कानपूर के हिन्दू का पलायन

*कानपुर के हिन्दुओं का पलायन...!!***


 *कानपुर के मुसलमानों का प्लान!!!!कानपुर के हिन्दुओ पूरा पढ़ो और शेयर करो हर सनातनी को!!!* 

कानपुर के हिन्दुओं के लिए एक चेतावनी या सलाह जो कह लो!!!!

कानपुर के मुल्लों का मिशन 2030!!!!https://pplx.ai/vmplenterp35281

 ( *1* ) *(नई सड़क)* आज से 35 साल पहले हिन्दु रहते थे मेजोरिटी में, अब वहाँ से हिन्दू पलायन कर चुका है!!
( *2* ) *(बेकनगंज)* 50 साल पहले वहा सिंधी समाज के लोग रहा करते थे और जो आज दुकानों मे बैठ के जोहरी सोना कंगन बेच रहे हैं, वह सब हिन्दुओं की दुकानें हुआ करती थी, सब बेच बेच के चले गये! 
वहाँ आज भी हमारा मंदिर है, लेकिन जर्ज़र टूटा हुआ और मुसलमानो ने कब्ज़ा कर रखा है!! उनके डर की वजह से कोई आवाज़ भी नहीं उठाता, *वहाँ करीब 21 मंदिर है* *सब सालो से बंद है, वजह हिन्दू आबादी का पलायन!* 
( *3* ) ( *चमनगंज* ) सनातनियों ये कानपुर का ऐसा इलाका है *जिसको मिनी पाकिस्तान कहा जाता है* यहा बदमाशों, बिल्डरो का बोलबाला रहता है! सिर्फ 10 से 15 साल मे यहा से 20% हिन्दु पलायन करके भाग खड़े हुए पहले यहा 30 से 32% हिन्दु आबादी रहती थी जिसमे दलित 28% थे!!

1 नंबर प्लाट से लेकर 6 नंबर प्लाट तक हिन्दू ही हिन्दू थे,
पूरे सराये मे हिन्दू थे!

लेकिन मुसलमानी बिल्डरों का लैंड जिहाद और बदमाशों का कहर ऐसा चला की हिन्दु पलायन करने पर मजबूर हो गया!!

हिन्दुओं की ज़मीनों को बदमाशों द्वारा डरा धमका कर खाली कराया जाता और बिल्डर वहा 5-6 माले की बिल्डिंग तान देता जिसमे करीब 100 से 120 मुसलमान आ के बस जाते! इस तरह आबादी भी एक इलाके मे आ जाती और हिन्दुओ का पलायन भी हो जाता, आज यहाँ मात्र 1% हिन्दु हैं जो 2-3 साल मे पलायन कर जाएंगे!
( *4* ) ( *कर्नलगंज* ) छिप्याने मे पिछले 2 सालो मे 25 से 30 हिन्दु परिवार पलायन कर गया है,
वजह वहाँ के लड़के जो आये दिन झगड़ते और डराते धमकाते हैं, ये इतनी घनी आबादी वाला इलाका है, यहाँ कौन किस घर मे रहता है, प्रशासन को पता लगाने मे भी टाइम लगता है, मुसलमान ऐसे ही इलाकों मे रहना पसंद करते हैँ, और वक़्त आने पर ये चीटियों की तरह निकलते हैं, तब हम गौर करते है कि इनकी आबादी कितनी उफान पर है!!
( *5* ) ( *बाबूपुरवा* ) पूरा कब्ज़ा हो चुका है, इस इलाके मे *जहाँ हिन्दु बहुसंख्यक था, 70% था, आज वहाँ मुश्किल से 3-4% हिन्दू मिलेगा वो भी ढूंढ़ने से!!* 
( *6* ) *(बेग़म पुरवा)* ये बाबूपुरवे से मिला हुआ इलाका है, दोनों जगह कपड़ों का ही कारोबार होता है, यहां भी बेहिसाब आबादी आ के बसने लगी, दूर दूर से और देखते ही देखते एक इलाका तैयार हो गया!!

( *7* ) *(सुजातगंज* ) यहां जितनी मुस्लिम आबादी है, सब इधर उधर से आ के बसी है, अभी 10 सालो मे एक योजनाबद्ध तरीके से बिल्डिंगे बनाई गयी है, फिर उसमे ला कर के मुस्लिम आबादी को बसाया गया और जहाँ ये जाते है, वहा हुड़दंग करते हैं, जिससे सभ्य हिन्दु पलायन कर जाता है!!

