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उस समय मैं केवल दस साल का था। मेरी मां यानी मेरी नानी ने मुझे तीन रूपये देते हुए कहा कि स्टेशन बहुत दूर है और तुम भोजन के समय तक शायद वापस घर न पहुच सको

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उस समय मैं केवल दस साल का था। मेरी मां यानी मेरी नानी ने मुझे तीन रूपये देते हुए कहा कि स्टेशन बहुत दूर है और तुम भोजन के समय तक शायद वापस घर न पहुच सको। और इन गाड़ियों का कोई भरोसा नहीं है। बारह-तेरह घंटे देर से आना तो इनके लिए आम बात है। इसलिए ये तीन रूपये अपने पास रख लो।  भारत में उन दिनों तीन रुपयों को तो एक अच्छा खासा खजाना माना जाता था। तीन रुपयों में तो एक आदमी  महीने तक अच्छी तरह से रह सकता था। मेरी नानी ने मुझसे कहा कि अगर मैं महात्मा गांधी को देखना चाहता हूं तो मुझे वहां जाना चाहिए। और उन्होंने बहुत पतले मलमल का बड़ा कुर्ता बनवाया। मलमल बहुत ही सुदंर और बहुत पुराना कपड़ा है। उन्हों ने बहुत अच्छा  मलमल लिया। वह बहुत ही पतला और पारदर्शी था। गाड़ी हमेशा की तरह दस घंटे लेट आई। बाकी सभी लोग चले गए थे। सिवाय मेरे। तूम तो जानते है कि मैं कितना जिद्दी हूं। स्टेशन मास्टर ने भी मुझसे कहा: बेटा तुम्हारा तो कोई जवाब नहीं है। सब लोग चले गए हैं किंतु तुम तो शायद रात को भी यहीं पर ठहरने के लिए तैयार हो। और अभी भी गाड़ी के आने को कुछ पता नहीं है। और तुम सुबह चार बजे से उसका इंत...

१. राजीव गांधी की हत्या 21 मई 1991 को हुई और ठीक एक महीने बाद 21 जून 1991 को 'राजीव गांधी फाउंडेशन' नाम से एक NGO बनाया गया।जी हां, राजीव गांधी की हत्या के सिर्फ एक महीने बाद।

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१. राजीव गांधी की हत्या 21 मई 1991 को हुई और ठीक एक महीने बाद 21 जून 1991 को 'राजीव गांधी फाउंडेशन' नाम से एक NGO बनाया गया। जी हां, राजीव गांधी की हत्या के सिर्फ एक महीने बाद। २. सोनिया गांधी ने 1993 में ब्रिटेन में राजीव गांधी फाउंडेशन की ब्रांच खोली और ब्रिटेन सरकार ने उनकी उपस्थिति में इसके संबंध में प्रस्ताव पारित किया। ३. 1993 में सोनिया गांधी राजीव गांधी फाउंडेशन से जुड़े काम के लिए अमेरिका गईं। काम क्या था, ये जानकारी नहीं मिली। ४. उसी साल 1993 में ही जोर्ज सोरोस ने न्यूयॉर्क में ओपन सोसाइटी फाउंडेशन की स्थापना की। संयोग? 5. दिसंबर 1994 में फोरम ऑफ डेमोक्रेटिक लीडर्स इन द एशिया-पैसिफिक (FDL-AP) नाम से एक NGO शुरू किया गया। ६. कुछ अन्य लक्ष्यों के अलावा, इस NGO का मुख्य लक्ष्य था 'स्वतंत्र कश्मीर'! जी हां, आपने सही पढ़ा, 'स्वतंत्र कश्मीर'! आगे का घटनाक्रम चौंकाने वाला है, बने रहें। ७. 'राजीव गांधी फाउंडेशन की अध्यक्ष' के रूप में सोनिया गांधी इस फोरम की सह-अध्यक्ष थीं। फिर से पढ़िए, राजीव गांधी फाउंडेशन की अध्यक्ष के रूप में! FDL-AP के लगभग सभी सदस...

