कर मारा। ऊंची ऊंची शेखावटी हवेलियां और सरदारों के महल जेहादियो ने कब्जा लिए।  भारत में लाहौर पेशावर मुल्तान ढाका गुजरांवाला मीरपुरखास में बड़ी-बड़ी हवेलिया और बड़ी-बड़ी कोठियां रखने वाले हिंदुओं और सिखों को भी रातों-रात अपना सब कुछ छोड़ कर भागना पड़ा था। हिन्दुओं को रातों रात कराची लाहोर कश्मीर बलोच कांधार छोड़ना पड़ा। हिन्दू वाल्मिकी मेगवार समाज के जो लाहौर रुक गए वे मिटा दिये गये, उनकी बहू बेटियां उठा ...

यह डॉक्टरो के आतंकवादी बनने पर आप अगर आश्चर्यचकित हो रहे हैं तो अमेरिका में बेहद शानदार जिंदगी जीने वाली दुनिया की सर्वोच्च संस्था मैसाच्युसेट्स इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलॉजी से पोस्ट ग्रेजुएट और पीएचडी करके अमेरिका की न्यूक्लियर साइंस विभाग में असिस्टेंट डायरेक्टर की नौकरी करने वाली डॉक्टर आफिया सिद्दीकी अपने 5 बच्चों और पति को छोड़कर आतंकवादी बन गई थीपाकिस्तानी मूल की एक लड़की आफिया सिद्दीकी पढ़ने में बहुत ब्रिलियंट थी आगा खान ट्रस्ट के स्कॉलरशिप पर उसने प्रतिष्ठित MIT से न्यूक्लियर साइंटिस्ट में मास्टर्स डिग्री लिया और फिर आगा खां ट्रस्ट के स्कॉलरशिप पर उसने अमेरिका में ही न्यूरो न्यूक्लियर साइंटिस्ट में पीएचडी किया उसके बाद वह अमेरिका के न्यूक्लियर साइंस विभाग में बड़े पद पर काम करने लगी साथ ही साथ वह अमेरिका की दो यूनिवर्सिटी में पीएचडी और मास्टर्स डिग्री वाले बच्चों को न्यूक्लियर साइंस की प्रैक्टिकल नॉलेज भी पार्ट टाइम में देती थी वह अमेरिका की कुछ चुनिंदा लोगों में से थी जिसे यूरेनियम और कलपुर्जे ले जाने पर कोई रोक-टोक नहीं थाउसका पति भी बहुत बड़ा साइंटिस्ट था उसके 5 बच्चे थे कुछ समय के बाद वह बहुत कट्टर आतंकवादी बनने लगीवह आतंकवादियों को परमाणु बम बनाने की ट्रेनिंग देने के फिराक में थी और उसने अपने घर पर इतना युरेनियम जमा कर लिया था जिससे एक छोटा मोटा परमाणु बम बनाया जा सके इतना ही नहीं वह 9/11 के प्रमुख आतंकी खालिद शेख मोहम्मद के संपर्क में भी थी और उसने तीन आतंकवादियों को अपने घर पर पनाह भी दिया था वह इतनी ज्यादा कट्टरपंथी हो गई थी कि अपने वैज्ञानिक पति को तलाक देकर उसने आतंकी खालिद शेख मोहम्मद के आतंकी भतीजे से दूसरा निकाह कर लिया जबकि वह 5 बच्चों की मां थीवह जब अमेरिका छोड़कर अफगानिस्तान में आतंकवादियों के साथ रहने लगी तब से अमेरिका उसके ऊपर कड़ी नजर रख रहा था वह आतंकवादियों के लिए एक न्यूक्लियर साइंस लैबोरेट्री बना रही थी और जब उसे अमेरिकी मरीन फोर्स ने अफगानिस्तान में गिरफ्तार किया था तब उसने एक अमेरिकी सैनिक का 9 MM पिस्टल छीनकर गोलीबारी करके दो अमेरिकी सैनिकों का कत्ल भी कर दिया था आफिया सिद्दीकी अभी अमेरिका की एक जेल में बंद है वह पिछले कई सालों से जेल में है और अमेरिकी कानून ने उसे जब तक वह जिंदा रहेगी तब तक जेल में रखने का सजा सुनाया हैयहां तक कि उसके कारनामे सुनकर अमेरिका की उस जेल में बंद दूसरी महिला कैदी जो अमेरिकी थी उन्होंने उसकी जमकर कंबल पिटाई भी कर दिया था जेल में उसके ऊपर तीन बार हमले हुए इसीलिए उसे जेल के एक विशेष सेल में रखा गया हैपाकिस्तान उसकी रिहाई के लिए बहुत कोशिश कर रहा हैऔर पाकिस्तान की मूर्खता देखिए ओसामा बिन लादेन का पता लगाने के लिए अमेरिका की सीआईए ने एक पाकिस्तानी डॉक्टर शकील अफरीदी को पैसे देकर इलाके में टीकाकरण कार्यक्रम करवाया था फिर इस टीकाकरण के बहाने ओसामा बिन लादेन और उसके पूरे परिवार का पता चला था पाकिस्तान ने अपने ही डॉक्टर शकील अफरीदी को अमेरिका के लिए जासूसी करने के आरोप में कैद में रखा है तो पाकिस्तान ने कई बार अमेरिका से प्रस्ताव रखा है कि मैं डॉक्टर शकील आफरीदी को रिहा कर देता हूं आप बदले में डॉक्टर आफिया सिद्दीकी को रिहा कर दीजिए तब अमेरिका ने यही जवाब दिया है अबे तू हमको पागल समझा है क्या बे डॉक्टर शकील अफरीदी तेरा नागरिक है तो उसकेलसाथ जो चाहे वह करडॉ आफिया सिद्दीकी को रिहा करवाने के लिए कई बार आतंकियों ने कोशिश भी किया एक साल पहले पाकिस्तानी ने दो ak-56 लेकर टेक्सास के यहूदियों के पूजा स्थल सिनेगॉग में घुसकर कई यहूदियों को बंधक बना लिया और अब वह अमेरिकी सरकार से मांग कर रहा है कि आफिया सिद्दीकी को रिहा किया जाए वरना वह यहूदी बंधकों को मार देगा फिर स्वाट कमांडो ने उसे आतंकी का भेजा उड़ा दियामैंने पहले भी कहा है अभी भी कह रहा हूं जो ये ऐसे लोग जितना ज्यादा पढ़ा लेता है वह उतना ही बड़ा आतंकवादी बनता है