( *8* ) ( *मछरिया* ) इसी साल की बात है, अभी पहली बार यहाँ मुस्लिम पार्षद बना है, आज से पहले कभी यहा मुस्लिम पार्षद नहीं बना था, यहाँ भी योजना बद्ध तरीके से मुसलमानो को बसाया गया है, इधर उधर के इलाकों से ला कर के मुसलमानो को बसाया गया, ये एक बहुत बड़ा मिशन है इन लोगों का, ये किनारो के इलाकों मे बसना शुरु कर रहे हैं, कानपुर में ताकि समय आने पे चारो तरफ से घेर सके! 
यहाँ भी हिन्दू पलायन कर गया, 
अब केवल अल्पसंख्यक हैं इस इलाके में!!$2 for you, Pro for your friend

 ( *9* ) *शुक्लागंज, उन्नाव* बिल्कुल नई आबादी हर रोज़, हर हफ्ते, दस दिन में कोई मुसलमान यहाँ जगह लेता है, एक लोडर से सामान ले कर आता है, अपने बीवी बच्चो के साथ रहने लगता है, शुक्ला गंज अगले 5 सालो मे मुसलमानोँ का सबसे बड़ा गढ़ होगा, देखिएगा आप! यहाँ भी अब हिन्दू पलायन कर रहे हैं!!

( *10* ) *(जाजमऊ)* कहने की कोई बात नहीं, सब जानते है कि पिछले 20 सालो मे ताबड़तोड़ मुसलमान आबादी बसी है आ के पूरे जजमाऊ चुंगी वगैरा में, मुल्ले ही मुल्ले हैं, दबा के मुर्गा बकरा बेचते है खुले आम! हिन्दू तो यहाँ न जाने कब से पलायन कर रहा है!!
( *11* ) *(इफ्तिखराबाद* ) यहां फूल वाली गली से लेकर लाटूश रोड तक हिन्दू ही हिन्दू था, 
 *अब वहाँ हिन्दू घर ढूंढ़ने से नहीं मिलेगा !* 
वहाँ से पलायन करने की वजह चारो तरफ से मुल्लों को आतंक!
ऐसे कई इलाके, कई इलाके.....
आज वहाँ हिन्दू पलायन कर रहा है, मुसलमान वहाँ कब्ज़ा कर रहें हैं, इनके पास 2 ऐसे हथियार है जिसकी चोट हमारी नस्लों को लगेगी:-

 *1* . *बिल्डर* 
 *2* . *बच्चे* 

            ( *बिल्डर* ) 
जहाँ हमारा पढ़ा लिखा हिन्दू 500 गज के घर मे बीवी और 2 बच्चो मा बाप के साथ रहता है,
वहीं ये मुसलमान बिल्डर 500 गज की जगह पे 5 बिल्डिंग 5 माले की 100-100 गज की बना के धर देते हैं!!
हर बिल्डिंग मे 70 से 80 लोग रहते हैं,
5 बिल्डिंग मे हो गये 400 के करीब, 
अंदाजा लगा लीजिये,
जिस जगह से 7-8 हिन्दू सड़क पे आएंगे, वहीं उतनी ही जगह से 400 मुल्ले उतरेंगे!!

चमनगंज, बेकनगंज, कर्नलगंज, नई सड़क, रजबी रोड, हीरा मन का पुरवा, डलेल पुरवा, कुली बाजार, परेड, पेचबाग!!
इन बिल्डरो के लैंड जिहाद का सुबूत है, हर जगह इन इलाकों मे आज भी बिल्डिंग का कंस्ट्रक्शन होते हुए दिख जायेगा!!
                 ( *बच्चे* ) 
जिस तरह सर्दियों मे चीटियां नहीं दिखती, लेकिन गर्मी होते ही वो इतनी तादाद मे आ जाती है कि फिर लक्ष्मण रेखा भी काम नहीं करती! ठीक उसी तरह मुसलमानी बच्चे भी आपको दिखेंगे, जब आप जयचंद का चश्मा उतार कर देखेंगे, यकीन नहीं है तो कुछ दिनों में खुद देख लीजियेगा, कितने हरामी लौंडे है इनके यहाँ के और कितने हैं, *उनसे मुहर्रम मे जब वो झुण्ड मे होते है तो प्रशासन भी उनके सामने नतमस्तक नज़र आता है* 

 *आजसे 10 साल बाद क्या होगा* *?* *कभी सोचा है* ?