वेदों की ओर लौटे ये कहावत सच हो गई

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https://pplx.ai/vmplenterp35281 वेदों की ओर लौटे ये कहावत सच हो गई सुनीता विलियम्स के चौंकाने वाले खुलासे अंतरिक्ष में नौ महीने बिताने के बाद अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स द्वारा पत्रकारों से किया गया वक्तव्य इस समय पूरे विश्व में चर्चा का विषय बना हुआ है। "मुझे अंतरिक्ष में फँस जाना ईश्वर की इच्छा जैसा लग रहा था। जब मुझे अंतरिक्ष में 20 दिन हो गए थे, तब मैं मानो मृत्यु से सामना कर रही थी। भोजन और पानी का भंडार कम होने लगा तो मुझे लगा कि अब आगे कैसे जिया जाए? उसी समय मुझे सनातन धर्म में चैत्र नवरात्रि के उपवास की याद आई। उस दिन से मैं शाम को थोड़ा भोजन और पानी लेती और सुबह केवल थोड़ा पानी। एक महीना इस प्रकार बीत गया और मैं स्वस्थ और प्रसन्न थी। मुझे लगने लगा कि मैं और कुछ समय तक जीवित रह सकती हूँ। "मृत्यु की प्रतीक्षा करते समय मैंने कंप्यूटर खोला और सोचा कि बाइबल पढ़ूँ। उसे मैं पहले कई बार पढ़ चुकी थी, इसलिए एक पन्ने के बाद मुझे ऊब हो गई। तब मुझे फिर से रामायण और भगवद्गीता पढ़ने की इच्छा हुई (अब लगता है कि उससे मुझे किसी शक्ति का अनुभव हुआ)। मैंने उसका अंग्रेज़ी अनुवाद डाउन...

कानपूर के हिन्दू का पलायन

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*कानपुर के हिन्दुओं का पलायन...!!***  *कानपुर के मुसलमानों का प्लान!!!!कानपुर के हिन्दुओ पूरा पढ़ो और शेयर करो हर सनातनी को!!!*  कानपुर के हिन्दुओं के लिए एक चेतावनी या सलाह जो कह लो!!!! कानपुर के मुल्लों का मिशन 2030!!!! https://pplx.ai/vmplenterp35281  ( *1* ) *(नई सड़क)* आज से 35 साल पहले हिन्दु रहते थे मेजोरिटी में, अब वहाँ से हिन्दू पलायन कर चुका है!! ( *2* ) *(बेकनगंज)* 50 साल पहले वहा सिंधी समाज के लोग रहा करते थे और जो आज दुकानों मे बैठ के जोहरी सोना कंगन बेच रहे हैं, वह सब हिन्दुओं की दुकानें हुआ करती थी, सब बेच बेच के चले गये!  वहाँ आज भी हमारा मंदिर है, लेकिन जर्ज़र टूटा हुआ और मुसलमानो ने कब्ज़ा कर रखा है!! उनके डर की वजह से कोई आवाज़ भी नहीं उठाता, *वहाँ करीब 21 मंदिर है* *सब सालो से बंद है, वजह हिन्दू आबादी का पलायन!*  ( *3* ) ( *चमनगंज* ) सनातनियों ये कानपुर का ऐसा इलाका है *जिसको मिनी पाकिस्तान कहा जाता है* यहा बदमाशों, बिल्डरो का बोलबाला रहता है! सिर्फ 10 से 15 साल मे यहा से 20% हिन्दु पलायन करके भाग खड़े हुए पहले यहा 30 से 32% हिन्दु आबादी रहती थी ...

क्या आप जानते है कि #बॉडी_पार्ट्स आते कहाँ से है ? मुर्दाघरो में पड़ी लाशों से या एक्सीडेंट में मरने वालो से...?? जानना है तो पोस्ट पढिए !!

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क्या आप जानते है कि #बॉडी_पार्ट्स आते कहाँ से है ? मुर्दाघरो में पड़ी लाशों से या एक्सीडेंट में मरने वालो से...??  जानना है तो पोस्ट पढिए !! जरूरत के हिसाब से अंगदान नही हो पाता, अब आप 40 लाख देकर किडनी बदलवा देते हो। अब पैसे दिए हो तो 16-25 आयु के आसपास की मजबूत किडनी ही लगाएगा डाॅक्टर... सवाल फिर से वही.... कि “बॉडी पार्ट्स” आते कहाँ से है ? 16-25 वर्ष के लड़के ज्यादातर नशा करके अपने ज्यादातर पार्ट खराब कर चुके होते हैं... और इनका निकालना थोड़ा कठिन कार्य भी है। हाँ ! एक जगह है और वो है... भारत में मिडिल क्लास फैमिली की लड़कियां...!! ये लडकियां सिगरेट, गुटखा या शराब नही यूज करती और बॉडी को मेंटेन रखती हैं। इनके दाँत, हड्डी, आँते, चमडा़, क्रेनियम, लीवर, किडनी, हृदय सब सही और ट्रांसप्लांट के लिए परफेक्ट होता है... “लव जिहाद” का एक पहलू यह भी है... इन लड़कियों में कथित प्रेम का वायरस डालकर इनको कहीं भी ले जाना आसान होता है... इस वायरस का अर्थ दिमाग में प्रेम-प्यार का कीड़ा। इसीलिए दिसंबर में केदारनाथ जैसी “लव जिहाद” प्रोमोटिंग फिल्में आती हैं.. दिसम्बर में फ़िल्मी हीरोटाइप राज, कर...