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यह डॉक्टरो के आतंकवादी बनने पर आप अगर आश्चर्यचकित हो रहे हैं तो अमेरिका में बेहद शानदार जिंदगी जीने वाली   दुनिया की सर्वोच्च संस्था मैसाच्युसेट्स इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलॉजी से पोस्ट ग्रेजुएट और पीएचडी करके अमेरिका की न्यूक्लियर साइंस विभाग में असिस्टेंट डायरेक्टर की नौकरी करने वाली डॉक्टर आफिया सिद्दीकी अपने 5 बच्चों और पति को छोड़कर आतंकवादी बन गई थी पाकिस्तानी मूल की एक लड़की आफिया सिद्दीकी पढ़ने में बहुत ब्रिलियंट  थी  आगा खान ट्रस्ट के स्कॉलरशिप पर उसने  प्रतिष्ठित MIT से न्यूक्लियर साइंटिस्ट में मास्टर्स डिग्री लिया और फिर आगा खां ट्रस्ट के स्कॉलरशिप पर उसने अमेरिका में ही न्यूरो न्यूक्लियर साइंटिस्ट में पीएचडी किया  उसके बाद वह अमेरिका के न्यूक्लियर साइंस विभाग में बड़े पद पर काम करने लगी साथ ही साथ वह अमेरिका की दो यूनिवर्सिटी में पीएचडी और मास्टर्स डिग्री वाले बच्चों को न्यूक्लियर साइंस की प्रैक्टिकल नॉलेज भी पार्ट टाइम में देती थी वह अमेरिका की कुछ चुनिंदा लोगों में से थी जिसे यूरेनियम और कलपुर्जे ले जाने पर कोई रोक-टोक नहीं था उसका पति भी बहुत बड़...

