Nirbhaya : क्या आप अजमेर रेप कांड के बारे में जानते हैं?
वर्ष 1992 में अजमेर बलात्कार कांड उस समय का सबसे बड़ा कांड था | रसूखदार दोस्तों के समूह ने पहले तो स्कूल की कुछ लडकियों को धोखे से अपने चंगुल में फसाया और फिर उनका बलात्कार किया | उसके बाद वो उन्ही लडकियों की सहेलियों को बुलाते और जबरन उनका बलात्कार कर अश्लील तस्वीरें खींच लेते | बलात्कार के पश्चात जब उन्हें समाज और परिवार का साथ नहीं मिला तो उनमें से 6 पीड़ित लड़कियों ने आत्महत्या कर ली | इस काण्ड में 8 व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया औ न्यायालय द्वारा दोषियों को आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई गयी, पर कुछ समय पश्चात् न्यायालय द्वारा उनकी सज़ा घटाकर 10वर्ष कर दी गयी|फारूक चिश्ती नाम के आदमी ने पहले सोफ़िया स्कूल की एक लड़की को फंसाया. लड़की की अश्लील फोटो खींच ली. बाद में इस फोटो के जरिये ब्लैकमेल करके और लड़कियां बुलाई गईं. डर कर लड़की अपनी दोस्तों को भी फार्म हाउस ले जाने लगी. उसकी दोस्त अपनी और दोस्तों को. एक के बाद दूसरी, दूसरी के बाद तीसरी. ऐसे करके एक ही स्कूल की करीब सौ से ज्यादा लड़कियों के साथ रेप हुआ. घर वालों की नज़रों के सामने से ये लकड़ियां फार्म हाउसों पर जातीं. कहते हैं कि बाकायदा गाड़ियां लेने आती थीं. और घरों पर छोड़ कर भी जातीं. लड़कियों की रेप के वक्त फोटोज खींच ली जातीं. फिर डरा-धमका कर और लड़कियों को बुलाया जाता. ये भी कहा जाता है कि स्कूल की इन लड़कियों के साथ रेप करने में नेता, सरकारी अधिकारी भी शामिल थे.
सोफ़िया स्कूल और कॉलेज , अजमेर---
मास्टरमाइंड थे """कांग्रेस यूथ लीडर"""
इस स्कैंडल के मास्टरमाइंड थे फारूक चिस्ती, नफीस चिस्ती और अनवर चिस्ती. तीनों ही ""यूथ कांग्रेस ""के लीडर थे. फारूक प्रेसिडेंट की पोस्ट पर था. इन लोगों की पहुंच दरगाह के खादिमों (केयरटेकर्स) तक भी थी. खादिमों तक पहुंच होने के कारण रेप करने वालों के पास राजनैतिक और धार्मिक, दोनों ही पॉवर थी. रेप की शिकार लड़कियां "हिंदू" परिवारों से थीं. अधिकारियों को लगा कि केस का खुलासा होने से इसे ‘हिन्दू-मुस्लिम’ नाम देकर दंगे हो सकते हैं.
आगे चलकर ब्लैकमैलिंग में और भी लोग जुड़ते गये. आखिरी में कुल 18 ब्लैकमेलर्स हो गये. इन लोगों में लैब के मालिक के साथ-साथ नेगटिव से फोटोज डेवेलप करने वाला टेकनिशियन भी था.
इंडिया के सबसे बड़े सेक्स स्कैंडल में आने वाले इस केस ने बड़ी-बड़ी कोंट्रोवर्सीज की आग को हवा दी. जो भी लड़ने के लिए आगे आता, उसे धमका कर बैठा दिया जाता. अजमेर मुहल्ला समूह NGO ने जब केस के लिए लड़ाई शुरू की तो जान से मारने की धमकी की वजह से एक्टिविस्ट्स ने हाथ पीछे खींच लिए. कहते हैं वकील पारसम शर्मा को भी केस बंद करने की धमकियां मिलीं. लड़कियों के घरवालों ने तो सामने आने से ही मना कर दिया था.