एक मुसलमान के कमसे कम 4 से 5 बच्चे तो होते है ये खतरा है हमारे लिए सबसे बड़ा अब दिखने भी लगा है!!

हम लोग ने भी बाद मे गौर किया कि कुछ ही सालों में हमारे अगल बगल कितनी तेज़ी से आबादी बढ़ी है, हम जब इनकी गलियों से निकलते है तो इनके बच्चो पे नज़र पड़ती है, पूरी गलियों मे इतने आदमी नहीं रहते जितने 12-15 साल के एटम बम रहते हैं, ये आज नहीं तो कल हम पे ही फटेंगे अब सवाल ये है, हमारी क्या तैयारी है?
हमारे पास बजरंग दल है, आरएसएस, हमारे पास सरकार है बस?
 *अगर ये वहम है किसी को तो मुहर्रम पर कोई बजरंग दल का या बजरंग दल ही पूरा एक बार भिड़ के देख ले, वहम निकल जायेगा!* 
हम अभी खतरे को समझ नहीं पा रहे है क्युंकि सत्ता की मलाई हम सब को खिलाई जा रही है! 
एकबार आप इनसे लड़ के देखिये, पसीने छूठ जाएंगे, खतरा कोई मामूली नहीं है,
 *हर तरफ से घिरे हुए हैं कानपुर के सनातनी,* 
लेकिन गंभीरता से नहीं ले रहे हम!!
सरकार तो कभी ना कभी चली ही जाएगी देखो कर्नाटक में गयी के नहीं गयी?
जिस दिन यहाँ की गयी तब या सरकार गिर गयी? 
उनकी तो तैयारी पूरी है, हमारी क्या है? 
भगवान कसम नानी याद आ जायेगी, इन हरामियों से निपटने में, हम लोगो को अगर अभी से हमने तैयारी नहीं की! हर बार पुलिस हमारे साथ नहीं होगी, ना ही सरकार, हमे खुद ही निपटना है ये याद रखो!
किस तरह से लोग चंदेश्वर हाते मे रहते हैं, वे लोग ही जानते हैं, चारो तरफ से इन लोग से घिर चुके है,
ज़रा भी चू चपड़ करी तो रातो रात उनका सफाया हो जायेगा, 
ये मुमकिन है,$2 for you, Pro for your friend
योगी सरकार में भी वजह ये है कि समाज हमारा लड़ना नहीं चाहता, 
सब सरकार से करवाना चाहता है, सरकार सबको तो जेल मे नहीं डाल सकती! अगर ये हम पर अगल बगल की बिल्डिंगो से पत्थर बम चला दे तो हम क्या कर लेंगे? क्या मेयर बचा लेंगी? या विधायक कोई बचा लेगा? जवाब है नहीं,
 *हमे अगर कोई बचा सकता है वो है (समाज)* 
 *बस समाज लड़ने वाला बन जाये और सरकार के भरोसे ना बैठे!* 
यहाँ की मैयर बनती है कट्टर हिन्दू और हिंदुत्व के नाम पे 2 बारमैयर बन चुकी है, *बेकनगंज मे हमारा राम जानकी मंदिर बन गया ?* 
बस वो हर साल वहां जा के फोटो खिचा के चली आती हैं, दो चार मुसलमानो से कह देती है यहा दुकान ना लगे, मांस मछली ना बिके और वो लोग भी इनको खेल समझते है और हां मे हां मिला देते है! फिर मीडिया मे दिखा दिया जाता है,
कानपुर की अम्मा एक बार फिर दहाड़ी जिहादियी के इलाके में, 