देश में सबसे अधिक मूर्ति अंबेडकर का टूटता है जो इस बात का प्रमाण है कि *देश की जनता अंबेडकरवाद से ऊब चुकी है और इसे जड़ से उखाड़ फेंकना चाहती है।,,

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लो जी एक और बाबा सांप की मूर्ति का सिर तन से जुदा कर दिया किसी ने अगर देश की जनता अंबेडकरवाद को पसंद करता तो मूर्ति क्यों तोड़ता,,।  देश में सबसे अधिक मूर्ति अंबेडकर का टूटता है जो इस बात का प्रमाण है कि *देश की जनता अंबेडकरवाद से ऊब चुकी है और इसे जड़ से उखाड़ फेंकना चाहती है।,,! #अम्बेडकर  इतिहास केवल तथ्यों का संग्रह नहीं होता, यह एक सचेत चयन भी होता है—क्या याद रखा जाए, और किसे भुला दिया जाए। भारतीय संविधान निर्माण के संदर्भ में, यह चयन स्पष्ट रूप से सत्ता की रणनीति और राजनीतिक लाभ से प्रेरित था। सर बी. एन. राउ जैसे व्यक्ति, जिनकी भूमिका संविधान के निर्माण में निर्णायक और केंद्रीय थी, को सामूहिक स्मृति से लगभग मिटा दिया गया। वहीं, डॉ. अंबेडकर को संविधान का एकमात्र और संपूर्ण पर्याय बना दिया गया। यह विस्मरण कोई आकस्मिक चूक या लापरवाही नहीं थी; यह कांग्रेस नेतृत्व, विशेषकर नेहरू की उस राजनीतिक रणनीति का हिस्सा था जिसमें प्रतीकों के ज़रिये एक विशेष प्रकार की सामाजिक इंजीनियरिंग की जा रही थी। अंबेडकर—जो दलित समुदाय के सबसे प्रखर और प्रभावशाली नेता थे—उस राजनीतिक प्...

उस समय मैं केवल दस साल का था। मेरी मां यानी मेरी नानी ने मुझे तीन रूपये देते हुए कहा कि स्टेशन बहुत दूर है और तुम भोजन के समय तक शायद वापस घर न पहुच सको

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उस समय मैं केवल दस साल का था। मेरी मां यानी मेरी नानी ने मुझे तीन रूपये देते हुए कहा कि स्टेशन बहुत दूर है और तुम भोजन के समय तक शायद वापस घर न पहुच सको। और इन गाड़ियों का कोई भरोसा नहीं है। बारह-तेरह घंटे देर से आना तो इनके लिए आम बात है। इसलिए ये तीन रूपये अपने पास रख लो।  भारत में उन दिनों तीन रुपयों को तो एक अच्छा खासा खजाना माना जाता था। तीन रुपयों में तो एक आदमी  महीने तक अच्छी तरह से रह सकता था। मेरी नानी ने मुझसे कहा कि अगर मैं महात्मा गांधी को देखना चाहता हूं तो मुझे वहां जाना चाहिए। और उन्होंने बहुत पतले मलमल का बड़ा कुर्ता बनवाया। मलमल बहुत ही सुदंर और बहुत पुराना कपड़ा है। उन्हों ने बहुत अच्छा  मलमल लिया। वह बहुत ही पतला और पारदर्शी था। गाड़ी हमेशा की तरह दस घंटे लेट आई। बाकी सभी लोग चले गए थे। सिवाय मेरे। तूम तो जानते है कि मैं कितना जिद्दी हूं। स्टेशन मास्टर ने भी मुझसे कहा: बेटा तुम्हारा तो कोई जवाब नहीं है। सब लोग चले गए हैं किंतु तुम तो शायद रात को भी यहीं पर ठहरने के लिए तैयार हो। और अभी भी गाड़ी के आने को कुछ पता नहीं है। और तुम सुबह चार बजे से उसका इंत...