जिन लड़कियों की फोटोज खींची गई थीं, उनमें से कईयों ने सुसाइड कर लिया. एक ही साथ 6-7 लड़कियां मर गईं. न सोसाइटी आगे आ रही थी, न उनके परिवार वाले. डिप्रेस्ड होकर इन लड़कियों ने ये कदम उठाया. एक ही स्कूल की लड़कियों का एक साथ सुसाइड करना अजीब सा था. ये बात आगे चलकर केस को एक्सपोज करने में मददगार रही.
स्कैंडल का राज खोलने वाली दो लड़कियां
पुलिस और महिला संगठनों की कोशिशों के बावजूद लड़कियों के परिवार आगे नहीं आ रहे थे. इस गैंग में शामिल लोगों के नेताओं से कनेक्शन्स की वजह से लोगों ने मुंह नहीं खोला. बाद में किसी NGO ने पड़ताल की. फोटोज और वीडियोज के जरिए तीस लड़कियों की शक्लें पहचानी गईं. इनसे जाकर बात की गई. केस फाइल करने को कहा गया. लेकिन सोसाइटी में बदनामी के नाम से बहुत परिवारों ने मना कर दिया. बारह लड़कियां ही केस फाइल करने को तैयार हुई. बाद में धमकियां मिलने से दस लड़कियां भी पीछे हट गई. बाकी बची दो लड़कियों ने ही केस आगे बढ़ाया. इन लड़कियों ने सोलह आदमियों को पहचाना. ग्यारह लोगों को पुलिस ने अरेस्ट किया.
केस से रिलेटेड कुछ बातें---
1. 1992 में पूरे स्कैंडल का भांडा फूटा. लड़कियों ने आरोपियों की पहचान की और आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया.
2. 1994 में आरोपियों में से एक आरोपी ने सुसाइड कर ली.
3. केस का पहला फैसला छः साल बाद आया जिसमे डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने आठ लोगों को उम्र कैद की सजा सुनाई.
4. इसी बीच आरोपी फारूक चिस्ती ने दिमागी संतुलन खोने का बहाना बनाया जिससे केस को लटकाया जा सके
5. कुछ दिन बाद कोर्ट ने चार आरोपियों की सजा कम करके दस साल के लिए जेल भेज दिया
6. सजा कम होने बाद राजस्थान गवर्मेंट नें सुप्रीम कोर्ट में इस दस साल की सजा के खिलाफ अपील लगा दी. जेल में बंद चार आरोपियों ने दस साल की जजमेंट को सुप्रीम कोर्ट चैलेंज किया .
7. सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान गवर्नमेंट और आरोपियों दोनों की फाइल्स को ख़ारिज कर दिया.
8. इस केस का एक आरोपी 25 हजार का इनामी सलीम नफीस चिश्ती उन्नीस साल बाद 2012 में पकड़ा गया. बेल पर छुट कर आने के बाद से उसके बारे में कोई खबर नहीं है.
उसके बाद से इस केस के बारे में कोई नई खबर नहीं है कि क्या हुआ उन रेपिस्ट्स का. सलीम कहां है. फारूक की दिमागी हालत ठीक हुई कि नहीं. अजमेर बलात्कार काण्ड के अपराधी चिश्तियों में से कोई भी अब जेल में नहीं है....उस वक़्त सरकार कांग्रेस की थी और आरोपी भी "कांगेस पार्टी "से तालुकात रखते थें तो जाहिर सी बात थी डर का कोई खौफ़ नही था न ही सरकार का कोई खौफ़,,आज मैं सबसे पूछना चाहता हूं कि उस घटना पर दोबारा ज़िक्र क्यों नही हुआ जहां,,हमारी सैकड़ो बहनों की इज़्ज़त की नीलामी हुई थी। आज तो ज़रा सी बात पर सरकार से सवाल कर लेते हो तब कहाँ थे और आज भी क्यों नही चर्चा होती इन बातों की,
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