हालांकि सच्चाई छुपाई जा रही है, *जिहादियों के इलाके मे अब दहाड़ना तो क्या मिम्याना भी मुश्किल है,* नहीं यकीन तो बिना प्रशासन लिए कोई हिंदूवादी संगठन चला जाये, अरे अपना बजरंग दल चला जाये, वो घेर के मारेंगे, अधमरा कर देंगे,और मारने वाले सब बिल्डिंगो से उतरेंगे,एक एक बिल्डिंग से 40-50 लोग और सब कम उम्र के लड़के होंगे 15 साल 20 साल !!   
ये है उनके फल जो वो 20 साल पहले बो चुके थे, अब जो वो बो रहे है, वो अगले 20 सालों मे हमारी नस्ल जब हम पर लानत भेजेगी तो हम समझ जाएंगे खुद ही!!
आप मैयर विधायक के चक्कर मे ना रहिये, बेकंगनज का रामजानकी मंदिर बना नहीं पाएंगी और बनाना भी नहीं है उन्हें, वो सिर्फ इसपर राजनीति कर रही है!!
वहाँ 20 मंदिर है, हर बार कहती है, मुसलमानों के इलाकों मे बंद पड़े मंदिर फिर से बनेंगे, एक भी नहीं, सब जर्ज़र है, वजह अम्मा खुद जानती है कि मंदिर वहाँ बनाना कितना मुश्किल है, ये सब काम समाज ही कर सकता है और समाज कौन है? 

समाज हम है? 

 *हम जब उठ खड़े होंगे तो सब हो जायेगा,* 
सरकार को तो एक दिन जाना ही है, जिस हिसाब से आबादी बढ़ रही है, जाना तय है एक न एक दिन.....

 👉 *आप कब आबादी बढ़ाओगे?* 
 👉 *आप कब बच्चे पैदा करोगे?* 
👉 *आप कब ऊंची ऊंची बिल्डिंग बनाओगे?* 
👉 *कब एक एक बिल्डिंग मे 50-50 हिन्दू रहेंगे?* 

 *जागो अब तो जागो कानपुर के हिन्दुओ!!* 

आप बस आदिपुरुष का विरोध करो.....

मोदी की जय जय करो,
नेतागिरी मे पड़े रहो,
दूसरी तरफ वो अपनी तैयारी कर रहें हैं हर तरह से! 
इन सब से निकल कर असली हिंदुत्व का काम करो, सिर्फ नेतानगरी मे पड़े रहोगे तो एक दिन पलायन तुम्हारा भी निश्चित है मेरे भाई!!
कभी कभी दुश्मनों से लड़ने के लिए उनकी जैसी रणनीति बनानी पड़ती है, आप गौर करो जब कोई बात होती है, बच्चा बूढ़ा पढ़ा लिखा अनपढ़ सब एक साथ उतर आते हैं, 