RSS की प्रार्थना का हिन्दी में अनुवाद ... पढ़ो और सोचिये कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की भारत माता के प्रति भावना क्या है 🚩1. नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे, त्वया हिन्दुभूमे सुखं वर्धितोsहम्।

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RSS की प्रार्थना का हिन्दी में अनुवाद ... पढ़ो और सोचिये  कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की भारत माता के प्रति भावना क्या है 🚩 1. नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे, त्वया हिन्दुभूमे सुखं वर्धितोsहम्। 🚩 हे प्यार करने वाली मातृभूमि! मैं तुझे सदा (सदैव) नमस्कार करता हूँ। तूने मेरा सुख से पालन-पोषण किया है। 🚩 2. महामङ्गले पुण्यभूमे त्वदर्थे, पतत्वेष कायो नमस्ते नमस्ते।। १।। 🚩 हे महामंगलमयी पुण्यभूमि! तेरे ही कार्य में मेरा यह शरीर अर्पण हो। मैं तुझे बारम्बार नमस्कार करता हूँ। 🚩 3. प्रभो शक्ति मन्हिन्दुराष्ट्राङ्गभूता, इमे सादरं त्वाम नमामो वयम् त्वदीयाय कार्याय बध्दा कटीयं, शुभामाशिषम देहि तत्पूर्तये। 🚩 हे सर्वशक्तिशाली परमेश्वर! हम हिन्दूराष्ट्र के सुपुत्र तुझे आदर सहित प्रणाम करते है। तेरे ही कार्य के लिए हमने अपनी कमर कसी है। उसकी पूर्ति के लिए हमें अपना शुभाशीर्वाद दे। 🚩 4. अजय्यां च विश्वस्य देहीश शक्तिम, सुशीलं जगद्येन नम्रं भवेत्, श्रुतं चैव यत्कण्टकाकीर्ण मार्गं, स्वयं स्वीकृतं नः सुगं कारयेत्।। २।। 🚩 हे प्रभु! हमें ऐसी शक्ति दे, जिसे विश्व में कभी कोई चुनौती न दे सके, ऐसा शुद्ध च...

कहानी लक्ष्मीकांत पांडेय जी की हैं…. और जब मैंने पढ़ी तो मेरी आंखों में से आंसू नहीं रुक रहे थे…

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  कहानी लक्ष्मीकांत पांडेय जी की हैं…. और जब मैंने पढ़ी तो मेरी आंखों में से आंसू नहीं रुक रहे थे… आशा करती हूं आपको पसंद आएगी… ये कोई कहानी नही बल्कि आँखों देखी सच्ची घटना है....!! मेरी छोटी बुआ….!!!! रक्षाबंधन का त्यौहार पास आते ही मुझे सबसे ज्यादा जमशेदपुर (झारखण्ड )वाली बुआ जी की राखी के कूरियर का इन्तेज़ार रहता था. कितना बड़ा पार्सल भेजती थी बुआ जी. तरह-तरह के विदेशी ब्रांड वाले चॉकलेट,गेम्स, मेरे लिए कलर फूल ड्रेस , मम्मी के लिए साड़ी, पापाजी के लिए कोई ब्रांडेड शर्ट. इस बार भी बहुत सारा सामान भेजा था उन्होंने. पटना और रामगढ़ वाली दोनों बुआ जी ने भी रंग बिरंगी राखीयों के साथ बहुत सारे गिफ्टस भेजे थे. बस रोहतास वाली जया बुआ की राखी हर साल की तरह एक साधारण से लिफाफे में आयी थी. पांच राखियाँ, कागज के टुकड़े में लपेटे हुए रोली चावल और पचास का एक नोट. मम्मी ने चारों बुआ जी के पैकेट डायनिंग टेबल पर रख दिए थे ताकि पापा ऑफिस से लौटकर एक नजर अपनी बहनों की भेजी राखियां और तोहफे देख लें... पापा रोज की तरह आते ही टी टेबल पर लंच बॉक्स का थैला और लैपटॉप की बैग रखकर सोफ़े पर पसर गए थे. "च...