१. राजीव गांधी की हत्या 21 मई 1991 को हुई और ठीक एक महीने बाद 21 जून 1991 को 'राजीव गांधी फाउंडेशन' नाम से एक NGO बनाया गया।जी हां, राजीव गांधी की हत्या के सिर्फ एक महीने बाद।

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१. राजीव गांधी की हत्या 21 मई 1991 को हुई और ठीक एक महीने बाद 21 जून 1991 को 'राजीव गांधी फाउंडेशन' नाम से एक NGO बनाया गया। जी हां, राजीव गांधी की हत्या के सिर्फ एक महीने बाद। २. सोनिया गांधी ने 1993 में ब्रिटेन में राजीव गांधी फाउंडेशन की ब्रांच खोली और ब्रिटेन सरकार ने उनकी उपस्थिति में इसके संबंध में प्रस्ताव पारित किया। ३. 1993 में सोनिया गांधी राजीव गांधी फाउंडेशन से जुड़े काम के लिए अमेरिका गईं। काम क्या था, ये जानकारी नहीं मिली। ४. उसी साल 1993 में ही जोर्ज सोरोस ने न्यूयॉर्क में ओपन सोसाइटी फाउंडेशन की स्थापना की। संयोग? 5. दिसंबर 1994 में फोरम ऑफ डेमोक्रेटिक लीडर्स इन द एशिया-पैसिफिक (FDL-AP) नाम से एक NGO शुरू किया गया। ६. कुछ अन्य लक्ष्यों के अलावा, इस NGO का मुख्य लक्ष्य था 'स्वतंत्र कश्मीर'! जी हां, आपने सही पढ़ा, 'स्वतंत्र कश्मीर'! आगे का घटनाक्रम चौंकाने वाला है, बने रहें। ७. 'राजीव गांधी फाउंडेशन की अध्यक्ष' के रूप में सोनिया गांधी इस फोरम की सह-अध्यक्ष थीं। फिर से पढ़िए, राजीव गांधी फाउंडेशन की अध्यक्ष के रूप में! FDL-AP के लगभग सभी सदस...

वेदों की ओर लौटे ये कहावत सच हो गई

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https://pplx.ai/vmplenterp35281 वेदों की ओर लौटे ये कहावत सच हो गई सुनीता विलियम्स के चौंकाने वाले खुलासे अंतरिक्ष में नौ महीने बिताने के बाद अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स द्वारा पत्रकारों से किया गया वक्तव्य इस समय पूरे विश्व में चर्चा का विषय बना हुआ है। "मुझे अंतरिक्ष में फँस जाना ईश्वर की इच्छा जैसा लग रहा था। जब मुझे अंतरिक्ष में 20 दिन हो गए थे, तब मैं मानो मृत्यु से सामना कर रही थी। भोजन और पानी का भंडार कम होने लगा तो मुझे लगा कि अब आगे कैसे जिया जाए? उसी समय मुझे सनातन धर्म में चैत्र नवरात्रि के उपवास की याद आई। उस दिन से मैं शाम को थोड़ा भोजन और पानी लेती और सुबह केवल थोड़ा पानी। एक महीना इस प्रकार बीत गया और मैं स्वस्थ और प्रसन्न थी। मुझे लगने लगा कि मैं और कुछ समय तक जीवित रह सकती हूँ। "मृत्यु की प्रतीक्षा करते समय मैंने कंप्यूटर खोला और सोचा कि बाइबल पढ़ूँ। उसे मैं पहले कई बार पढ़ चुकी थी, इसलिए एक पन्ने के बाद मुझे ऊब हो गई। तब मुझे फिर से रामायण और भगवद्गीता पढ़ने की इच्छा हुई (अब लगता है कि उससे मुझे किसी शक्ति का अनुभव हुआ)। मैंने उसका अंग्रेज़ी अनुवाद डाउन...