👉 *मुसलमान चाहे जितना पढ़ लिख जाये,वो अपना मज़हब मिशन नहीं भूलेगा,* 

चाहे जॉब करता हो या कहीं और हो, उसके भाई लड़ रहे हैं, वो भी अपने बैग से रुमाल निकाल कर भीड़ मे शामिल हो जायेगा, ये एकता उनके खून मे ही है, हममे भी है, 
*लेकिन कुछ जय चंदो ने इसे भाई चारे का इंजेक्शन लगा के ख़तम करदिया!!* 
 *3 जून को हमारे पर पे हमला हुआ,5 मिनट मे 10 हज़ार लोग उनके आ गये!* 
हमारी तरफ से कोई नहीं आया,
क्युंकि ना हमारे पास लड़ने वाले नौजवान बचे हैं,और जो हैं, वो दूर दूर हैं, उनके पास नौजवान हैं, और बिल्डरों ने तो आग मे पेट्रोल डालने का काम कर दिया है, 
हर जगह इनकी इकट्ठा कर रहें हैं!!
योगी जी ने 5-6 को जेल मे डाल दिया, हमने लिख दिया, बाबा ने गर्मी निकाल दी, बाबा बड़े दयालु हैं, बाबा की जय हो, बाबा ने शिमला बना दिया!!
ये सब हम बस अपनी तसल्ली के लिए करते हैं, और कुछ नहीं बाकी, 15000 जो आनन फानन मे आ गये थे, उनसे क्या योगी जी लड़ेंगे? क्या प्रशासन लड़ेगा? 
 *नहीं उनसे समाज ही लड़ सकता है,* 
इसलिए अपने आप को तसल्ली देने के बजाये, चिंता करिये, गंभीरता को समझिये!!
उनको 6-7 के जेल जाने से कोई फ़र्क़ नहीं पड़ेगा, वो जो बच्चो की आबादी बढ़ा रहे हैं, एक एक जगह इकट्ठा कर के इलाके तैयार कर रहे हैं, उनसे निपटना होगा!!
आजकल सोशल मीडिया पे मुसलमान एक चीज़ पोस्ट कर रहा है, (हिजरत करो, हिजरत मे भलाई है)
हिजरत कहते हैं,एक जगह से दूसरी जगह जाना,जहाँ इनको लगता है, यहाँ खतरा है, वहाँ से ये हिजरत कर जाते है!!
हमने उत्तरकाशी में इनकोभगाया,
तो हम खुश हो गयेअसल मे हमने अपने पैर पे कुल्हाड़ी मारी है, फिर वो एक जगह इकट्ठा हो जाएंगे, छोटा मर्ज़ अब कैंसर मे तब्दील हो जायेगा!! अगर ये एक एक जगह इकट्ठा हो गये, तो फिर मामला बहुत गंभीर हो जायेगा,जब तक ये माइनॉरिटी में हैं, और हम लोगों के बीच में हैं,
तब तो ये भाईचारा करते रहेंगे,
और डर के मारे कि हमारे भाइयो को भी भुगतना पड़ेगा,अगर हमने यहाँ कुछ किया, इस डर से खुल के नहीं आएंगे! लेकिन अगर इकट्ठा हो गये तो ताकत बन जाएंगे,और इसी का नाम हिजरत है!!
अब होश में आओ, सरकार के चक्कर में, नेता पेता के चक्कर मे ना पड़ो, खुद सक्षम बनो, मेरा काम तो सिर्फ हिन्दू को जगाना है, जगाता रहूँगा, क्युंकि मैने सब भापा है, देखा है, समझा है!! मैं सरकार का गुलाम नहीं हूँ, और जानता हूँ, वो नेता हैं, कुछ ज़्यादा कर नहीं पाएंगे, जो करना है, आपको हमको करना है!!

 *50 साल पहले कानपुर में मुस्लिम आबादी कुल 2.5% थी, आज 35% है!!* 

जाग जाओ, जाग जाओ, वरना वो दिन दूर नहीं, जब ये तुम्हारे इलाके को अपना इलाका बना लेंगे, आज P-ROAD तक पहुँच चुका है मुसलमान,ऐसे ही समाना नंतर रूप से लगभग प्रत्येक क्षेत्र एवं मोहल्ले मे धीमे हो या तेज परन्तु योजना बद्ध बढ़ोत्तरी और फैलाव बदस्तूर जारी है और हम कुछ राजनितिक लालच या सत्ता के लोभी नेताओं के कहे मे आकर जाति बिरादरी मे ही बंटे हुए हैँ और बेवजह झूठी निरपेक्षता दिखाने लगे रहते हैँ।
जाओ देखो तुम बस आदि पुरुष मे उलझें रहना....
 फिल्में बॉयकोट करो,
फिल्में प्रोमोट करो!!
वो बच्चे प्रोड्यूस कर रहे हैं,
वो बिल्डिंग प्रोड्यूस कर रहे हैं,
वो संगठित हो चुकें हैं!!

 *खैर मौके आ रहें हैं, अगली तैयारी* *रखो पूरी, कब कहाँ क्या कर दें, यह इनका भरोसा नहीं, जागो अब से जागो, आगे क्या करना है, आप समझदार हो,* 
👉 हमारे पास बजरंग दल है लेकिन वो भी सक्षम नहीं है, पूरी तरह इनको काबू में कर लें....

हमें जवान खून के मुक़ाबले जवान खून उतारना पड़ेगा मैदान में,बजरंग दल अगर दावा करता है हिन्दुओ की रक्षा करने का तो 20 20 साल के लड़को को शामिल करो,वही हल है वही उपाय है, गर्म खून ही गर्म खून को ठंडा कर सकता है!!
इनके यहाँ 20-20 साल के लड़के ही आपको नज़र आएंगे !! सोशल मीडिया हो या रोड हो, हर जगह वही लड़ते दिखेंगे, वजह इनके मौलाना जानते है कि 20 साल का गर्म खून जो कर सकता है वो 40 साल का गर्म खून नहीं कर सकता!!