सिंहासन हिल उठे राजवंशों ने भृकुटी तानी थी,बूढ़े भारत में आई फिर से नयी जवानी थी,गुमी हुई आज़ादी की कीमत सबने पहचानी थी,दूर फिरंगी को करने की सबने मन में ठानी थी।

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सिंहासन हिल उठे राजवंशों ने भृकुटी तानी थी, बूढ़े भारत में आई फिर से नयी जवानी थी, गुमी हुई आज़ादी की कीमत सबने पहचानी थी, दूर फिरंगी को करने की सबने मन में ठानी थी। चमक उठी सन सत्तावन में, वह तलवार पुरानी थी, बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी, खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।। कानपूर के नाना की, मुँहबोली बहन छबीली थी, लक्ष्मीबाई नाम, पिता की वह संतान अकेली थी, नाना के सँग पढ़ती थी वह, नाना के सँग खेली थी, बरछी ढाल, कृपाण, कटारी उसकी यही सहेली थी। वीर शिवाजी की गाथायें उसकी याद ज़बानी थी, बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी, खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।। लक्ष्मी थी या दुर्गा थी वह स्वयं वीरता की अवतार, देख मराठे पुलकित होते उसकी तलवारों के वार, नकली युद्ध-व्यूह की रचना और खेलना खूब शिकार, सैन्य घेरना, दुर्ग तोड़ना ये थे उसके प्रिय खिलवार। महाराष्टर-कुल-देवी उसकी भी आराध्य भवानी थी, बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी, खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।। हुई वीरता की वैभव के साथ सगाई झाँसी में, ब्याह हुआ रानी बन आई लक्ष्...

यह पोस्ट आज से ठीक 5 वर्ष पूर्व का है। आज भी उसी 5 साल पुरानी कसौटी पर पुनः अवलोकन कीजिए।राहुल गांधी के लिए मुसीबतों का दौर बढ़ता जा रहा है। राहुल गांधी एक ऐसे व्यक्ति के रूप में देश की राजनीति में देखे जाते हैं जिन्होंने अभी तक अपनी राजनीतिक परिपक्वता को छुआ नहीं है।

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यह पोस्ट आज से ठीक 5 वर्ष पूर्व का है। आज भी उसी 5 साल पुरानी कसौटी पर पुनः अवलोकन कीजिए। राहुल गांधी के लिए मुसीबतों का दौर बढ़ता जा रहा है। राहुल गांधी एक ऐसे व्यक्ति के रूप में देश की राजनीति में देखे जाते हैं जिन्होंने अभी तक अपनी राजनीतिक परिपक्वता को छुआ नहीं है। उनकी राजनीतिक परिपक्वता के बारे में संदेह आज भी होता है। इस बीच राहुल गांधी के और लोकप्रिय होने की बातें विभिन्न इकोसिस्टम द्वारा किए जाती रही है। यह वह कांग्रेसी इकोसिस्टम है जो कांग्रेस पार्टी ने 70 साल में बनाया है। दुर्भाग्यवश भारतीय जनता पार्टी के पास ऐसा कोई सिस्टम नहीं है। यदि होता तो निश्चित रूप से मान कर चलिए कि नरेंद्र मोदी के सामने परसेप्शन के मामले में कोई टिक ना पाता । वैसे आज भी स्थितियां कुछ ऐसी ही है लेकिन इसके लिए नरेंद्र मोदी को जो जी तोड़ मेहनत करनी पड़ी है वह देश की जनता जानती है।   कांग्रेस पार्टी को एक अमरत्व प्राप्त है। अमरत्व का मतलब देश में स्थितियां चाहे जो भी हो कांग्रेस पार्टी कभी दोषी नहीं रही। जब देश में महंगाई बढ़ी तो कहां गया कि महंगाई बढ़ गई है। वहां कांग्रेस को दोष नहीं द...