कानपूर के हिन्दू का पलायन

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*कानपुर के हिन्दुओं का पलायन...!!***  *कानपुर के मुसलमानों का प्लान!!!!कानपुर के हिन्दुओ पूरा पढ़ो और शेयर करो हर सनातनी को!!!*  कानपुर के हिन्दुओं के लिए एक चेतावनी या सलाह जो कह लो!!!! कानपुर के मुल्लों का मिशन 2030!!!! https://pplx.ai/vmplenterp35281  ( *1* ) *(नई सड़क)* आज से 35 साल पहले हिन्दु रहते थे मेजोरिटी में, अब वहाँ से हिन्दू पलायन कर चुका है!! ( *2* ) *(बेकनगंज)* 50 साल पहले वहा सिंधी समाज के लोग रहा करते थे और जो आज दुकानों मे बैठ के जोहरी सोना कंगन बेच रहे हैं, वह सब हिन्दुओं की दुकानें हुआ करती थी, सब बेच बेच के चले गये!  वहाँ आज भी हमारा मंदिर है, लेकिन जर्ज़र टूटा हुआ और मुसलमानो ने कब्ज़ा कर रखा है!! उनके डर की वजह से कोई आवाज़ भी नहीं उठाता, *वहाँ करीब 21 मंदिर है* *सब सालो से बंद है, वजह हिन्दू आबादी का पलायन!*  ( *3* ) ( *चमनगंज* ) सनातनियों ये कानपुर का ऐसा इलाका है *जिसको मिनी पाकिस्तान कहा जाता है* यहा बदमाशों, बिल्डरो का बोलबाला रहता है! सिर्फ 10 से 15 साल मे यहा से 20% हिन्दु पलायन करके भाग खड़े हुए पहले यहा 30 से 32% हिन्दु आबादी रहती थी ...

क्या आप जानते है कि #बॉडी_पार्ट्स आते कहाँ से है ? मुर्दाघरो में पड़ी लाशों से या एक्सीडेंट में मरने वालो से...?? जानना है तो पोस्ट पढिए !!

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क्या आप जानते है कि #बॉडी_पार्ट्स आते कहाँ से है ? मुर्दाघरो में पड़ी लाशों से या एक्सीडेंट में मरने वालो से...??  जानना है तो पोस्ट पढिए !! जरूरत के हिसाब से अंगदान नही हो पाता, अब आप 40 लाख देकर किडनी बदलवा देते हो। अब पैसे दिए हो तो 16-25 आयु के आसपास की मजबूत किडनी ही लगाएगा डाॅक्टर... सवाल फिर से वही.... कि “बॉडी पार्ट्स” आते कहाँ से है ? 16-25 वर्ष के लड़के ज्यादातर नशा करके अपने ज्यादातर पार्ट खराब कर चुके होते हैं... और इनका निकालना थोड़ा कठिन कार्य भी है। हाँ ! एक जगह है और वो है... भारत में मिडिल क्लास फैमिली की लड़कियां...!! ये लडकियां सिगरेट, गुटखा या शराब नही यूज करती और बॉडी को मेंटेन रखती हैं। इनके दाँत, हड्डी, आँते, चमडा़, क्रेनियम, लीवर, किडनी, हृदय सब सही और ट्रांसप्लांट के लिए परफेक्ट होता है... “लव जिहाद” का एक पहलू यह भी है... इन लड़कियों में कथित प्रेम का वायरस डालकर इनको कहीं भी ले जाना आसान होता है... इस वायरस का अर्थ दिमाग में प्रेम-प्यार का कीड़ा। इसीलिए दिसंबर में केदारनाथ जैसी “लव जिहाद” प्रोमोटिंग फिल्में आती हैं.. दिसम्बर में फ़िल्मी हीरोटाइप राज, कर...