 *बच्चे पैदा करो,* 
 *बिल्डिंग बनाओ,* 
 *संगठित हो***

 *आशा करता हूँ कि इस कानपुर का हिन्दू जागेगा और दहाड़ेगा, जो राम नवमी में ये करते हैं, उसी* *का जवाब उसी की भाषा मे देगा** 


*जय श्री राम 🙏🏻🙏🏻🙏🏻**

Comments

Popular posts from this blog

बेटियों के बलात्कारियों से जब माँ ने कहा "अब्दुल अली एक-एक करके करो, नहीं तो वो मर जाएंगी "।ये सच्ची घटना घटित हुई थी 8 अक्टूबर 2001 को बांग्लादेश में।अनिल चंद्र और उनका परिवार 2 बेटीयों पूर्णिमा व 6 वर्षीय छोटी बेटी के साथ बांग्लादेश के सिराजगंज में रहता था। उनके पास जीने खाने और रहने के लिए पर्याप्त जमीन थी. बस एक गलती उनसे हो गयी, और ये गलती थी एक हिंदु होकर 14 साल व 6 साल की बेटी के साथ बांग्लादेश में रहना। एक क़ाफिर के पास इतनी जमीन कैसे रह सकती है..? यही सवाल था बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिद ज़िया के पार्टी से सम्बंधित कुछ उन्मादी लोगों का।8 अक्टूबर के दिनअब्दुल अली, अल्ताफ हुसैन, हुसैन अली, अब्दुर रउफ, यासीन अली, लिटन शेख और 5 अन्य लोगों ने अनिल चंद्र के घर पर धावा बोल दिया, अनिल चंद्र को मारकर डंडो से बाँध दिया, और उनको काफ़िर कहकर गालियां देने लगे। इसके बाद ये शैतान माँ के सामने ही उस १४ साल की निर्दोष बच्ची पर टूट पड़े और उस वक्त जो शब्द उस बेबस लाचार मां के मुँह से निकले वो पूरी इंसानियत को झंकझोर देने वाले हैं।अपनी बेटी के साथ होते इस अत्याचार को देखकर उसने कहा "अब्दुल अली, एक एक करके करो, नहीं तो मर जाएगी, वो सिर्फ १४ साल की है।"वो यहीं नहीं रुके उन माँ बाप के सामने उनकी छोटी 6 वर्षीय बेटी का भी सभी ने मिलकर ब#लात्कार किया ....

एक थे राघव राम कौल काश्मीरी ब्राह्मण, जिनको गौ मांस खिला कर मुसलमान बनाया गया था! इनके पुत्र का नाम शेख इब्राहीम था। शेख इब्राहीम के पुत्र का नाम शेख अब्दुल्ला! शेख अब्दूल्ला के पुत्र का नाम फारुक अब्दूल्ला... फारुक अब्दूल्ला के पुत्र है उमर अब्दूल्ला।है राघव राम कौल का अब्दूल्ला परिवार। जब तक इनकी ताकत थी कश्मीर में इन्होंने भी लोगों

ऋषिकेश में गङ्गा किनारे चार दिन की सड़ी हुई एक ला#श मिली थी। भीड़ इकट्ठी हो गयी, पुलिस बुला ली गयी। सबने ला#श से बार बार पूछा- "ला#श! कौन हो तुम?"ला#श का मुँह सड़ गया था। वह कुछ बोल नहीं पा रही थी। भारत में पुलिस के आगे जिन्दे लोग नहीं बोल पाते, वह तो फिर भी ला#श थी। हाँ, उसके कपड़ों ने बताया- वह एक बूढ़ी बंगालन स्त्री थी।किसी ने कहा कि मुक्ति मिल गयी। किसी ने परिजनों के लिए धिक्कार की गालियां गढ़ीं। पुलिस ने चौकीदारों से ला#श को तिरपाल में लपेटवाया और ले गयी। चौकीदारों ने मन ही मन गालियां दी- "ऐसी नौकरी तो सा#ली दुश्मन को भी न मिले..."पुलिस मुख्यालय में अधिकारी महीनों तक ला#श से उसका परिचय पूछते रहे। बीच बीच में कुछ पत्रकारों ने भी पूछा, शहर की समाजसेवी संस्थाओं के लोगों ने पूछा, उस इलाके के नेताओं ने पूछा, पर कोई उत्तर नहीं मिला।इन सबने मिल कर महीनों तक कड़ियां जोड़ीं। जाँच हुई, गायब हुए लोगों का पता किया गया,अंदाजे लगाए गए। अब ला#श बोलने लायक हुई। ला#श जानती थी कि यह जादुई यथार्थवाद का युग है, सो उसने बोलने के अनुरोध को स्वीकार कर लिया। इंस्पेक्टर ने अबकी पूछा तो ला#श सुगबुगाई। पुलिस को बल मिला, इंस्पेक्टर ने पूछा- "बुढ़िया बता! किसकी ला#श है तू? ला#श बोली- "बीना दास (वीणा) को जानते हो दारोगा साहब?""कौन बीना दास? मैं नहीं जानता किसी बीना वीणा को...""पद्मश्री बीना दास! सुभाष चन्द्र बोस के गुरु बेनीमाधव दास और समाजसेवी कमला देवी की पुत्री बीना दास। वही बीना, जिसे अंग्रेज गवर्नर को गोली मारने के कारण कालापानी की सजा हुई थी। जिसने सेलुलर जेल में दस वर्ष काटे थे।"हैं,,,?? यह कौन सी कथा है रे बुढ़िया? मैंने तो कभी नाम तक नहीं सुना..." इंस्पेक्टर झुंझला गया था।ला#श ठहाके लगा कर हँसने लगी। कुछ देर बाद बोली- "कोई बात नहीं साहब! आजाद भारत क्यों याद रखे स्वतन्त्रता संग्राम को? सुख के दिनों में दुख की कथाएँ कौन गाये...""अच्छा तो तू ही बता दे उनके बारे में..." सब एक साथ चीखे।ला#श हँसी। बोली, " सुनो! बीना के पिता बंगाल के क्रांतिकारियों में प्रतिष्ठित और पूज्य थे। उसकी माँ लड़कियों के लिए विद्यालय चलाती थी। बचपन से ही उसने सुभाष बाबू को अपने घर आते देखा था और उनसे बहुत प्रभावित रहती थी।"सबकी निगाह ला#श पर जम गई थी। वह बोलती गयी, "कलकत्ता विश्वविद्यालय से उसने बीए की परीक्षा पास की थी। दीक्षांत समारोह के दिन ही उसने अपने जीवन को सार्थक करने का मन बनाया था। इस काम में उसके पिता और मां दोनों उसके साथ थे। माँ ने जाने कहाँ से ला कर उसे भरी हुई पिस्तौल दी थी।विश्वविद्यालय में डिग्री बांटने के लिए गवर्नर स्टैनली जैक्शन आया था। वह जैसे ही मंच पर खड़ा हुआ, वीणा उठ कर आगे बढ़ी, और फायर झोंक दिया। गोली गवर्नर की कनपट्टी को छूती हुई निकक गयी। वह दूसरा फायर करती तबतक इंस्पेक्टर सोहरावर्दी ने एक हाथ से उसका गला पकड़ लिया, और दूसरे हाथ से उसके पिस्तौल वाले हाथों को ऊपर उठा दिया। वह फिर भी फायर करती रही। उसके पांचों फायर बेकार गए..."सबके चेहरे पर आश्चर्य पसरा हुआ था। वे सन्न पड़े चुपचाप सुन रहे थे। लाश ने कहा, " उसके बाद केस चला, दस साल की सजा हुई। सन 1939 तक सजा काटी। छूटने के बाद फिर आंदोलनों में सक्रिय हो गयी। भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान भी जेल गयी..." "फिर?""फिर 1947 में देश आजाद हुआ तो बीना ने विवाह कर लिया। आयु 36 की हो गयी थी, पर सोचा कि अब सुखी जीवन जीने के दिन हैं... पर शायद ईश्वर को मंजूर नहीं था। पति का देहांत हुआ और फिर आगे पीछे कोई न दिखा! बीना ऋषिकेश आ गयी। एक स्कूल में पढ़ाती, उसी से खर्च चल जाता।""फिर?""फिर क्या? एक दिन आया जब उम्र देह पर भारी पड़ने लगी। पढ़ाने की शक्ति नहीं रही। कुछ दिन इधर उधर से मांग कर पेट भर लिया... और एक दिन सड़क पर चलते चलते ठोकर लगी,ऐसी गिरी कि उठ न सकी... वहीं से निकल ली।""ओह... हे भगवान! तुम.. आप वही हैं?"" हाँ जी! पर दुखी मत