RSS की प्रार्थना का हिन्दी में अनुवाद ... पढ़ो और सोचिये कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की भारत माता के प्रति भावना क्या है 🚩1. नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे, त्वया हिन्दुभूमे सुखं वर्धितोsहम्।

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RSS की प्रार्थना का हिन्दी में अनुवाद ... पढ़ो और सोचिये  कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की भारत माता के प्रति भावना क्या है 🚩 1. नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे, त्वया हिन्दुभूमे सुखं वर्धितोsहम्। 🚩 हे प्यार करने वाली मातृभूमि! मैं तुझे सदा (सदैव) नमस्कार करता हूँ। तूने मेरा सुख से पालन-पोषण किया है। 🚩 2. महामङ्गले पुण्यभूमे त्वदर्थे, पतत्वेष कायो नमस्ते नमस्ते।। १।। 🚩 हे महामंगलमयी पुण्यभूमि! तेरे ही कार्य में मेरा यह शरीर अर्पण हो। मैं तुझे बारम्बार नमस्कार करता हूँ। 🚩 3. प्रभो शक्ति मन्हिन्दुराष्ट्राङ्गभूता, इमे सादरं त्वाम नमामो वयम् त्वदीयाय कार्याय बध्दा कटीयं, शुभामाशिषम देहि तत्पूर्तये। 🚩 हे सर्वशक्तिशाली परमेश्वर! हम हिन्दूराष्ट्र के सुपुत्र तुझे आदर सहित प्रणाम करते है। तेरे ही कार्य के लिए हमने अपनी कमर कसी है। उसकी पूर्ति के लिए हमें अपना शुभाशीर्वाद दे। 🚩 4. अजय्यां च विश्वस्य देहीश शक्तिम, सुशीलं जगद्येन नम्रं भवेत्, श्रुतं चैव यत्कण्टकाकीर्ण मार्गं, स्वयं स्वीकृतं नः सुगं कारयेत्।। २।। 🚩 हे प्रभु! हमें ऐसी शक्ति दे, जिसे विश्व में कभी कोई चुनौती न दे सके, ऐसा शुद्ध च...

कहानी लक्ष्मीकांत पांडेय जी की हैं…. और जब मैंने पढ़ी तो मेरी आंखों में से आंसू नहीं रुक रहे थे…

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  कहानी लक्ष्मीकांत पांडेय जी की हैं…. और जब मैंने पढ़ी तो मेरी आंखों में से आंसू नहीं रुक रहे थे… आशा करती हूं आपको पसंद आएगी… ये कोई कहानी नही बल्कि आँखों देखी सच्ची घटना है....!! मेरी छोटी बुआ….!!!! रक्षाबंधन का त्यौहार पास आते ही मुझे सबसे ज्यादा जमशेदपुर (झारखण्ड )वाली बुआ जी की राखी के कूरियर का इन्तेज़ार रहता था. कितना बड़ा पार्सल भेजती थी बुआ जी. तरह-तरह के विदेशी ब्रांड वाले चॉकलेट,गेम्स, मेरे लिए कलर फूल ड्रेस , मम्मी के लिए साड़ी, पापाजी के लिए कोई ब्रांडेड शर्ट. इस बार भी बहुत सारा सामान भेजा था उन्होंने. पटना और रामगढ़ वाली दोनों बुआ जी ने भी रंग बिरंगी राखीयों के साथ बहुत सारे गिफ्टस भेजे थे. बस रोहतास वाली जया बुआ की राखी हर साल की तरह एक साधारण से लिफाफे में आयी थी. पांच राखियाँ, कागज के टुकड़े में लपेटे हुए रोली चावल और पचास का एक नोट. मम्मी ने चारों बुआ जी के पैकेट डायनिंग टेबल पर रख दिए थे ताकि पापा ऑफिस से लौटकर एक नजर अपनी बहनों की भेजी राखियां और तोहफे देख लें... पापा रोज की तरह आते ही टी टेबल पर लंच बॉक्स का थैला और लैपटॉप की बैग रखकर सोफ़े पर पसर गए थे. "च...